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भरपूर नींद लेने वाले बच्चे नहीं होते ओबेसिटी के शिकार

लेटेस्ट By ओन्लीमाईहैल्थ लेखक , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 13, 2018
भरपूर नींद लेने वाले बच्चे नहीं होते ओबेसिटी के शिकार

आधुनिक जीवनशैली की गलत आदतों की वजह से आजकल बच्चे भी तेजी से ओबेसिटी यानी मोटापे के शिकार हो रहे हैं। 

आधुनिक जीवनशैली की गलत आदतों की वजह से आजकल बच्चे भी तेजी से ओबेसिटी यानी मोटापे के शिकार हो रहे हैं। फिलाडेल्फिया स्थित टेंपल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बच्चों में बढते मोटापे को नियंत्रित करने के लिए आसान सा तरीका सुझाया है। उनके अनुसार बच्चों में रात को जल्दी सोने की आदत विकसित करके उन्हें बढते वजन के खतरे  से बचाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने कई बच्चों के खानपान, शारीरिक सक्रियता व सोने-जागने की आदतों का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। उन्होंने पाया कि जब बच्चों को सोने का ज्यादा  समय मिला तो उनके कैलरी इनटेक में काफी कमी आई।

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इससे उनके वजन में करीब आधा पौंड की गिरावट दर्ज की गई। इसके मुकाबले कम सोने के दौरान उनके कैलोरी सेवन में बढ़ोतरी देखी गई क्योंकि बच्चों को जंक फूड, आइसक्रीम, चॉकलेट और कोल्ड ड्रिंक जैसी नुकसानदेह चीजों से ज्यादा लगाव होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार हमारे शरीर में मौजूद लेप्टिन  हॉर्मोन  भूख बढाने के लिए जिम्मेदार होता है। भरपूर नींद लेने से इस हॉर्मोन की सक्रियता कम हो जाती है और व्यक्ति को ज्यादा  भूख नहीं लगती और वह कम कैलोरी का सेवन करता है। वयस्कों को जहां सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए, वहीं बच्चों के लिए नौ से दस घंटे की नींद जरूरी है। प्रमुख शोधकर्ता डॉ.चैटेल हार्ट के अनुसार बच्चों में ज्यादा  सोने की प्रवृत्ति को बढावा देकर हम उन्हें मोटापे की गिरफ्त में आने से रोक सकते हैं।

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उन्होंने आठ से 11  वर्ष के बच्चों को अध्ययन में शामिल गया। अध्ययन के पहले हफ्ते में बच्चों को उनकी दिनचर्या के मुताबिक सोने को कहा गया। दूसरे सप्ताह के दौरान उनमें से कुछ बच्चों के सोने का समय घटा दिया गया और कुछ को सोने के लिए ज्यादा  समय दिया गया। तीसरे सप्ताह में इन बच्चों के सोने की दिनचर्या आपस में बदल दी गई। बच्चों को फास्ट फूड, सॉफ्ट ड्रिंक और मीठी चीजों से खास लगाव होता है। आमतौर पर इन्हीं चीजों को उनके बढते वजन के लिए जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि नींद की कमी बच्चों में मोटापे के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होती है।

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