सिर्फ देसी मां-बाप ही अपने बच्चों से कहते हैं ये 7 चीजें, जानें क्या आपके भी मां-बाप भी हैं देसी

Updated at: Mar 30, 2020
सिर्फ देसी मां-बाप ही अपने बच्चों से कहते हैं ये 7 चीजें, जानें क्या आपके भी मां-बाप भी हैं देसी

अगर आप दिल्ली जैसे राज्य में किसी मध्यम वर्ग परिवार में जन्में हैं तो आपने अपने माता-पिता से ये 7 बातें जरूर सुनी होंगी। जानें कौन सी हैं ये बातें। 

 

Jitendra Gupta
परवरिश के तरीकेWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Mar 30, 2020

भारत को दुनियाभर में एक अलग ही दर्जा प्राप्त है, जिसके बारे में ज्यादातर लोग जानते ही होंगे। ऐसा ही कुछ है यहां रहने वाले माता-पिता के बारे में, जो उन्हें दुनिया के दूसरे माता-पिता से थोड़ा अलग करता है और अलग भी बनाता है। हमारे माता-पिता कैसे भी हो फिर चाहे वे सख्त, उदार, रूढ़िवादी या फिर खुले विचारों वाले  हों हम उन्हें अपनी दिल की गहराईयों से प्यार करते हैं। लेकिन कुछ चीजें हैं, जो हमारे माता-पिता को देसी बनाती है। आप चाहे देश के किसी भी कोने में क्यों न रहते हों अगर आपने ये बातें अपने माता-पिता के मुंह से सुनी हैं तो जान लीजिए कि आपके माता-पिता बिल्कुल देसी हैं। तो आइए जानते हैं क्या हैं आखिर ये 7 चीजें।

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अपना लंच बॉक्स जरूर वापस लाना 

हर कोई जानता है कि हमारी मां हमसे कितना प्यार करती है और ये प्यार हमेशा बरकरार रहता है लेकिन स्कूल के वक्त मां का प्यार कुछ ज्यादा ही होता है। खासकर जब मां बड़े प्यार से टिफिन पैक करती है। अक्सर स्कूल जाते वक्त मां को आपने ये कहते जरूर सुना होगा कि लंचबॉक्स वापस जरूर लाना। जब भी हम लंच ले जाते हैं तो हमारी मां की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि हम लंच वापस ले आएं। अगर गलती से लंचबॉक्स स्कूल में रह गया या फिर खो गया तो खैर मनाइए कि घर जाते ही पिटाई न हो। 

अभी संघर्ष करोगे तभी बाद में मजे लोगे

क्या आपने अपने माता-पिता से ये बातें सुनी हैं कि बेटा सिर्फ 12वीं तक अच्छे से पढ़ लें फिर आगे की लाइफ तेरी सेट है। अगर हां तो निश्चित रूप से आपने ये भी सुना होगा कि बेटा कॉलेज में मन लगाकर पढ़ियों फिर आगे सब ठीक हो जाएगा और उसके बाद बेटा जॉब अच्छे से करेगा तो आगे लाइफ बन जाएगी। और आप तो जानते  हैं कि आगे कभी खत्म नहीं होता...

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शर्मा या गुप्ता जी के लड़के को देखों 

हममें से किसी को ये पता नहीं होगा कि हर कॉलोनी में शर्मा जी या गुप्ता जी का लड़का कहां से आ जाता है, जिसके हमेशा हमारे से ज्यादा नंबर आते हैं। जब भी इस बात को लेकर बहस होती है तो निश्चित रूप से एक घंटे का लेक्चर कहीं नहीं गया और इस लेक्चर में हमें ये बताया जाता है कि हम उसकी तरह कैसे बनें।

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जब हम तुम्हारी उम्र में थे

जब भी हम कुछ करने में असफल हो जाते हैं  तो निश्चित रूप से ये डाायलॉग हम सभी को सुनने मिलता है कि"हम भी कभी तुम्हारी उम्र के थे और उस टाइम हम सब कर लेते थे। खैर, हर भारतीय माता-पिता ये मानते हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं है जो उनका बच्चा नहीं कर सकता है। आखिरकार, उन्होंने भी उस उम्र में खुद ऐसा ही किया था। 

एक रोटी और खा ले कितना पतला हो गया है

हॉस्टल या किसी अन्य जगह से  घर  वापस लौटने पर हमारी मा खुद अपने हाथ से खाना खिलाने तक बैठ जाती हैं या फिर हमारे सामने बैठकर ही हमें खाना खिलाती हैं। उनका पसंदीदा बहाना होता है कि मेरा राजा बाबू कितना पतला हो गया है, एक रोटी और खा ले।

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सुबह जगाने के लिए नए तरीके ढूंढना 

सुबह होते ही पंखे को बंद करना और हमारे ऊपर से कंबल, रजाई या फिर चादर को खींचना ऐसे  कुछ हथकंडे हैं, जिनका उपयोग कर भारतीय मां अपने बच्चों को जगाती हैं। बस अपनी मां को बताएं कि आपको सुबह 7 बजे उठना है और वह आपको सुबह 6 बजे ही जगा देगी और कहेगी कि सुबह के 8 बज गए है। खैर, भारतीय मां हमेशा भारतीय मां ही रहेंगी।

घर की वैल्यू 

जब भी किसी बात को लेकर बहस होती है तो हमारी मां का पसंदीदा डायलॉग होता है कि जब घर से दूर जाएगा तब घर की वैल्यू पता चलेगी। इसमें कोई दो राय नहीं है कि वास्तव में अपने घर की वैल्यू वहां से निकलने के बाद ही मालूम पड़ती है।

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