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सिर्फ जंक फूड से नहीं आपकी इन आदतों से आपका बच्चा हो रहा मोटा, बदलें ये आदतें

लेटेस्ट By जितेंद्र गुप्ता , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 01, 2019
सिर्फ जंक फूड से नहीं आपकी इन आदतों से आपका बच्चा हो रहा मोटा, बदलें ये आदतें

जर्नल ओबेसेटी रिव्यू में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, सिर्फ जंक फूड ही नहीं आपकी ये आदतें आपके बच्चों में मोटापे का कारण बनती है। आप डॉक्टर से बात कर इन आदतों में बदलाव कर सकते हैं।

मोटापा विश्व भर में जीवनशैली से जुड़ी एक बड़ी बीमारी बन चुका है। जंक और हाई कैलोरी वाले फूड का सेवन निस्संदेह मोटापे का प्रमुख कारण है लेकिन हाल ही में एक अध्ययन में कुछ अलग ही बात सामने आई है। जर्नल ओबेसेटी रिव्यू में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, ऐसे भी कई कारण हैं, जो बच्चों में मोटापे के पीछे एक अहम भूमिका निभाते हैं। अध्ययन में पाया गया कि आंतों के बैक्टीरिया और फैट टिश्यू सहित इम्युन सेल व मेटाबॉलिक अंगों के साथ उनकी प्रतिक्रिया बच्चों में मोटापे के पीछे मुख्य भूमिका निभाती है।

Junk Food

अध्ययन के मुताबिक, आंत के अलावा, मां की डाइट, स्वास्थ्य, एक्सरसाइज लेवल, एंटीबायोटिक का प्रयोग, बच्चे को जन्म देने का तरीका (प्राकृतिक या सीजेरियन), बच्चे को खिलाने का तरीका (फिर चाहे वह फार्मूला हो स्तनपान) बच्चों में मोटापे के जोखिम का कारण बन सकता है।

वेक फॉरेस्ट बैपटिस्ट के वेक फॉरेस्ट स्कूल ऑफ मेडीसिन में मॉलिक्यूलर मेडिसिन के सहायक प्रोफेसर और अध्ययन के मुख्य लेखक पीएचडी हरिओम यादव का कहना है, ''चिकित्सा समुदाय को यह सोचने की जरूरत है कि मोटापा जरूरत से ज्यादा कैलोरी के सेवन का परिणाम है। हालांकि पिछले दशक से ज्यादा के वक्त में हुए कुछ अध्ययनों में इस बात की पुष्टि हुई है कि हमारी आंत में रहने वाले माइक्रोब न केवल मोटापे से जुड़े हैं बल्कि यह इसका एक कारण भी हैं।''

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अध्ययन के मुताबिक, स्कूली बच्चों में मोटापा प्रत्येक वर्ष 2.3 फीसदी की दर से बढ़ रहा है, जो कि अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद चिंताजनक और गंभीर विषय है।

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अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने (मानव और जानवरों) पर पहले से मौजूद अध्ययनों का विश्लेषण किया, जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कैसे आंत के माइक्रोब और इम्युन सेल के बीच प्रतिक्रिया मां से बच्चे में पहुंचती है। यह गर्भावस्था से शुरू होकर बच्चों में मोटापे में योगदान देती है।

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यादव ने कहा, ''वर्तमान शोध की यह जटिलताएं डॉक्टरों, न्यूट्रिशिनिस्ट और डायटिशियन के लिए बहुत फायदेमंद रहने वाली हैं। इस जानकारी को वह अपने मरीजों के साथ चर्चा कर सकेंगे क्योंकि इन बहुत से कारणों को बदला जा सकता है अगर लोगों के पास पर्याप्त रूप से अच्छी जानकारी हो तो।''

आंत के माइक्रोबायोम और मांताओं व उनके बच्चों दोनों में मोटापे की भूमिका की बेहतर समझ वैज्ञानिकों को और अधिक सफल रोकथाम तैयार करने में मदद कर सकती है। इसके अलावा बच्चों में मोटापे के बढ़ने की चिकित्सीय रणनीति भी बना सकेंगे।

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