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आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और आयरन की कमी बिगाड़ सकती है आपका मानसिक स्वास्थ्य, जानें सेहत सुधारने का तरीका

स्वस्थ आहार By धीरज सिंह राणा , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 29, 2019
आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और आयरन की कमी बिगाड़ सकती है आपका मानसिक स्वास्थ्य, जानें सेहत सुधारने का तरीका

अगर दिन में तीन बार भोजन करने पर भी आपको पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है तो शरीर में मिनरल्स और पोषक तत्वों की कमी से आपका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। इससे बाइपोलर डिसआर्डर, डिमेंशिया, और तनाव बढ़ सकता है।

आप स्वस्थ रहने के लिए अपने डाइट में मुख्य रूप से ऐसे आहार शामिल करते हैं, जो आपके शरीर को एक बेहतर आकार दे सके, जो आपकी त्वचा को चमकदार बनाए, हड्डियों को मजबूत बनाए, आंखों के लिए फायदेमंद हो और जो आपको वजन बढ़ाने और घटाने में मदद करें। लेकिन रोजाना एक प्रकार का आहार खाने से उसका प्रभाव कहीं ज्यादा होता है। पौष्टिक आहार आपके मानसिक स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है जिस प्रकार खराब आहार आपके मूड के लिए हानिकारक हो सकता है। अगर आप हमेशा सुस्त महसूस कर रहे हैं, तो अपने डाइट पर विशेष ध्यान दें और पता लगाएं कि उसके पीछे क्या कमी है। क्योंकि शरीर में मिनरल्स और पोषक तत्वों की कमी से आपका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। इससे बाइपोलर डिसआर्डर (मैनिक डिप्रेशन), अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD), डिमेंशिया, डिप्रेशन और तनाव जैसे समस्याओं के होने का संभवना बढ़ जाता है। इसलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आप खाने में जो खा रहे हैं वो आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर है या नहीं।

ओमेगा -3 फैटी एसिड

ओमेगा-3 फैटी एसिड एक प्रकार का फैट है, जो शरीर में हार्मोन्स के निर्माण के साथ शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है। आपके शरीर में  EPA (Eicosapentaenoic Acid) और DHA (Docosahexaenoic Acid) का मात्रा कम होने के वजह से मूड खराब, तनाव और चिंता हो सकती है। इससे आपको ध्यान केंद्रित करने में भी कठिनाई हो सकती है। ओमेगा -3 फैटी एसिड के सेवन को बढ़ाने के लिए साल्मन, हिलसा, सार्डिन और टूना जैसी मछलियां खाएं। यदि आप शाकाहारी हैं, तो  अखरोट, अलसी, सूरजमुखी, सरसों के बीज, सोयाबीन, स्प्राउट्स, गोभी, बीन्स, ब्रोकली, शलजम, हरी पत्तेदार सब्जियों और स्ट्रॉबेरी, रसभरी जैसे
फलों का सेवन करें।

आयरन

विभिन्न तरह की बीमारियों से लड़ने के लिए हमारे शरीर में आयरन बेहद जरूरी है। हीमोग्लोबिन के कम होने से अनीमिया जैसी बीमारी हो सकती है। इसकी कमी से अक्सर थकान, बेचैनी, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं भी हो सकती है। एक अनुसंधान के अनुसार बच्चों में आयरन की कमी से अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) का खतरा बढ़ सकता है। आयरन से भरपूर आहार जैसे कि चुकंदर, जामुन, आंवला, नींबू, पत्तेदार साग, दाल और मांस का सेवन करें। इनके सेवन से आपका हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ेगा और शरीर में आयरन की कमी भी नही होगी।

मैग्नीशियम

मैग्नीशियम एक रासायनिक तत्व है जो आपके लिए बहुत उपयोगी है। शरीर का आधे से ज्यादा मैग्नीशियम हड्डियों में पाया जाता है। इसकी कमी से न्यूरोमस्कुलर समस्या हो सकती है और आपकी याद्दाशत भी कमजोर हो सकती है। केले, एवोकाडो, साल्मन, पालक, छोले, ब्रोकोली और शतावरी में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। इसके सेवन से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और आपको कई तरह के बीमारियों से भी बचाता है।

प्रोटीन

यह मैक्रोन्यूट्रिएंट सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के लिए बिल्डिंग ब्लॉक प्रदान करता है, ये दोनों न्यूरोट्रांसमीटर आपके दिमाग को तेज बनाता है। प्रोटीन युक्त आहार जैसे कि डेयरी उत्पाद, मछली, अंडे, जई, नट्स, दाल, टोफू और पनीर का सेवन उचित मात्रा में करें, इससे उन न्यूरोट्रांसमीटर के विकास के लिए आपके मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में अमीनो एसिड मिलता है।

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कार्बोहाइड्रेट

आपके आहार कार्बोहाइड्रेट का होना बहूत महत्वपूर्ण है। संतुलित आहार में 45 से 65 फीसदी कार्बोहाइड्रेट होता है और इससे शरीर को रोजाना के कार्य के लिए जरूरी कैलोरी मिलती है। न्यूरोट्रांसमीटर के विकास के लिए आपको पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है। यह आपके नींद और भूख को भी नियंत्रित करता है। अत्यधिक संसाधित कार्ब्स से बचें और इसके बजाय साबुत अनाज, ताजे फल, सब्जियां और दलिया खाएं।

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विटामिन डी

विटामिन डी की कमी होने पर हड्ड‍ियां मुलायम और कमजोर हो जाती हैं जिससे इनके टूटने की आशंका बढ़ जाती है। विटामिन डी की कमी से एनर्जी लेवल पर बुरा असर पड़ता है। लेकिन यह न्यूरोट्रांसमीटर के विकास के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।  विटामिन डी की कमी से तनाव की समस्या पैदा हो जाती है और इसके कारण लोग  उदासी महसूस करते हैं। अंडे की जर्दी, दूध, गाजर और वसायुक्त मछली जैसे टूना और साल्‍मन के सेवन से शरीर में विटामिन डी की कमी नहीं होती है।

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