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प्रेग्नेंसी में थायरॉयड की समस्या से जरा बच कर रहें

गर्भावस्‍था By अनुराधा गोयल , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 26, 2013
प्रेग्नेंसी में थायरॉयड की समस्या से जरा बच कर रहें

गर्भावस्था के प्रथम तीन महीनों में थायरॉयड होने से गर्भवती महिला में गंभीर समस्या भी हो सकती है। आइए जानें प्रेग्नेंसी में थायरॉयड की समस्या के बारे में।

 

थायरॉयड की समस्या आज के समय में आम हो गई है, खासतौर पर गर्भवती महिलाओं में। गर्भावस्थआ के समय थायरॉयड की समस्या के गंभीर होने पर आपको और शिशु दोनों को खतरा हो सकता है। लेकिन थायरॉयड की समस्या से बचना संभव है। आइये जानें प्रेग्नेंसी में थायरॉयड की समस्या क्या है। 

प्रेग्नेंसी में थायरॉयडथायरॉयड गले का रोग है। गले का यह रोग हार्मोन असंतुलन का एक बड़ा कारण हैं। थायरॉयड समस्या को नियंत्रि‍त किया जा सकता है लेकिन उसके लिए जरूरी है सही इलाज और व्यायाम। गर्भावस्था के प्रथम तीन महीनों में थायरॉयड होने से गर्भवती महिला में गंभीर समस्या भी हो सकती है। जिन महिलाओं को थायरॉयड संबंधी समस्या है, उन्हें गर्भधारण के पहले तो जांच करानी ही चाहिए बल्की गर्भावस्था के हर महिने भी जांच कराते रहना चाहिए। ऐसा करने से वे कई परेशानियों को विक्राल रूप लेने से रोक सकती हैं।  आवश्यक्ता अनुसार दवाओं की डोज घटाई-बढ़ाई जा सकती है ताकि मां और शिशु दोनों को नुकसान से बचाया जा सकता है। आइए प्रेग्नेंसी में थायरॉयड की समस्या के बारे में विस्तार से कुछ तथ्यों को जानें।

 

  • थायरॉयड पाचनक्रिया पर खासा असर डालता है। थायरॉयड बीमारी के दौरान पाचनक्रिया सामान्य से 50 फीसदी कम हो जाती है। इतना ही नहीं थायरॉयड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोंस की अधिकता के कारण पाचनक्रिया पर असर पड़ता है,जो कि बड़ी स्वास्‍थ्‍य समस्याओं के साथ ही गर्भावस्था के दौरान खतरनाक स्थिति भी पैदा कर सकता है।
  • ऐसा नहीं कि थायरॉयड का इलाज नहीं लेकिन थायरॉयड से निजात पाने के लिए उसका सही इलाज जरूरी है, इसलिए गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान हर महीने थायरॉयड की जांच करवानी चाहिए।
  • गर्भावस्‍था के दौरान थायरॉयड के इलाज के लिए दी जाने वाली डोज जरूरत के हिसाब से घटाई या बढ़ाई भी जा स‍कती हैं। जिससे होने वाले बच्चे को किसी भी नुकसान से बचाया जा सकें।
  • आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान थायरॉयड के इलाज में दवाओं के डोज बढ़ा दिए जाते हैं लेकिन बच्चे के जन्म के बाद इसे जरूरत के हिसाब से कम कर दिया जाता है।

  • गंभीर थायरॉयड होने यानी हाइपोथायरॉयड होने से गर्भपात की संभावना बढ़ जाती हैं। इतना ही नहीं भ्रूण के गर्भ में ही मृत्यु होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • थायरॉयड के कारण बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता है, बच्चा असमान्य भी हो सकता है। बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में भी समस्या आती हैं।
  • थायरॉयड पीडि़त प्रेग्नेंट महिलाओं के बच्चों का विकास सामान्य बच्चों की तरह नहीं होता बल्कि धीमी गति से होता है।
  • थायरॉयड पीडि़त प्रेग्नेंट महिलाओं के बच्चों को यानी नवजात शिशुओं का नियोनेटल हाइपोथायरॉयड की समस्या हो सकती हैं।

 

गर्भवती महिलाओं को थायरॉयड का पता लगते ही उन्हें तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए। डॉक्टर के सलाहानुसार समय-समय पर लगातार जांच करानी चाहिए और नियमित रूप से दवाओं का सेवन करना चाहिए जिससे होने वाले बच्चे पर थायरॉयड का कोई खास प्रभाव न पड़े और गर्भवती महिला भी सुरक्षित रहें।

 

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