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प्रकृति की गोद में होता है दिमाग तरोताजा

लेटेस्ट By Aditi Singh , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 24, 2015
प्रकृति की गोद में होता है दिमाग तरोताजा

प्रकृति के आस-पास रहना इंसान की सेहत के लिए काफी फायदेमंद साबति होता है। इससे दिमाग को ताजगी व सुकून का अहसास होता है।

प्राकृतिक वातावरण में ही इंसान को दिली सुकून मिलता है। अमेरिका में हुए एक शोध के मुताबिक इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट्स से दूरी बनाते हुए सिर्फ चार दिन भी कुदरत की गोद में बिताने से दिमाग को तरोताजा होने का मौका मिल जाता है। यही नहीं इसके साथ ही इससे दिमाग की क्रिएटिवी में भी इजाफा होता है। और दिमाग अधिक सक्रिय होकर काम करता है।

Nature in Hindi

प्रकृति के लाभ

इसके मद्देनजर शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में ज्‍यादा से ज्‍यादा समय बिताने की सलाह देते हैं। शोध के नतीजे एक विज्ञान पत्रिका में छपे हैं। हरे-भरे पहाड़, जंगल और नदियां हमें हमेशा से ही आकर्षित करती हैं। हरी-भरी हसीन वादियां जहां आंखों को सुकून देती हैं वहीं दिमाग को भी तरोताजा करती हैं। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ उटाह के शोधकर्ताओं का दावा है कि दिमाग अगर किसी खास परेशानी में डूबा है या किसी सवाल का जवाब उसे नहीं मिल रहा है तो सबसे अच्‍छा तरीका है कि अपने गैजेट्स से छुट्टी लेकर कुछ दिन के लिए प्रकृति की गोद में चले जाइए। पृथ्वी एक प्रभावशाली उपचारक है । नंगे पैर जब हम पृथ्वी के संपर्क में आते हैं तो पृथ्वी के स्वतंत्र इलेक्ट्रोनों का त्वचा के माध्यम से हमारे शरीर में स्थानांतरण होता है । ये इल्क्ट्रोन अत्यंत समर्थ एंटीऑक्सीडैंट हैं जो शरीर में उपलब्ध स्वतंत्र मूलकों (radicals) की सफ़ाई करते हुए उन्हें निष्प्रभावी कर देते हैं जिससे शरीर में कहीं भी आई हुई सूजन और साथ ही ऊतकों (tissues) और कोशाणुओं (cells) के विकार भी घटते हैं ।
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बढ़ाती है सक्रियता

प्रकृति की यह सैर दिमाग के सोचने-समझने की क्षमता में 50 फीसदी तक का इजाफा कर देती है। लगातार काम करते रहने से दिमाग काफी थक जाता है और इसके बाद इस तरह का माहौल उसके काम करने की क्षमता में इजाफा करता है। इसके साथ ही इस शोध में इस बात का भी पता चला कि मोबाइल फोन, लैपटॉप या अन्‍य तकनीकी चीजों से कुछ दिनों के लिए दूर रहने से भी दिमाग को फायदा पहुंचता है।पानी के किनारे पर या बरसात में नंगे पैर टहलना, कम गहरे पानी में बिना जूतों के चलना सभी को अच्छा लगता है और थोड़ी ही देर में हम अपने आप को उत्साहित महसूस करते हैं । इसका कारण यह है कि पैरों के तले में नसों (nerves) का एक गहन (intricate) व सुग्राही (sensitive) तंत्र (network) होता है और एक्यूप्रेशर के कई बिंदु (acupuncture points) होते हैं जो पृथ्वी के स्वतंत्र इलेक्ट्रोनों को बटोरते हैं और हमें स्वस्थ करने में सहायता करते हैं ।

हरी घास पर कुछ देर चलने से मानसिक अवसाद में 62% कमी देखी गई है।

Image Source- Getty

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