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    उम्र का तकाजा है डिप्रेशन

    मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By Anubha Tripathi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 09, 2014
    उम्र का तकाजा है डिप्रेशन

    आप जिंदगी खुशी-खुशी जीते आ रहे हैं, लेकिन अब खुशी रूठ गई है। खुश रहने के लिए आपके पास सब कुछ है, फिर भी अवसाद आपको गिरफ्त में ले चुका है। कहीं ये आपकी बढ़ती उम्र का असर तो नहीं है।

    क्‍या उम्र का संबंध आपकी खुशी से है। क्‍या एक उम्र में आकर खुशी कहीं खो जाती है। क्या वाकई उम्र ओर खुशी के बीच कोई संबंध है। जानकार तो कम से कम ऐसा ही मानते हैं। उम्र बढ़ने पर लोग वास्तविकता के करीब आ जाते हैं जिससे तनाव की समस्या हो सकती है।

    तनावग्रस्‍त व्‍यक्ति

    तनावग्रस्‍त व्‍यक्ति आपकी आधी जिंदगी खुशी-खुशी बीत चुकी है, लेकिन अब खुशी कहीं रूठ गई सी लगती है। यूं तो दुनिया का सारा साजो समान आपके पास मौजूद है। वह सामान जो कभी आपके लिए खुशियों का पर्याय हुआ करता था, लेकिन अब वह सामान भी आपको अवसाद के बादलों से बाहर नहीं निकाल पा रहा। आपको इसका कारण ढूंढे नहीं पता चल रहा है, लेकिन विशेषज्ञ इसकी वजह जान चुके हैं। उनके मुताबिक, आपकी समस्या है आपकी उम्र। एक शोध से पता चला है कि अधेड़पन का अवसाद से सीधा संबंध है।

    अमेरिका और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं का मानना है कि अधेड़ उम्र में पहुंचने के बाद व्यक्ति के अवसादग्रस्त होने की आंशका बढ़ जाती है। करीब 44 साल की उम्र होने पर तो यह आशंका चरम पर होती है। जिंदगी के शुरुआती और आखिरी दौर में व्यक्ति खुशहाल रहता है, जबकि बीच के हिस्से में दुख और अवसाद ही आते हैं। हालांकि ऐसा क्यों होता है, इसका पता लगाने में शोधकर्ता फिलहाल विफल रहे हैं।

    शोधकर्ताओं का नतीजा 80 देशों के करीब 20 लाख से अधिक लोगों से संबंधित आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद आया है। अध्ययन में कहा गया है कि अक्सर लोग प्रौढ़ावस्था में, खास कर 44 साल की उम्र के आसपास सबसे ज्यादा अवसादग्रस्त महसूस करते हैं। उनका कहना है कि लोग मानते हैं कि जैसे-जैसे वे मृत्यु के करीब जाएंगे, खुशियां उनसे दूर होती जाएंगी। लेकिन सच इसके ठीक उलट है। प्रौढ़ावस्था में लोगों की खुशियों और अच्छे मानसिक स्वास्थ्य का स्तर कम होता है। लेकिन यह सब अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे होता है। लेकिन 70 की उम्र तक पहुंचते- पहुंचते एक बार फिर व्यक्ति 20 साल के युवा की तरह खुश और दिमागी तौर पर चुस्त हो जाता है।

    आखिर क्यों है ऐसा


    शोधकर्ता इसकी सही वजह तो नहीं बता पाते, लेकिन उन्होंने तीन सिद्धांत जरूर बताए हैं:

    • युवावस्था में व्यक्ति की तमाम महत्वाकांक्षाएं होती हैं, लेकिन प्रौढ़ावस्था में ये सपने टूटने का दर्द झेलना पड़ता है। आखिरकार हर किसी का हर सपना सच तो नहीं हो सकता।
    • 30-40 वर्ष के दौरान हकीकत से सामना होता है। लिहाजा यह दौर मुश्किल होता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ व्यक्ति सच को स्वीकार करना सीख लेता है।
    • तीसरे सिद्धांत के मुताबिक उम्र बढ़ने पर व्यक्ति कई चीजों की अहमियत समझता है। कोई उम्रदराज व्यक्ति अगर अपने सामने किसी को मरते देखता है तो उसे यह सोच कर खुशी होती है कि वह जिंदा तो है।

     

    अवसाद से बचने के उपाय

     

    समस्या के बारे में बात करें

    बढ़ती उम्र में अगर आप किसा वजह से तनाव में हैं तो उसे मन में ना रखें। अपनी समस्या अपने पति, पत्नी या किसी निकट मित्र से खुलकर चर्चा करें। इस चर्चा से ही आपका आधा तनाव दूर हो जाता है। शेष समस्या खाने, हल्के व्यायाम और खुलकर सोने से दूर की जा सकती है।

    खुद को समय दें

    अगर आप तनाव में हैं तो आपको थोड़ा समय खुद को देना चाहिए। दिन में कुछ समय अकेले बिताने का प्रयास करना चाहिए। कुछ लोग अकेले सैर करना पसंद करते हैं। कुछ लोगों को अकेले पुस्तक पढ़ने से शांति मिलती है।

    मन में उठे सवालों को शांत करें

    कई बार अंधेरे कमरे में लेटना ही मन को शांत रखने के लिए काफी होता है, किंतु बहुत ज्यादा अकेले रहना भी ठीक नहीं, विशेषतः उन लोगों के लिए जो जल्दी हताश हो जाते हैं। सिर्फ कुछ निजी समय निकालें।

     

     

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    Disclaimer

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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