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सकारात्मक सोच से बेहतर होती है दिल की सेहत

लेटेस्ट By Bharat Malhotra , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 15, 2015
सकारात्मक सोच से बेहतर होती है दिल की सेहत

लोगों को मानसिक रूप से बेहतर अहसास करवाकर उनकी बुरी सेहत का भी सामना अच्छे तरीके से किया जा सकता है।

heart health in hindiहमें हमेशा जीवन का सकारात्मक पक्ष देखने की सलाह दी जाती है। और अब ऐसा करने की एक और बड़ी वजह भी हमारे पास है।

 

जीवन के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाने वाले लोगों का दिल और रक्त संचार आदि दोगुना बेहतर काम करता है। इतना ही नहीं सकारात्मक लोग अपना खयाल भी बेहतर तरीके से रख पाते हैं।

 

अपने नकारात्मक साथियों की अपेक्षा उनकी रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल तो बेहतर पाया ही गया साथ ही ऐसे लों शारीरिक रूप से भी ज्यादा सक्रिय होते हैं। इतना ही नहीं सकारात्मक लोगों का बॉडी मास इंडेक्स भी बेहतर होता है और साथ ही ऐसे लोगों के धूम्रपान करने की आशंका भी कम होती है।

 

यूनिवर्सिटी ऑफ लिनोइस के शोधकर्ताओं का दावा है कि लोगों को मानसिक रूप से बेहतर अहसास करवाकर उनकी बुरी सेहत का भी सामना अच्छे तरीके से किया जा सकता है।

 

उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, हाई कोलेस्ट्राल, डायबिटीज, व्यायाम न करना, अधिक वजन या मोटापा अथवा पारिवारिक इतिहास है, तो आपको हृदय रोग होने की आशंका अधिक होती है।

 

रोस्लबा हरनानडेज, जो समाज शास्त्र के प्रोफेसर हैं, ने बताया कि अगर आप पूरी तरह से आशावान बने रहते हैं, तो अपने साथियों की अपेक्षा आपको स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें होने की आशंका कम होती हैं।

 

खराब मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक-जनसांख्यिकीय चारित्रिक विशेषताओं को एडजस्ट करने के बाद भी महत्वपूर्ण बना रहता है। यह स्टडी हेल्थ बिहेवियर एंड पॉलिसी रिव्यू जर्नल में प्रकाशित हुई है। इसमें पांच हजार व्यस्क अमेरिकियों पर सकारात्मकता और हृदय स्वास्थ्य के संबंधों पर चर्चा की गई।

 

हृदय स्वास्थ्य को बुरा, मध्यम और आदर्श के स्तर पर आंका गया। स्कोरिंग के लिए ब्लड प्रेशर, बॉडी मास इंडेक्स, ब्लड शुगर, आहार, शारीरिक सक्रियता और तंबाकू के सेवन को पैमाना बनाया गया। इसके साथ ही प्रतिभागियों से उनके जीवन और शारीरिक स्वास्थ्य आदि के बारे में कई सवाल भी पूछे गए। उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अर्थराइटिस, लिवर या किडनी का कोई रोग तो नहीं है। मध्यम श्रेणी के लोगों में सेहत का स्तर 50 फीसदी था और वहीं आदर्श लोगों में यह आंकड़ा 76 प्रतिशत था।

 

सकारात्मकता और कार्डियोवस्कुलर हृदय स्वास्थ्य के संबंध सामाजिक-जनसांख्यिकीय आंकड़ों पर विचार करने के बाद और प्रगाढ़ हो गए। इसमें उम्र, नस्ल, कमाई और शैक्षिक स्तर आदि बातों पर भी ध्यान दिया गया।

 

जो लोग अधिक आशावादी थे, उनके आदर्श हृदय स्वास्थ्य हासिल करने की संभावना अधिक होती है। और साथ ही मध्यम स्वास्थ्य वाले लोगों की अपेक्षा 55 प्रतिशत अधिक सेहतमंद थे।

शोधकर्ताओं का कहना है कि आबादी के लिहाज से देखा जाए तो दिल की सेहत में मामूली सा सुधार भी कई लोगों की जान बचा सकता है।

 

Image Courtesy- Getty Images

 

Source- Daily Mail

 

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