Osteoarthritis Diet Plan: ऑस्टियोअर्थराइटिस के मरीजों को क्या खाना चाहिए? एक्सपर्ट से जानें पूरा डाइट प्लान

Updated at: Nov 30, 2020
Osteoarthritis Diet Plan: ऑस्टियोअर्थराइटिस के मरीजों को क्या खाना चाहिए?  एक्सपर्ट से जानें पूरा डाइट प्लान

 गठिया के रोगियों को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसे लेकर हमने एक्सपर्ट से बात की और आर्थराइटिस डाइट प्लान को जाना।

Pallavi Kumari
स्वस्थ आहारWritten by: Pallavi KumariPublished at: Nov 30, 2020

सर्दियों में हड्डियों से जुड़ी बीमारियों के लक्षण अक्सर बढ़ जाते हैं।ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis), आर्थराइटिस (Arthritis) यानी कि गठिया का ही एक प्रकार है, जिसमें जोड़ों में दर्द और सूजन से जुड़ी परेशानियां होती हैं। सर्दियों में पुराने गठिया के दर्द से बचना बेहद जरूरी है। इसके लिए दवा और परहेज के साथ आपको अपनी डाइट में उन चीजों को शामिल करना चाहिए, जो कि पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों (osteoarthritis symptoms in hindi) को कम करने में मदद करे। इसी बारे में जानने के लिए हमने डॉ. अरुण पाण्डेय (Dr.Arun Pandey) से बात की, जो कि एक ऑरथोपेडिक (हड्डी रोग विशेषज्ञ) डॉक्टर हैं।

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आर्थराइटिस डाइट चार्ट (Diet Chart For osteoarthritis Patient)

डॉ. अरुण पाण्डेय बताते हैं कि आर्थराइटिस डाइट चार्ट को जानने और फॉलो करने से पहले जरूरी ये है कि हम ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis)के प्रकारों को समझें और उसके लक्षणों के अनुसार ही अपनी डाइट को सही रखें।  डॉ. अरुण बताते हैं अर्थराइटिस आमतौर पर दो प्रकार के होते हैं, पहला ऑस्टियोआर्थराइटिस और दूसरा रहूमटॉइड अर्थराइटिस  (rheumatoid arthritis)। अब ऑस्टियोआर्थराइटिस को हम चार तरीके से बांट कर उसके डाइट प्लान को समझ सकते हैं।

1. चोट लगना और हड्डियों का टूट जाना (Trauma)

कई बार ऑस्टियोआर्थराइटिस की शुरुआत  चोट लगने और हड्डियों का टूटने से होती है। इसमें अगर हड्डी टूट जाती है और इलाज सही से नहीं हो पाता है, तो ये हड्डियों का पुराना दर्द बन कर रह जाता है। ऐसे में सबसे जरूरी चीज ये ध्यान में रखें कि चोट लगने के बाद कभी भी घरेलु नुस्खों का इस्तेमाल न करें। टूटी हुई हड्डी पर कभी भी मसाज न करें क्योंकि ये आपके लिए बड़ी मुश्किल का कारण बन सकती है। बात अगर खान पान की करें, तो चोट के इलाज के साथ आपको अपनी डाइट में इन चीजों को शामिल करना चाहिए।

A.कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ

डॉ. अरुण बताते हैं कि कैल्शियम हड्डियों के जुड़ने के प्रोसेस में तेजी ला सकते हैं। यानी कि किसी भी हड्डी के चोट के इलाज के दौरान अगर आप कैल्शिम से भरपूर खाद्य पदार्थों को खाएं, तो ये आपके हड्डियों को जुड़ने में आसानी से मदद करेगा। दूध, दही, और पनीर कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर होते हैं। इन पोषक तत्वों से हड्डियों की शक्ति बढ़ती है, जिससे दर्दनाक लक्षण ठीक हो सकते हैं। साथ ही इन डेयरी प्रोडक्ट्स में प्रोटीन भी होता है जो, मांसपेशियों के निर्माण में मदद कर सकता है। इसलिए कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थों को खाएं।

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B.विटामिन d3 (Vitamin d3) 

विटामिन डी3 कैल्शियम के डिप्रोजिशन में मदद करते हैं। विटामिन डी3 को पाने का सबसे अच्छा और आसान सोर्स है धूप। इसके लिए सुबह 10 बजे से पहले वाली धूप में जाकर बैठें।  विटामिन डी3  के बारे में एक खास बात ये भी है कि ये नेचुरल सनलाइट से ही मिलती है। अगर आप घर के अंदर आती हुई धूप में बैठते हैं और सोचते हैं कि ये आपके हड्डियों को मजबूत बनाएगी, तो ऐसा नहीं होगा। इसलिए घर के बाहर थोड़े देर आराम से धूप लें।

C.विटामिन सी  (Vitamin C)

विटामिन सी मांसपेशियों की हीलिंग में मदद करता है। इसलिए जब भी किसी को हड्डियों से जुड़ी परेशानियां रहती हैं, तो उसे विटामिन सी लेने को कहा जाता है। इसलिए अपने खान-पान में विटामिन सी से जुड़े खाद्य पदार्थों को जरूर शामिल करें। जैसे कि खट्टे फल और पालक और फूल गोभी जैसी सब्जियां।

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2. हड्डियों से जुड़ी कोई बीमारी का होना (Infection)

इंफेक्शन में बोन में टीबी  (TB) होनी की शिकायत होती है। इसमें व्यक्ति को इलाज की जरूरत होती है। इसके इलाज के दौरान व्यक्ति को अपनी डाइट में कुछ चीजों को शामिल करना चाहिए। जैसे कि

  • - इंफेक्शन में हाई प्रोटीन डाइट लें।
  • -अंडे का सफेद पार्ट खाएं।
  • -मौसमी सब्जी और फल खाएं।
  • -चना और गुड़ खाएं।
  • -लाल मांस लेने से परहेज करें।

3.ट्यूमर (Tumor)

ट्यूमर में व्यक्ति की बोन ड्रिस्ट्रक्शन होने लगता है। इसमें बोन कैंसर भी हो सकता है। बोन ड्रिस्ट्रक्शन में  हड्डियों, ज्वाइंट्स और घुटने के परतों के बीच सूजन आ जाता है। इस दौरान इस सूजन को कम करने के लिए आपको

  • -एक संतुलित, पौष्टिक आहार लेना चाहिए जो कि एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर हो।
  • -विटामिन ए, सी और ई सहित पर्याप्त एंटीऑक्सीडेंट खाद्य पदार्थों को खाने में जोड़ें और जोड़ों का अधिक नुकसान होने से बचाएं।
  • -रफेज और हाई फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को खाएं।
  • -कब्ज की परेशानी से बचें
  • -विटामिन बी कॉम्प्लेक्स खाएं।
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4. गठिया के अन्य प्रकारों में (Others)

गठिया के अन्य प्रकारों की बात करें, तो इसमें बच्चों को जुवेनाइल आर्थराइटिस (juvenile arthritis) होता है। ये बच्चों में अनुवांशिक कारणों से होता है। इसके अलावा अडल्ट स्पोंडलाइटिस  (Ankylosing Spondylitis) जवान लोगों का गठिया है, जो कि ज्यादातर 45 से उम्र के लोगों में होता है और इसमें व्यक्ति से छोटे और बड़े जोड़ों में दर्द होता है। इसके अलावा  रहूमटॉइड आर्थराइटिस और गाउट से जुड़ी परेशानियों में भी तेज जोड़ो का दर्द होता है और इसके कई कारण होते हैं। इन सभी में लोगों को

  • -गठिया की दवाई के साथ कैल्शियम युक्च भोजन और विटामिन d3 लेना चाहिए।
  • -लिवर को स्वस्थ रखें और तेल-मसालों वाली चीजों को न खाएं।
  • -फली वाली चीजों को खाने से बचें।
  • -गाउट वाले गठिया के प्रकार में हाई प्रोटीन डाइट न लें क्योंकि ये यूरिक एसिड को बढ़ा देता है।

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गठिया में डाइट से जुड़ी इन बातों का भी रखें ध्यान  (foods and beverages to avoid for arthritis)

कोलेस्ट्रॉल कम रखें

पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस वाले लोगों में उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल होने की संभावना होती है और कोलेस्ट्रॉल कम करने से इस बीमारी के लक्षणों में सुधार हो सकता है। इसके लिए खाने में तेल और घी मात्रा को सही रखें और हेल्दी फैट्स लें।

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वजन संतुलित रखें

अधिक वजन होने से जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और शरीर में अतिरिक्त वसा का होना सूजन पैदा कर सकता है। वजन को संतुलित रख कर ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण कम कर सकते हैं। हालांकि ऑस्टियोआर्थराइटिस  गतिशीलता को कम कर देती है पर फिर भी हल्दी एक्सरसाइज करते रहें। 

इन तमाम चीजों के अलावा शुगर, सैच्युरेडेट फैट और प्रोसेस्ड फूड्स को खाने से बचें। ये वजन बढ़ाते हैं, कैल्शियम को घटाते हैं। साथ ही अनहेल्दी फैट को बढ़ाकर  कोलेस्ट्रॉल को भी बढ़ाते हैं। इसलिए इन तमाम चीजों को लेने से बचें। एक जरूरी चीज का और ध्यान रखें कि अल्कोहल और स्मोकिंग करने से बचें। ये दोनों ही आपकी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदेह हैं। तो, सर्दियों में इन तमाम बातों का ध्यान रखते हुए अपने हड्डियों को स्वस्थ बनाएं और गठिया के तमाम प्रकारों और उनके लक्षणों में कमी लाने की कोशिश करें।

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