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आउट डोर गेम्‍स बनाए बच्‍चों की आंखें तेज

लेटेस्ट By एजेंसी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 03, 2013
आउट डोर गेम्‍स बनाए बच्‍चों की आंखें तेज

आउट डोर गेम्‍स बनाए बच्‍चों की आंखें तेज : जानिए कैसे, आउट डोर गेम्‍स खेलने से बच्‍चों की सेहत के साथ-साथ आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

outdoor games banaye baccho ki aakhye tejअगर आप चाहते हैं कि आपके बच्‍चों की आंखें अच्‍छी रहें, तो उन्‍हें घर के बाहर खेलने से न रोकें। आउट डोर गेम्‍स से उनकी सेहत तो बनी ही रहती है, साथ ही उनकी आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

घर के बाहर खेलने वाले बच्‍चों को निकट दृष्टि दोष (जिसमें दूर की चीजें साफ नजर नहीं आती) होने की आशंका उन बच्‍चों के मुकाबले कम होती है, जो इनडोर गेम्‍स को तरजीह देते हैं।

ब्रिटिश अखबार डेली मेल की खबर के अनुसार हाल ही में हुए दो शोध इस बात की पुष्टि करते हैं। इन शोधों के नतीजे बताते हैं कि दिन की रोशनी इस बीमारी के संभावित खतरों से बचाने में महती भूमिका निभाती है।

हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि तेज नजर का दिन की रोशनी से क्‍या संबंध है, लेकिन कुछ जानकारों का मानना है कि मस्तिष्‍क के केमिकल डोपामाइन की इसमें महत्‍वपूर्ण भूमिका है। यह बात तो पहले ही साफ हो चुकी है कि अधिक मात्रा में डोपामाइन का आंखों की पुतली में होना, निकट दृष्टि दोष का खतरा कम करता है।

निकट दृष्टि दोष अथवा मायोपिया, में व्‍यक्ति को नजदीक की चीजें तो साफ नजर आती हैं, लेकिन दूर की वस्‍तुएं देखने में उसे तकलीफ होती है। बचपन में इस दोष को सुधारा जा सकता है, लेकिन व्‍यस्‍क होने पर यह आंखों के बड़े विकार के रूप में सामने आ सकता है। इस परेशानी के चलते ग्‍लूकोमा और रेटिना में गड़बड़ी हो सकती है, जिसकी वजह से आंखों की रोशनी जाने का खतरा भी बना रहता है।

निकट दृष्टि दोष पर हुए शोध के नतीजे परेशान करने वाले हैं। इनमें बताया गया है कि एशिया और अन्‍य क्षेत्रों में यह बीमारी महामारी का रूप धारण कर सकती है। वि‍कसित देशों में इसका प्रकोप और अधिक होने की चिंता भी इस रिपोर्ट में जताई गई है।

अमेरिका में इस बीमारी के खतरे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका में सन् 1970 से लेकर अभी तक इससे ग्रस्‍त लोगों की संख्‍या में 65 फीसदी का इजाफा हो चुका है।

हालां‍कि अभी तक इस बीमारी को अनुवांशिक गुणों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन इस नयी रिसर्च में यह बात सामने आई है कि वातावरण भी इसमें महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इससे यह समझने में भी मदद मिलेगी कि आखिर क्‍यों यह रोग इतनी तेजी से फैलता जा रहा है।

ताइवान में हुई पहली स्‍टडी में 333 बच्‍चों का परीक्षण किया गया। ये बच्‍चे पढ़ाई के बीच मिलने वाले ब्रेक के समय मैदान में रहे। ये बच्‍चे, जिनमें से अधिकतर पहले अपना भोजनावकाश का वक्‍त क्‍लास में ही बिताते थे, अब रोजाना लगभग 80 मिनट का वक्‍त बाहर गुजारने लगे।

एक नजदीकी स्‍कूल ने कंट्रोल ग्रुप के तौर पर काम किया। वहां बच्‍चों को ब्रेक के दौरान बाहर वक्‍त गुजारने की इजाजत नहीं थी।

दोनों स्‍कूल के बच्‍चों की आंखों की जांच शुरू की गयी और एक साल बाद इसके परिणाम में पाया गया कि वह स्‍कूल जहां बच्‍चों को ब्रेक के दौरान बाहर जाने की इजाजत थी उस स्‍कूल के कम बच्‍चों को निकट दृष्टि दोष होने के संकेत पाए गए, बनिस्‍पत उस स्‍कूल के जहां बच्‍चों के बाहर जाने पर पाबंदी थी।

इस रिसर्च के बाद इस बात की सिफारिश की गई कि बच्‍चों को नियमित अंतराल पर ब्रेक मिलता रहे। इसके साथ ही अन्‍य आउटडोर कार्यक्रमों में भी इजाफा किया जाए। यह बच्‍चों की आंखों के लिए भी अच्‍छा होगा।

चांग चुंग मेमोरियल हॉस्पिटल, कायोहसियुंग (ताइवान), के डॉक्‍टर और इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता, पी-चांग वू का कहना है, ' क्‍योंकि बच्‍चे स्‍कूल में बहुत अधिक वक्‍त बिताते हैं। स्‍कूल की ओर से उठाए गए कदम मायोपिया से लड़ने का सीधा और व्‍यावहारिक उपाय हो सकते हैं।'  

एक अन्‍य स्‍टडी में भी सूर्य के प्रकाश का आंखों की रोशनी पर सीधा असर पड़ने की बात सामने आई है। 2005 में एकत्रित किए गए डाटा में डेनमार्क के स्‍कूलों के 235 ऐसे बच्‍चों को शामिल किया गया, जिन्‍हें निकट दृष्टि दोष था।

प्रतिभागियों को सात भागों में बांटा गया था। इनमें से हर हिस्‍सा कोई साल के अलग भाग का प्रतिनिधित्‍व कर रहा था। डे‍नमार्क में हर मौसम में सूर्य की रोशनी में नाटकीय बदलाव आते हैं। सर्दियों में दिन में सात घंटे और गर्मियों में 18 घंटे तक सूर्य का प्रकाश रहता है। इस हिसाब से हर ग्रुप को अलग अनुपात में सूर्य का प्रकाश प्राप्‍त हुआ। इसके बाद हर सीजन की समाप्ति पर बच्‍चों की आंखों की जांच की गई।

इसके बाद जो नतीजे सामने आए उनमें आंखों की रोशनी के लिए सूर्य का प्रकाश काफी महत्‍वपूर्ण होता है। चीन स्थित येत-सेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डोंगमि क्‍यू ने कहा, 'हमारे नतीजे बताते हैं कि दिन की रोशनी में अधिक वक्‍त बिताने से बच्‍चों को मायोपिया से बचाने में मदद मिलती है। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्‍चों को बाहर खेलने क लिए प्रोत्‍साहित करें।'

जब खराब मौसम या अन्‍य किसी के कारण ऐसा संभव न हो, तो ऐसी व्‍यवस्‍था होनी चाहिए कि बच्‍चे घर के भीतर रहकर भी सूर्य के प्रकाश का लाभ उठा सकें।

ये दोनो स्‍टडी अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्‍थाम्‍लोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित हुई हैं।



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