Organ Donation Day 2020: अंग दान करने से रोक सकती हैं आपको ये भ्रामक बातें, जानें तथ्य और तब करें ये नेक काम

Updated at: Aug 12, 2020
Organ Donation Day 2020: अंग दान करने से रोक सकती हैं आपको ये भ्रामक बातें, जानें तथ्य और तब करें ये नेक काम

Organ Donation Day 2020 हर साल ऑर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है, ताकि एक जिंदगी, दूसरी जिंदगी को बचा सके।

Pallavi Kumari
विविधWritten by: Pallavi KumariPublished at: Aug 12, 2020

विश्व अंग दान दिवस 2020 (Organ Donation Day 2020) हर साल 13 अगस्त को मनाया जाता है। ये दिवस दुनिया भर में अंग दान (organ donation) को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। माना जाता है कि एक शख्स द्वारा किए गए अंगदान से 50 जरूरतमंद लोगों की मदद हो सकती है। दरअसल अंगदान एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें एक इंसान अपने स्वस्थ अंगों और टिशूज को दान देता है और भविष्य में इन अंगों को किसी दूसरे जरूरतमंद शख्स में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। पर बहुत से लोगों को इसके बारे में सटीक जानकारी नहीं रहती है और वे कुछ भ्रामक कारणों से इस काम को करने से डरते हैं। तो आइए आज हम आपको अंगदान से जुड़े ऐसे ही कुछ भ्रामक बातों के तथ्यों से अवगत करवाएं, ताकि आप बिना चिंता के अंग दान जैसे नेक काम में अपना योगदान कर सके। उससे पहले जान लेते हैं कितने प्रकार के होते हैं अंगदान।

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कितने तरह के होते हैं अंगदान?

अंगदान यूं तो दो तरह के होते हैं। एक होता है अंगदान और दूसरा होता है टिशू का दान। अंगदान के तहत आता है किडनी, लंग्स, लिवर, हार्ट, इंटेस्टाइन, पैनक्रियाज आदि तमाम अंदरूनी अंगों का दान। टिशू दान के तहत मुख्यत: आंखों, हड्डी और स्किन का दान आता है।

  • -ज्यादातर अंगदान तब होते हैं, जब इंसान की मौत हो जाती है लेकिन कुछ अंग और टिशू इंसान के जिंदा रहते भी दान किए जा सकते हैं।
  • -जीवित लोगों द्वारा दान किया जाने वाला सबसे आम अंग है किडनी, क्योंकि दान करने वाला शख्स एक ही किडनी के साथ सामान्य जिंदगी जी सकता है। वैसे भी जो किडनी जीवित शख्स से लेकर ट्रांसप्लांट की जाती है, उसके काम करने की क्षमता उस किडनी से ज्यादा होती है, जो किसी मृत शरीर से लेकर लगाई जाती है। वहीं लंग्स और लिवर के भी कुछ हिस्सों को जीवित शख्स दान कर सकता है।
  • -इसके अलावा आंखों समेत बाकी तमाम अंगों को मौत के बाद ही दान किया जाता है।
  • -घर पर होने वाली सामान्य मौत के मामले में सिर्फ आंखें दान की जा सकती हैं। बाकी कोई अंग नहीं ले सकते। बाकी कोई भी अंग तब लिया जा सकता है, जब इंसान की ब्रेन डेथ होती है और उसे वेंटिलेटर या लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर ले लिया जाता है।

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अंगदान से जुड़े 5 भ्रामक तथ्य (Myths Confuse About Organ Donation)

मिथक 1: कोई भी अंग दान कर सकता है

तथ्य: कुछ  चिकित्सकीय स्थितियां अपने आप ही किसी अंग को दान करने से अयोग्य हो जाती हैं। अंग का उपयोग करने का निर्णय सख्त चिकित्सा मानदंडों पर आधारित है। यह पता चला है कि कुछ अंग प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त नहीं हैं, को उन्हें नहीं लिया जाता है। मृत्यु के समय, केवल चिकित्सा पेशेवर यह निर्धारित कर सकते हैं कि प्रत्यारोपण के लिए एक संभावना के अंग उपयुक्त हैं या नहीं। कुछ रोग कैंसर, एचआईवी या किसी संक्रमण से पीड़ित होते हैं। ऐसे में इन अंगों का दान नहीं लिया जाता है। 

मिथक 2: अंग और टिशूज का दान शरीर को खराब कर देता है

तथ्य: दान किए गए अंगों को ऑपरेशन से निकाल दिया जाता है, जो शरीर को विघटित नहीं करता है। अंग दान करने वाले का शरीर दाह संस्कार के लिए वैसे ही तैयार रहता है, जैसा था उसमें दान के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। नेत्रदान के बाद, एक कृत्रिम आंख डाली जाती है, पलकें बंद हो जाती हैं, और कोई भी अंतर नहीं देख सकता है। बोन डोनेशन के बाद, एक रॉड डाली जाती है जहां हड्डी को हटा दिया गया है। त्वचा के दान के साथ, एक सनबर्न छील के समान त्वचा की एक बहुत पतली परत दान देने वाले की पीठ से ली जाती है।

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मिथक 3: डोनर के परिवार पर अंगों को दान करने का आरोप लगाया जाता है

तथ्य: किसी दानदाता के परिवार पर अंगों के दान के लिए कभी शुल्क नहीं लिया जाता है। अगर कोई परिवार मानता है कि उसे गलत तरीके से बिल किया गया है, तो उसे तुरंत स्थानीय अंग खरीदने वाले संगठन से संपर्क करना चाहिए और मामलों की चांज करनी चाहिए।

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मिथक 4: 18 साल से कम उम्र के लोग इस फैसले को लेने के लिए छोटे हैं 

तथ्य: यह कानूनी तौर पर गलत है, लेकिन आपके माता-पिता इस निर्णय को कर सकते हैं। आप अपने माता-पिता को दान करने की इच्छा व्यक्त कर सकते हैं, और आपके माता-पिता यह जानकर अपनी सहमति दे सकते हैं कि आप ये कर सकते हैं या नहीं। बच्चों को भी अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। ऐसे में उन्हें आमतौर पर उन अंगों की आवश्यकता होती है जो एक वयस्क प्रदान कर सकता है। वहीं मृत्यु के समय, केवल डॉक्टर ही यह तय कर सकते हैं कि अंग प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।

मिथक 5: केवल हृदय, लिवर और गुर्दे का दान किया जा सकता है

तथ्य: अन्य अंगों जैसे पेनक्रियाज, फेफड़े, छोटी और बड़ी आंत, और पेट को भी प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इसके अलावा, त्वचा, हड्डी, हृदय वाल्व और टेंडन जैसे ऊतकों को भी दान किया जा सकता है।

हालांकि सामान्य मौत और ब्रेन डेथ में फर्क होता है। सामान्य मौत में इंसान के सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं, उसके दिल की धड़कन रुक जाती है, शरीर में खून का बहाव रुक जाता है। ऐसे में आंखों को छोड़कर जल्दी ही उसके सभी अंग बेकार होने लगते हैं। आंखों में ब्लड वेसल्स नहीं होतीं, इसलिए उन पर शुरुआती घंटों में फर्क नहीं पड़ता। यही वजह है कि घर पर होने वाली सामान्य मौत की हालत में सिर्फ आंखों का दान किया जा सकता है।

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