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बवासीर के इलाज के लिए आई नई सर्जरी, जड़ से खत्म करेगी रोग

अन्य़ बीमारियां By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 16, 2018
बवासीर के इलाज के लिए आई नई सर्जरी, जड़ से खत्म करेगी रोग

बवासीर जिसे अंग्रेजी में पाइल्स कहते हैं वह किसी भी उम्र में पुरुषों और महिलाओं को प्रभावित करने वाली अस्वास्थ्यकर जीवनशैली से संबंधित बीमारी है।

Quick Bites
  • नई तकनीक से संभव है पाइल्स यानि कि बवासीर का इलाज।
  • बवासीर दो तरह की होती है, अंदरूनी और बाहरी। 
  • सूखा अंजीर बवासीर के इलाज के लिए एक आयुर्वेदिक उपचार हैं।

बवासीर जिसे पाइल्स (Piles) भी कहते हैं वह किसी भी उम्र में पुरुषों और महिलाओं को प्रभावित करने वाली अस्वास्थ्यकर जीवनशैली से संबंधित बीमारी है। यह मर्ज अक्सर गुदा (एनस) की रक्त वाहिकाओं पर अत्यधिक दबाव के कारण उत्पन्न होता है। इस स्थिति में एनस में सूजन या मस्से पैदा हो जाते हैं। इसका दर्द बहुत ही असहनीय होता है। बवासीर मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण विकसित होता है। बवासीर दो तरह की होती है, अंदरूनी और बाहरी। अंदरूनी बवासीर में नसों की सूजन दिखती नहीं पर महसूस होती है, जबकि बाहरी बवासीर में यह सूजन गुदा के बिलकुल बाहर दिखती है।

बवासीर को पहचानना बहुत ही आसान है। मलत्याग के समय मलाशय में अत्यधिक पीड़ा और इसके बाद रक्तस्राव, खुजली इसका लक्षण है। इसके कारण गुदे में सूजन हो जाती है। आयुर्वेदिक औषधियों को अपनाकर बवासीर से छुटकारा पाया जा सकता है।

क्या है पाइल्स

पाइल्स गुदा के आसपास त्वचा के नीचे नसों के गुच्छे होते हैं, जिन्हें दो वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है। पहला,आंतरिक (गुदा के अंदर) और दूसरा (गुदा के बाहर)। रक्त वाहिकाओं पर अत्यधिक दबाव डालने वाली किसी गतिविधि से पाइल्स के होने का खतरा बढ़ जाता है। आमतौर पर लोग मल के साथ रक्त आने को बवासीर मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि बवासीर से पीड़ित 30 प्रतिशत रोगियों में मल के साथ रक्त आता है और शेष 70 प्रतिशत रोगियों में जलन, खुजली और कब्ज जैसे लक्षण प्रकट होते हैं।

पाइल्स होने के कारण

पुरानी कब्ज, मल त्याग में जोर लगाना, लगातार दस्त, गर्भावस्था और मोटापा आदि बवासीर के कुछ आम कारण हैं। इसके अलावा खानपान की अस्वास्थ्यकर आदतें, अधिक जोर लगाने वाले व्यायाम, लंबे समय तक बैठना या यात्रा करना और तरल पदार्थों का कम सेवन करना भी पाइल्स की समस्या पैदा करता है।

सर्जरी से उपचार है संभव

पाइल्स के इलाज में अनेक सर्जन पारंपरिक सर्जरी की तकनीक का उपयोग करने पर अधिक जोर देते हैं, लेकिन ऐसी सर्जरी के कारण मरीज की एनस के टिश्यूज को नुकसान पहुंच सकता है और उसकी रिकवरी धीरे-धीरे होती है।

नवीनतम लेजर उपचार (लेजर हेमरॉयडेक्टमी): पाइल्स की शुरुआती अवस्था में जब मस्से छोटे होते हैं, तब उनका इलाज स्पेशल लेजर के जरिये किसी भी तरह की चीरफाड़ के बगैर किया जाता है। वस्तुत: लेजर के जरिये पाइल्स का इलाज मरीज की अवस्था के अनुसार किया जाता है। जैसे ग्रेड 1 और ग्रेड 2 के अंतर्गत आने वाले मरीजों का इलाज स्पेशल लेजर के जरिये किया जाता है। यह लेजर प्रक्रिया लगभग 10 मिनट में पूरी हो जाती है। मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती।

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वहीं, ग्रेड 3 और ग्रेड 4 के अंतर्गत आने वाले मरीजों का इलाज करने के लिए लेजर मशीन को कटिंग मोड में रखा जाता है। लेजर की किरणें पाइल्स को सील कर देती हैं, जिसके कारण टांके लगाने की जरूरत आम तौर पर नहीं पड़ती। लेजर किरणों के जरिये पाइल्स को अच्छी तरह से देखा जा सकता है और रक्तस्राव को बंद किया जा सकता है। पाइल्स के जिन मरीजों में गुदा का भाग बहुत ज्यादा बाहर निकल आता है, उन्हें स्टेपलर विधि के साथ लेजर ट्रीटमेंट कराने से अत्यधिक लाभ मिलता है।

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नई तकनीक के लाभ

  • लेजर उपचार अधिक कारगर है।
  • लेजर तकनीक से टिश्यूज को कम से कम नुकसान होता है। इस कारण मरीज को दर्द कम होता है।
  • घाव जल्द भरता है।
  • लेजर उपचार प्रक्रिया के कुछ ही घंटों के भीतर मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।

पाइल्स के लिए घरेलू नुस्खे

  • अच्‍छे पाचन क्रिया के लिए फाइबर से भरा आहार बहुत जरूरी होता है। इसलिए अपने आहार में रेशयुक्त आहार जैसे साबुत अनाज, ताजे फल और हरी सब्जियों को शामिल करें। साथ ही फलों के रस की जगह फल खाये। खाने में सलाद के तौर पर मूली का सेवन करें। मूली पाइल्स की समस्या से निजात दिलाती है।
  • बवासीर के मस्‍सों को दूर करने के लिए मट्ठा बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए करीब दो लीटर छाछ लेकर उसमे 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और स्‍वादानुसार नमक मिलाकर पीएं।
  • आयुर्वेंद की महान देन त्रिफला से हम सभी परिचित है। इसके चूर्ण का नियमित रूप से रात को सोने से पहले 1-2 चम्‍मच सेवन कब्‍ज की समस्‍या दूर करने मेंं मदद करता है। जिससे बवासीर में राहत मिलती है।
  • छोटा सा जीरा पेट की समस्‍याओं बहुत काम का होता है। जीरे को भूनकर मिश्री के साथ मिलाकर चूसने से फायदा मिलता है। या आधा चम्‍मच जीरा पाउडर को एक गिलास पानी में डाल कर पियें। इसके साथ जीरे को पीसकर मस्‍सों पर लगाने से भी फायदा मिलता है।
  • सूखा अंजीर बवासीर के इलाज के लिए एक और अद्भुत आयुर्वेदिक उपचार हैं। एक या दो सूखे अंजीर को लेकर रात भर के लिए गर्म पानी में भिगों दें। सुबह खाली पेट इसको खाने से फायदा होता है।

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Written by
Atul Modi
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागFeb 16, 2018

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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