• shareIcon

अच्छे मॉम-डैड बनना है तो ये हैं 2018 के लिए बेस्ट पैरेंटिंग टिप्स

परवरिश के तरीके By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 28, 2017
अच्छे मॉम-डैड बनना है तो ये हैं 2018 के लिए बेस्ट पैरेंटिंग टिप्स

समझदार मां-बाप बच्चों के फैसले खुद करने के बजाय बच्चों को इस लायक बनाते हैं कि वो अपने फैसले खुद कर सकें। पैरेंटिंग के ये टिप्स उन मां-बाप के लिए खास हैं जो अगली जनरेशन को समझते हुए उनके साथ-साथ चलना चाहते हैं।

समय तेजी से बदल रहा है और उसी के साथ बदल रही है आने वाली जनरेशन की सोच और उनके सपने। हर मम्मी-पापा का सपना होता है कि उनका बच्चा जिंदगी में कुछ बेहतर करे, अपनी एक अलग पहचान बनाए और जिंदगी से संघर्षों से जूझना सीखे। कई बार मम्मी-पापा अपने बच्चों के लिए ऐसी बातें भी खुद ही तय कर लेते हैं, जिनका फैसला बच्चों को बड़े होकर लेना है। वहीं कुछ समझदार मां-बाप बच्चों के फैसले खुद करने के बजाय बच्चों को इस लायक बनाते हैं कि वो अपने फैसले खुद कर सकें। पैरेंटिंग के ये टिप्स उन मां-बाप के लिए खास हैं जो अगली जनरेशन को समझते हुए उनके साथ-साथ चलना चाहते हैं।

इसे भी पढ़ें:- किशोरों को समझायें दोस्ती का मतलब

पढ़ाई का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं

कई मां-बाप पढ़ाई को लेकर गलत धारणा पाल लेते हैं। उन्हें लगता है कि किताबी ज्ञान ही सबकुछ है और वो बच्चों को दिनभर किताब में ही उलझाये रखना चाहते हैं। इस चक्कर में कई बार बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान ठीक से नहीं मिल पाता, जिसकी जरूरत स्कूल के बाद उन्हें सबसे ज्यादा पड़ती है। इसलिए बच्चों को पढ़ाई से अलग थोड़ा समय खेल-कूद, टीवी और सिलेबस से बाहर की बुक्स पढ़ने के लिए दें।

इसे भी पढ़ें:- जानें क्‍यों होता है बच्‍चों को तनाव

बच्चे में गॉड गिफ्ट को पहचानें

हर बच्चे में कोई न कोई अलग बात जरूर होती है, जिसे हम गॉड गिफ्ट कहते हैं। कई बार ये गॉड गिफ्ट बच्चों में शुरू से ही नजर आने लगता है और कई बार थोड़ा वक्त गुजरने के बाद नजर आता है। लेकिन जोर, जबरदस्ती और अनावश्यक दबाव से कई बार ये गॉड गिफ्ट सामने नहीं आ पाता है। इसलिए बच्चों के साथ थोड़ा नर्मी बरतें और उन्हें अपना गॉड गिफ्ट पहचानने में मदद करें। कई बार टोकने से अच्छा है कि आप बच्चों के कामों को ध्यान से देखें और एनलाइज़ करें। इससे आपको अपने बच्चे और उसके गॉड गिफ्ट को समझने में मदद मिलेगी।

बच्चों को हर बात पर न टोकें

आजकल की जनरेशन को हर बात पर टोका जाना अच्छा नहीं लगता है। इसलिए बच्चों को थोड़ी-थोड़ी सी बात पर टोकें और डाटें नहीं, इससे बच्चे झूठ बोलने लगते हैं। जब बच्चे छोटे हों, तभी उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को पूरी करने की आदत डालें, जिससे थोड़ा बड़ा होने पर आप उनके फैसलों पर भरोसा कर सकें। अगर आपने बचपन से बच्चे को जिम्मेदार बनाया है तो बाद में उन्हें टोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

डिसिप्लिन और सजा के अंतर को समझें

हर मां-बाप चाहते हैं कि उनका बच्चा डिसिप्लिन सीखे और डिसिप्लिन में रहे। लेकिन बचपन में मन चंचल होता है इसलिए कई बार नियमों को तोड़ने में एक अलग तरह का आनंद मिलता है। ऐसे में बच्चे मन मुताबिक काम करते हैं तो कभी-कभी उनसे कुछ गलती भी हो जाती है। ऐसे समय में उन्हें सजा देने या उनको मारने-पीटने से उन पर गलत प्रभाव पड़ता है। इसी तरह कई मां-बाप डिसिप्लिन और सजा में अंतर नहीं समझते हैं, जिसकी वजह से बच्चे गुस्सा करना सीख जाते हैं और चिड़चिड़े हो जाते हैं। जैसे- टीवी देखते हुए खाना खाना गलत है लेकिन इस बात के लिए बच्चों को मारना और सजा देना उससे भी ज्यादा गलत है।

घर के कामों में बच्चों की राय लें

छोटा बच्चा हो या कोई बड़ा व्यक्ति, घर-परिवार में अहमियत मिलना सबको अच्छा लगता है। इसलिए बच्चा जब थोड़ा समझदार हो जाए, तो घर के छोटे-मोटे फैसलों में उनकी भी राय लें और अगर सही लगे तो उन पर अमल भी करें। कम से कम बच्चा ये फैसला तो कर ही सकता है कि नाश्ते और खाने में क्या बने, उसके कमरे की दीवारों का रंग कैसा हो या घर में कौन से पेट्स पालना चाहिए।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Parenting Tips In Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK