Subscribe to Onlymyhealth Newsletter

कैसे हो बच्चों के व्यक्तित्व का विकास

परवरिश के तरीके By Aditi Singh , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 24, 2015
कैसे हो बच्चों के व्यक्तित्व का विकास

एकल जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के पास यदि उनकी संतान उनके पास है तो उससे बड़ी खुशी की बात और कोई हो ही नहीं सकती। आइए जानें कुछ टिप्स कि कैसे एकल अभिभावक जीवन को संतुलित करें।

Quick Bites
  • आसपास का माहौल करता है बच्चों को प्रभावित।
  • बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाने की करें कोशिश।
  • बच्चों के साथ शालीनता और सभ्यता से करें बात।
  • बच्चों की समस्याओं को शांति से सुनकर सुलझायें।

बढ़ते हुए बच्चों के आसपास का माहौल उसके व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। इसलिए इश समय अपने बच्चें पर ध्यान देना बहुत आवश्यक होता है स्कूल और आस पास के बच्चों  के साथ उनका ‍आत्मविश्वास डगमगाता है तथा वह पढ़ाई तथा जीवन के हर क्षेत्र में पिछड़ जाता है। बच्चों का आत्मविश्वास कैसे बढ़ाया जाए तथा उसका व्यक्तित्व कैसे निखारा जाए, आइए हम देखते हैं।

 




शालीन भाषा का प्रयोग करें

बच्चों से हम हमेशा शालीन भाषा का प्रयोग करते हुए ही वार्तालाप करें। इससे बच्चों पर अच्‍छा प्रभाव पड़ेगा। हमको हमेशा बच्चों से मित्रवत् व्यवहार ही करना चाहिए, न कि शत्रुवत्। जैसा हम आचरण करते हैं, बच्चे भी वैसा ही सीखकर अपने व्यवहार में ढालते हैं अत: शालीनता सर्वोपरि है। यह तयप्राय: है कि जैसी भाषा का हम बार-बार प्रयोग करते हैं, वैसी की वैसी ही भाषा एक विज्ञापन ( मनोविज्ञान) के प्रचार अभियान की तरह बच्चों के मन-मस्तिष्क में घर करती जाती है तथा बच्चा धीरे-धीरे उसे ही सच मानने लग जाता है एवं उसकी वास्तविक प्रतिभा कहीं खो-सी जाती है अत: उसे कुंठित न करें।

ढीठ न बनाएं बच्चों को

ज्यादा डांटने-फटकारने, मारने-पीटने से बच्चा ढीठ बन जाता है फिर उस पर किसी बात का असर नहीं होता है, क्योंकि उसे पता रहता है मैं अच्‍छा या बुरा जो भी करूं, बदले में मुझे डांट-फटकार ही मिलेगी, प्यार-दुलार नहीं। ऐसी स्थिति में बाद में आगे चलकर बच्चा विद्रोही बन जाता है, जो ‍कि समाज के लिए काफी घातक सिद्ध होता है।

अलग-अलग मनोविज्ञान

बच्चे और बड़ों का मनोविज्ञान अलग-अलग होता है। मनोविज्ञान यानी सोचने-समझने- विचारने का तरीका। अगर बड़े यह सोचें कि बच्चे भी मेरा ही अनुसरण करें व मेरी ही दिखाई राह पर चलें, व मेरे जैसा ही बने तो यह बड़ों का हठाग्रह व दुराग्रह ही कहा जाएगा। च‍ूंकि बड़े समयानुसार अनुभव व परिपक्वता से लबरेज होते हैं अत: बच्चों से भी वही अपेक्षाएं करना नितांत ही गलत कहा जाएगा। स्वयं 'अपने जैसा' बच्चों को बनाने का हठीला प्रयास ना करें। यह एक प्रकार से बच्चों पर अन्याय ही कहा जाएगा।


बच्चे की भावनाओं को समझे और समस्याओं को दूर करने की कोशिश करें। इससे आप तो जीवन में खुश रहेंगे ही आपके बच्चें की परवरिश भी सामान्य बच्चों की तरह ही होगी।

 

Image Source-Getty

Read more article on parenting in hindi

Written by
Aditi Singh
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागAug 24, 2015

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK