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बच्चों की परवरिश को परफेक्ट बनाती हैं पेरेंट्स की ये 4 आदतें

परवरिश के तरीके By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 30, 2018
बच्चों की परवरिश को परफेक्ट बनाती हैं पेरेंट्स की ये 4 आदतें

अगर आप चाहते हैं कि आप अपने बच्चों को बहुत अच्छी परवरिश दें और उन्हें हर तरह से सक्षम बनाएं तो आपको कई बातों का ध्यान देना पड़ता है।

अगर आप चाहते हैं कि आप अपने बच्चों को बहुत अच्छी परवरिश दें और उन्हें हर तरह से सक्षम बनाएं तो आपको कई बातों का ध्यान देना पड़ता है। अक्सर लोग आॅफिस की भागदौड़, सामाजिक सोच और अपनी पर्सनल लाइफ के चलते बच्चों पर ध्यान देना बंद कर देते हैं। जिसके चलते बच्चों की परवरिश में कमी आ जाती है, जिसका खामियाजा हमें और हमारे बच्चों को उनके किशोर होने पर भुगतना पड़ता है। पेरेंट्स को इस चीज पर अमल करने की जरूरत है कि हम अपनी जिंदगी को दो पहलुओं से जीते हैं। एक सामाजिक और दूसरा व्यक्तिगत जीवन। आपका वर्तमान कुछ इन्हीं दोनों पहलुओं के बीच उलझकर रह गया है।

जब आप अपने व्यक्तिगत पहलू के नजरिए से सोचते हैं, तो आपको लगता है कि आपका बच्चा बहुत सही है। लेकिन जब आप सामाजिक पहलू से सोचते हैं तो आप अपने बच्चे और अन्य बच्चों के बीच में तुलना करने लगते हैं। जो कभी नहीं करनी चाहिए। आजकल की सामाजिक परिस्थिति और होम-सिक्योरिटी को देखते हुए धीरे-धीरे कम्युनिटी लिविंग का चलन बढ़ता जा रहा है। चूंकि इसमें हम बहुत सारी चीजें मिल बांटकर कर लेते हैं। आज हम आपको बच्चों को एक अच्छा वातावरण देने के बारे में कुछ बातें बता रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है वों—

अनुशासन को प्राथमिकता दें

कोशिश करें कि आप अपने बच्चों को घर पर ही अनुशासन की शिक्षा दें। अपने बच्चों को विवाद की स्थिति में अहिंसक तरीकों से निपटने के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही उसे खेलों में दिलचस्पी लेने के लिए प्रोत्साहित करें। परिवार में मां बाप को या घर के सभी बड़ों को अपने बच्चों के सामने भूल कर भी कोई ऐसी हरकत या बात नहीं करनी चाहिए, जिससे उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़े। बच्चों को अधिक से अधिक समय देने की कोशिश करें।

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बच्चों को दे सकारात्मक सोच

उन्हें सकारात्मक सोच की किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन पर निगरानी रखें कि टीवी या वीडियो गेम्स में कहीं कुछ उत्तेजित कर देने वाले नाटक आदि न देखें। साथ ही सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमेशा उनसे यह जानने की कोशिश करें कि उनके मन में क्या चल रहा है या वे स्कूल में क्या करते हैं? कहीं किसी से झगड़ा आदि तो नहीं करते? कोशिश करिए कि आप के बच्चों में किसी कारण उत्तेजना न पैदा हो सके। उनका गुस्सा किसी न किसी तरह शांत हो जाए और समय-समय पर उन्हें उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते रहें।

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