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प्रोबायोटिक्स खाने से बचेंगे ब्रेस्ट कैंसर से

लेटेस्ट By Gayatree Verma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 29, 2016
प्रोबायोटिक्स खाने से बचेंगे ब्रेस्ट कैंसर से

उम्र बढ़ने के साथ अधिकतर महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित होती हैं। ऐसा स्तनों में उम्र के साथ लैक्टोबेसिलस और स्टपटोकोकस बैक्टीरिया की कमी के कारण होता है।

अगर ब्रेस्ट कैंसर से बचना चाहते हैं तो अपने खाने में ज्यादा से ज्यादा प्रोबायोटिक्स शामिल करें। खाने में उचित मात्रा में प्रोबायोटिक्स लेने से स्तन में लाभकारी बैक्टीरिया के अनुपात में बढ़ोतरी होती है, जो ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है। प्रोबायोटिक्स के इस गुण की पुष्टि हाल ही में एक शोध में की गई है। शोध में पता चला है कि स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बैक्टीरिया लैक्टोबेसिलस और स्टपटोकोकस कैंसरग्रस्त स्तनों की तुलना में स्वस्थ स्तनों में ज्यादा पाए जाते हैं। इसका अर्थ हुआ कि ये दोनों बैक्टीरिया ब्रेस्ट को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। इन दोनों बैक्टीरिया में एंटी-कारसिनोजेनिक गुण पाए जाते हैं।


कनाडा के वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ग्रेगर रीड ने बताया, “इसलिए हमने इसे लेकर शोध किया क्या महिलाओं को और खासकर उन महिलाओं को जिन्हें स्तन कैंसर का खतरा ज्यादा है, उन्हें अपने आहार में प्रोबायोटिक लैक्टोबेसिलस को शामिल करना चाहिए, ताकि उनके स्तनों में लाभकारी बैक्टीरिया का अनुपात बढ़ सके?”

इसके विपरीत महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का कारण एसचेरिचिया और स्टाफाइक्लोलोकोकस जैसे हानिकारक बैक्टीरिया को माना गया है। इन बैक्टीरिया की स्तनों में संख्या बढ़ने पर ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनती है। इस शोध को एप्लाइड एंड एनवाइरोनमेंट माइक्रोबॉयलॉजी जर्नल में प्रकाशित किया गया है, जिसमें सलाह दी गई है कि महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए खूब दही खानी चाहिए।

रीड कहते हैं कि कैंसर को बढ़ावा देने वाले बैक्टीरिया को निशाना बनानेवाले एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से स्तन कैंसर के प्रबंधन का एक और विकल्प मिलेगा। इस शोध के दौरान शोधकर्तांओं ने 58 महिलाओं के स्तनों के ऊतकों का अध्ययन किया। ये सारी महिलाएं अलग-अलग तरह के ब्रेस्ट कैंसर से ग्रस्त थीं। इसके साथ ही इन महिलाओं में 23 स्वस्थ महिलाओं को भी शामिल किया गया था। इन महिलाओं ने सर्जरी के जरिये अपने स्तनों का आकार छोटा या बड़ा कराया था। शोधकर्ताओं ने ऊतकों में बैक्टीरिया की पहचान के लिए उनकी डीएनए श्रृंखला का प्रयोग किया।

 

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