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विटामिन डी की कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' और बड़ों में 'ऑस्टियोपोरोसिस' का खतरा, जानें कितना होना चाहिए लेवल?

विविध By धीरज सिंह राणा , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 16, 2019
विटामिन डी की कमी से बच्चों में 'रिकेट्स' और बड़ों में 'ऑस्टियोपोरोसिस' का खतरा, जानें कितना होना चाहिए लेवल?

विटामिन डी की मदद से शरीर में कैल्शियम का निर्माण होता है और कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक होता है। इसके अभाव में हड्डी कमजोर होती हैं और टूट भी सकती हैं। विटामिन डी का मुख्य कार्य हमारे शरीर में कैल्शियम क

विटामिन डी सूरज की रोशनी से मिलने वाला पोषक तत्व है। जब सूरज की रोशनी पर्याप्त मात्रा में नही मिल पाती है तो शरीर में इसकी कमी होने लगती है। इसके कमी को पूरा करने के लिए विटामिन डी की गोलियां लेने की सलाह दी जाती है। विटामिन डी की आवश्यकताएं एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग अलग होती हैं और ये जातीय समूहों पर भी निर्भर करती है। मेटाबॉलिज्म, क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि जिन लोगों में खून के प्रति मिलीलीटर 20 नैनोग्राम की मात्रा से कम विटामिन डी होती है उनके शरीर में विटामिन डी की कमी होती है।

विटामिन डी की आवश्यकता

जबकि एंडोक्राइन सोसाइटी ने खून में 30 नैनोग्राम विटामिन डी की मात्रा निर्धारित की है। रटगर्स न्यू जर्सी मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर सिल्विया क्रिस्टाकोस का कहना है कि विटामिन डी के स्तर के लिए किए गए कई अलग-अलग परीक्षणों से यह पता चला है कि वर्तमान समय में इसका स्तर पहले के स्तर से भिन्न है।
उन्होंने ये भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि विटामिन डी के ऑप्टीमल लेवल कोकेशियन, काले और एशियाई में समान है। सभी प्रयोगशालाएं अब बेहतर परीक्षणों को लागू कर रही हैं और विभिन्न प्रयोगशालाओं के परिणामों को पहले से बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। विटामिन डी का मुख्य कार्य हमारे शरीर में कैल्शियम को अवशोषित करना होता है।

विटामिन डी की कमी

विटामिन डी की कमी से स्केलेटल सिस्टम के विकास में बाध हो सकता है और साथ ही बच्चों में रिकेट्स की समस्याएं भी हो सकता है। इसके अलावा वयस्कों में विटामिन डी की कमी से हड्डियों में फ्रैक्चर और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है। रिकेट्स को रोकने के लिए कैल्शियम का सेवन पर्याप्त नहीं होता है बल्कि बेहतर परिणाम के लिए उसके साथ विटामिन डी का सेवन करना भी जरूरी होता है।

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फायदे

इन सप्लीमेंट्स को लेना बुजुर्ग लोगों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। ये प्रतिरक्षा प्रणाली, कैंसर और हृदय स्वास्थ्य कोे भी बेहतर बनाता है। लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन शरीर के लिए हानिकारक भी है, इससे हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

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सेवन का तरीका

नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिसिन के अनुसार प्रतिदिन विटामिन डी का सेवन शिशुओं के लिए 400 आईयू,  1 से 70 वर्ष के लोगों के लिए 600 आईयू और 70 से अधिक वर्ष के लोगों के लिए 800 आईयू होना चाहिए। कुछ अध्ययनों यह पता चला है कि विटामिन डी के नियमित सेवन से मृत्यु दर में कम होती है और एक्सपर्ट बताते हैं कि इसके सेवन से प्रतिरक्षा प्रणाली, कैंसर और हृदय स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है।


क्रिस्टाकोस ने कहा कि अभी भी विटामिन डी सप्लीमेंट का कुछ लाभ दिखाया जाना बाकी है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी अध्ययनों में विटामिन डी की कमी या उचित मात्रा वाले लोगों के बीच कोई भी भेदभाव नहीं किया गया है।

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