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पीसीओएस की वजह से महिलाएं खो सकती हैं मां बनने की क्षमता, जानिये इसके लक्षण

महिला स्‍वास्थ्‍य By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 08, 2018
पीसीओएस की वजह से महिलाएं खो सकती हैं मां बनने की क्षमता, जानिये इसके लक्षण

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं में होने वाली बहुत ही आम समस्‍या है। आमतौर पर ये समस्या 30 साल से ऊपर की महिलाओं में पाई जाती थी मगर आजकल ये कम उम्र की लड़कियों को भी परेशान कर रहा है।

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं में होने वाली बहुत ही आम समस्‍या है। आमतौर पर ये समस्या 30 साल से ऊपर की महिलाओं में पाई जाती थी मगर आजकल ये कम उम्र की लड़कियों को भी परेशान कर रहा है। पीसीओएस महिला में होने वाली एक ऐसी समस्‍या हैं जिसमें अंडाशय में सिस्ट यानी गांठ आ जाती है। इसे मल्टीयसिस्टिक ओवरियन डिजीज भी कहा जाता है। अंडडिबों और हार्मोंस में गड़बड़ी इस बीमारी के मूल कारण होते हैं। यह बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है

पीसीओएस और गर्भधारण

पॉली सिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम होने पर गर्भधारण करने की संभावना बहुत कम हो जाती है। दरअसल पीसीओएस होने पर लड़कियों में मेल हार्मोन एंड्रोजन का लेवल बढ़ जाता है। इसी हार्मोन के कारण महिलाओं के चेहरे पर बाल निकलना, मूंछ निकलना, आवाज में भारीपन और अन्य पुरुषों वाले लक्षण दिखने लगते हैं। शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का ज्यादा लेवल अंडों के निर्माण में बाधा पहुंचाता है। इस कारण महिलाओं के शरीर में स्वस्थ अंडाणुओं का निर्माण नहीं हो पाता है। ये अस्वस्थ अंडाणु वीर्य के साथ फर्टिलाइजेशन नहीं कर पाते हैं और महिला प्रेगनेंट नहीं हो पाती है। पीसीओएस को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है मगर इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। इस रोग में दवा से ज्यादा जीवनशैली में बदलाव और परहेज का असर पड़ता है। शरीर का वजन कम करने और फिटनेस को बरकरार रखने से इस रोग से होने वाले नुकसानों को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। इसी के द्वारा ओव्युलेशन और मासिक चक्र को नियंत्रित किया जा सकता है।

लड़कियों में पीसीओएस की समस्‍या

आजकल अनियमित पीरियड्स की समस्या किशोरियों में बेहद आम हो गई है। यही समस्या आगे चलकर पीसीओएस का रूप ले सकती है। पीसीओएस एंडोक्राइन से जुड़ी ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं के शरीर में एंड्रोजेन्स या मेल हार्मोन अधिक होने लगते हैं। ऐसे में शरीर का हार्मोनल संतुलन गड़बड़ हो जाता है जिसका असर अंडों के विकास पर पड़ता है। इससे ओव्यूलेशन व मासिक चक्र रुक सकता है। इस तरह से सेक्स हार्मोन में असंतुलन पैदा होने से हार्मोन में जरा सा भी बदलाव मासिक धर्म चक्र पर तुरंत असर डालता है। इस अवस्‍था के कारण ओवरी में सिस्‍ट बन जाता है। इस समस्या के लगातार बने रहने से ओवरी के साथ प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है और तो और आगे चलकर यह समस्‍या कैंसर का रुप भी ले सकती है।

यह स्थिति सचमुच में घातक साबित होती है। ये सिस्ट छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाएं होते हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है। अंडाशय में ये सिस्ट एकत्र होते रहते हैं और इनका आकार भी धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है। यह स्थिति पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम कहलाती है। और यही समस्या ऐसी बन जाती है, जिसकी वजह से महिलाएं गर्भ धारण नहीं कर पाती हैं।

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पीसीओएस की समस्‍या के लक्षण

पीसीओएस के लक्षणों पर अक्‍सर लड़कियों का ध्‍यान नहीं जाता है। चेहरे पर बाल उग आना, अनियमित रूप से माहवारी आना, यौन इच्छा में अचानक कमी, गर्भधारण में मुश्किल होना, आदि कुछ ऐसे लक्षण हैं। इसके अलावा त्वचा संबंधी रोग जैसे अचानक भूरे रंग के धब्बों का उभरना या बहुत ज्यादा मुंहासे भी हो सकते हैं।

छोटी उम्र में पीसीओएस के कारण

मोटापा

आजकल मोटापे की समस्‍या बहुत ही आम हो गई है। हर दूसरा व्‍यक्ति ज्यादा वसा युक्त भोजन, व्यायाम की कमी और जंक फूड का सेवन करने के कारण मोटापे से ग्रस्‍त है। मोटापे के कारण आज छोटी उम्र की लड़कियों में भी पीसीओएस की समस्‍या पाई जाने लगी है। अत्यधिक चर्बी से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने से ओवरी में सिस्ट बनता है। मोटापा कम करने से इस बीमारी को बहुत हद तक काबू में किया जा सकता है। बीमारी के बावजूद वजन घटाने से ओवरीज में वापस अंडे बनने शुरू हो जाते हैं।

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खराब डाइट

जंक फूड शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं इसलिए जंक फूड, अत्यधिक तैलीय, मीठा व फैट युक्त भोजन खाने से बचें। साथ ही डायबिटीज भी इस बीमारी का बड़ा कारण हैं। इसलिए मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। इसके बजाय अपने आहार में हरी-पत्तेदार सब्जियां और फलों को शामिल करें।

लाइफस्‍टाइल

तनाव और चिंता के चलते आजकल की लड़कियां अपने खान पान पर बिल्‍कुल ध्‍यान नहीं देती। साथ ही लेट नाइट पार्टी में ड्रिंक और स्‍मोकिंग लड़कियों की लाइफस्‍टाइल का हिस्‍सा बन गया है। इसलिए पीसीओएस की समस्‍या से बचने के लिए अपनी दिनचर्या को सही करना बहुत जरूरी है। हार्मोंन को संतुलित करके पीसीओएस की समस्‍या को ठीक किया जा सकता है। इसके लिए लड़कियों को सही आहार और नियमित एक्सरसाइज को अपनाना होगा।

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