योग का समूह है पद्म साधना, रोजाना करने से नहीं होती अस्‍थमा और कैंसर जैसी बीमारियां

Updated at: Dec 18, 2018
योग का समूह है पद्म साधना, रोजाना करने से नहीं होती अस्‍थमा और कैंसर जैसी बीमारियां

पद्म साधना एक ऐसा प्रथा है जो इस तरह के खिलने को संभव बना सकती है। श्री श्री रवि शंकर द्वारा डिजाइन, इस खूबसूरत योग अभ्यास में योग मुद्राओं, नाड़ी शोधन श्वास तकनीक (प्राणायाम), और ध्यान का एक सरल अनुक्रम शामिल है

Atul Modi
योगाWritten by: Atul ModiPublished at: Dec 17, 2018

आम तौर पर जब कोई कमल के बारे में सोचता है, तो दिमाग में क्या आता है? एक पूरी तरह से खिलने वाला फूल, जहां प्रत्येक पंखुड़ी आसमान तक खुलती है। अब देखें कि कमल कहां से निकलता है? मिट्टी। फिर भी, कमल तालाब से अस्थिर और छूटा रहता है। कल्पना कीजिए कि क्या हम कमल के फूल की तरह हो सकते हैं- दिन-प्रतिदिन की घटनाओं और प्यार और खुशी के साथ खिलने से छेड़छाड़ की जाती है। पद्म साधना एक ऐसा प्रथा है जो इस तरह के खिलने को संभव बना सकती है। श्री श्री रवि शंकर द्वारा डिजाइन, इस खूबसूरत योग अभ्यास में योग मुद्राओं, नाड़ी शोधन श्वास तकनीक (प्राणायाम), और ध्यान का एक सरल अनुक्रम शामिल है।

पद्म साधना करना आपको अपनी आंतरिक शक्ति तक पहुंच प्रदान करता है। रोज़ाना अभ्यास करते समय, योग के इस 45 मिनट के अनुक्रम में एक शांत मन, स्वस्थ शरीर और अधिक शांति मिलती है। योग आसन (मुद्रा) का यह सेट शरीर और दिमाग को गहन ध्यान के लिए तैयार करने में मदद करता है। इस अभ्‍यास को करते समय पूरी तरह रिलैक्‍स रहें। पद्म साधना करना आपके अनुभव को बढ़ाता है, ताकि आप पूरे दिन ऊपर उठकर रह सकें, जो आपके आस-पास की मिट्टी से छूटे रहें। 'पद्म' का अर्थ कमल और 'साधना' आपका प्रयास है। इसलिए इस अभ्यास को कमल के रूप में सहज होकर किया जाता है। इसके अंतर्गत कुल 14 आसन हैं जिन्‍हें एक के बाद एक करना है। सभी योगासन कम से कम 60 सेकेंड जरूर करें। 

बॉडी रोटेशन

इस योग की शुरूआत सबसे पहले बॉडी रोटेशन से किया जाता है। इसमें आप पहले सुखासन में बैठ जाएं और कमर पर हाथ रखकर पूरी बॉडी को रोटेट करें। 

अर्ध शलभासन 

सर्वप्रथम पेट के बल लेट जाएंगे। पैरो को पास रखेंगे और हाथों की मुत्ठियाँ बनाकर जांघ के नीचे रखेंगे। अब दायें पैर को सांस लेते हुए उपर उठाइए। धीरे से वापिस लाइए। इसी तरह बायें पैर से कीजिए।

शलभासन 

इसे करने के लिए पेट के बल लेटकर सबसे पहले ठोड़ी को जमीन पर टिकाएं। फिर दोनों हाथों को जंघाओं के नीचे दबाएं। तब श्वांस अन्दर लेकर दोनों पैरों को एक-दूसरे से सटाते हुए समानांतर क्रम में ऊपर की तरफ उठाएं। पैरों को और ऊपर उठाने के लिए हाथों की हथेलियों से जंघाओं को दबाएं। फिर सामान्‍य स्थिति में आने के लिए धीरे-धीर पैरों को जमीन पर ले आएं। फिर हाथों को जंघाओं के नीचे से निकालते हुए मकरासन की स्थिति में लेट जाएं।

भुजंगासन 

भुजंगासन करने के लिए दोनों हाथों को बगल में रखें, पेट के बल लेटे हों। अपने सिर को ऊपर की तरफ धीरे-धीरे उठायें, घुटने जमीन पर हों, इस स्थिति में कुछ देर रुकें। अब घुटनों को और ऊपर की तरफ उठाइये और सांस लीजिए। फिर सामान्‍य स्थिति में वापिस आयें।

विपरीत शलभासन 

अपने पेट के बल लेट जाएं, अपनी एड़ियों को जमीन पर सीधा रखें, ठोड़ी को जमीन पर विश्राम दें। अपने पैरों को एक दूसरे के पास लाएं और पंजों को आपस में एक साथ रखें। अब, अपने हाथों को सामने की ओर जितना हो सकता है, बाहर की ओर खींचे। एक गहरी साँस लें और अपनी छाती, हाथों, पैरों व जांघों को जमीन से ऊपर उठाएं। आप बिलकुल उड़ते हुए सुपर हीरो की तरह लग रहे हैं। अपने चेहरे पर मुस्कान लाएं। उड़ते समय अपने हाथों और पैरों को ज्यादा ऊपर उठाने के प्रयास के स्थान पर उन्हें विपरीत दिशा में खींचने का आसान प्रयत्न करें। 

धनुरासन 

एक अन्‍य योग वसा को जलाने के लिए बहुत ही प्रभावी होता है। इसे करने के लिए फर्श पर उल्टा लेट जाओ। फिर अपने दोनों पैरों को मोड़कर हाथ से पकड़ें और उन्‍हें नितम्‍बों तक लाने की कोशिश करें। नीचे व ऊपर से खुद को स्ट्रेच करें। अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर 5 सेकंड के लिए इस मुद्रा में रुकें। 

नौकासन 

सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं। अपने हाथ जांघ के बगल और शरीर को एक सीध में रखें। फिर अपने शरीर को ढीला छोड़े और सांस पर ध्यान दें। अब आप सांस लेते हुए अपने सिर, पैर, और पूरे शरीर को 30 डिग्री पर उठायें। ध्यान रहे आपके हाथ ठीक आपके जांघ के ऊपर हों। धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ें, इस अवस्था को अपने हिसाब से बनाये रखें। जब अपने शरीर को नीचे लाना हो तो लंबी गहरी सांस छोड़ते हुए सतह की ओर आयें।

अर्ध पवनमुक्‍तासन 

स्वस्थ रहने और फिट रहने के लिए अर्ध पवनमुक्तासन बहुत अच्छा आसन है। इसे करने के लिए सीधा पीठ के बल लेट जाएं। दाएं पैर को मोड़कर छाती के पास ले जाएं और उपर के हिस्से को उठाएं। अब हाथों से घुटनों के नीचे के हिस्से को टाइट पकड़ लें। अब अपनी नाक से घुटनों को छूने की कोशिश करें। कुछ देर इसी अवस्था में रहें। जिन लोगों को मोटे पेट की समस्या होती है उन्हें अर्ध पवनमुक्तासन नियमित करना चाहिए।

पवनमुक्‍तासन 

इसे करने के लिए पीठ के बल ले जायें, दोनों हाथों को कमर के पास ले जायें, फिर पैर को मोड़ लीजिए। अब हाथ से पैर को पकड़कर सिर को उठाते हुए हाथ को सिर के पास ले जाइये। कुछ समय के लिए इसी स्थिति में रहें, फिर सामान्‍य स्थिति में जायें। सर्वाइकल के रोगी सिर को नहीं छुयेंगे।

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सर्वांगसन 

स्वच्छ शुद्ध वातावरण में आसन बिछाकर, करवट लेते हुए पीठ के बल लेट जाएं और कुछ देर लेटकर मन को शांत करें। बाजुओं को कमर के पास सीधा रखते हुए हथेलियों को जमीन पर टिका दें। पैर को आपस में मिलाकर और टांगों को सीधा रखकर सांस भरते हुए टांगों को ऊपर की तरफ लाएं और कोहनियों को जमीन पर अच्छी तरह से टिकाने के बाद दोनों हाथों से पीठ को सहारा दें। तत्पश्चात कमर व टांगों को इस प्रकार सीधा करें कि पैर आकाश की तरफ हो जाएं। सीने को ठुड्डी के साथ लगाने का प्रयास करें। शरीर को स्थिर व ध्यान को एकाग्रकर अपनी क्षमतानुसार रुकें। 

नटराजासन 

सीधे खड़े होकर दाएं पैर को पीछे की तरफ इस तरह मोडें कि आपका दाएं पैर का पंजा आपके नितंब को छुएं। इसके बाद आपको दाएं हाथ को पीछे ले जाना है और दाएं पैर के पंजे को पकड़ लें। अब आपको दाएं पैर को पंजे से पकड़ कर ऊपर की और ऐसे ले जाना है कि आपके पूरे शरीर का भार बाएं पैर पर आ जाएं। इसके बाद आपको सिर को सीधा रखना है और बाएं हाथ को हवा में लहराते हुए बाएं तरफ ले जाना है।

इस स्थिति में आप बाएं पैर पर बैलेंस बनाकर रखें और एक पैर पर सीधे खड़ हो। आपकी यह स्थिति ही नटराजन आसन है। आप जोर-जोर से सांस ना लेकर सामान्य स्थिति में सांस लें। कुछ देर इस पॉजीशन में खड़े रहकर इसी प्रक्रिया को दूसरे पैर से करें। इस प्रक्रिया को आप दोनों पैरों से कुछ-कुछ समय बाद बदलकर करें। 

अर्ध मत्‍सयेंद्रासन 

एक और आसान आसन, अर्ध मत्सयेंद्रासन जिसे रीढ़ की हड्डी को आधा मोड़ कर बैठना भी कहा जाता है, आपकी रीढ़ की हड्डी के लिए एक राहत है। यह पाचन में सुधार कर और एक स्वस्थ जीवन शैली को सुनिश्चित कर आंतरिक रूप से आपके कूल्हे और रीढ़ की हड्डी के क्षेत्र को मज़बूत करता है।

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पर्वतासन 

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आपको पद्मासन में बैठना होगा। इसके आपको चौकड़ी मारते हुए पैरों को आपस में ऐसे बांधना हैं कि आप आराम से अपने हाथों के सहारे शरीर को हवा में झुला सकें। इसके बाद धीरे-धीरे सांस भरे और कुछ देर सांस को रोक कर रखें। इसके बाद आपको दोनों हाथों को ऊपर की ओर ले जाना हैं और जब तक संभव हो सांस रोक कर रखें। हाथ जब ऊपर ले जाएंगे तो दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में इंटरलॉक कर दें।

कुछ समय बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं इसके लिए आप धीरे-धीरे सांस छोड़े और हाथों को नीचे घुटनों तक लाएं। इस आसन को करने के दौरान आपको कमर को सीधा रखना है और शरीर को तानकर रखें। इस आसन के दौरान आपके कंधे, हाथ और कमर एकदम सीधे होंगे। यानी मांसपेशियों में खिंचाव बरककरार रहेगा।

योग मुद्रा 

वज्रासन में बैठें। शरीर सीधा और हाथ जांघों पर है। पूरे शरीर को तनावहीन रखें। पूरक करते हुए बाजुओं को सिर के ऊपर से फैलायें, फिर उनको पीठ के पीछे लायें और बाईं कलाई को दायें हाथ से पकड़ें। रेचक करते हुए शरीर को कूल्हों से आगे झुकायें, पीठ को सीधा रखते हुए,जब तक कि मस्तक फर्श को न छू ले। नितम्ब एडियों पर रहेंगे। सामान्य श्वास के साथ पूर्ण शरीर पर ध्यान दें और तनाव रहित रहें। इस स्थिति में यथा संभव सुविधा से बने रहें। धीरे-धीरे पूरक करते हुए शरीर को सीधा करें। इसी समय बाजुओं को सिर के ऊपर खींचें। रेचक करते हुए प्रारम्भिक स्थिति में लौट आयें।

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