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Newborn Care Week 2019: नवजात शिशु की देखभाल के 5 जरूरी उपायों के बारे में बता रही हैं डॉ. रीता बक्शी

नवजात की देखभाल By अतुल मोदी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 18, 2019
Newborn Care Week 2019: नवजात शिशु की देखभाल के 5 जरूरी उपायों के बारे में बता रही हैं डॉ. रीता बक्शी

देश में हर साल 15 से 21 नवंबर तक नवजात शिशु देखभाल सप्ताह (Newborn Care Week) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चे के अस्तित्व और विकास के लिए नवजात शिशु की देखभाल के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

नवजात अवधि (जीवन के पहले 28 दिन) बच्चे के जीवित रहने की महत्वपूर्ण अवधि है; इस अवधि में किसी भी अन्य अवधि की तुलना में प्रति दिन मौतों का सबसे अधिक जोखिम होता है। जीवन का पहला महीना आजीवन स्वास्थ्य और विकास के लिए एक मूलभूत अवधि है। स्वस्थ बच्चे स्वस्थ वयस्कों में विकसित होते हैं जो अपने समुदायों और समाजों में कामयाब हो सकते हैं और योगदान दे सकते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक, हर साल 2.6 मिलियन बच्चे जीवन के पहले 28 दिनों में मर जाते हैं। यूनिसेफ के एक आंकड़े के मुताबिक, जीवन के पहले महीने में होने वाली मौतें, जो ज्यादातर रोके जाने योग्य होती हैं, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाली कुल मौतों का 47 प्रतिशत है।

प्रसव, जन्म और तत्काल प्रसव के बाद की अवधि नवजात और मां के जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। और 75% नवजात मौतों को जन्म के समय, जीवन के पहले सप्ताह के दौरान, प्रभावी स्वास्थ्य उपायों से रोका जा सकता है।

नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें? 

सभी नवजात शिशुओं को बीमारी के जोखिम को कम करने और उनकी वृद्धि और विकास को बढ़ाने के लिए उनकी देखभाल जरूरी है। जन्म के समय गर्माहट, सामान्य श्वास, मां का दूध और संक्रमण से बचाव बच्चे की बुनियादी जरूरतें हैं, जिन्‍हें पूरी करना जरूरी है। इन बुनियादी जरूरतों से संकेत मिलता है कि एक बच्चे का अस्तित्व पूरी तरह से उसकी मां और अन्य देखभाल करने वालों पर निर्भर है। इसलिए जन्म के तुरंत बाद सभी नवजात शिशुओं को उचित देखभाल प्रदान करना महत्वपूर्ण है। यह देखभाल कई नवजात आपात स्थितियों को भी रोक सकती है।

जन्‍म के पहले दिन से शिशु की देखभाल कैसे करें, इस बारे में विस्‍तार से बता रही हैं डॉ. रीता बक्शी, स्त्री रोग विशेषज्ञ और फाउंडर, इंटरनैशनल फर्टिलिटी सेंटर। 

1. स्‍तनपान

शिशु के जन्‍म के शुरूआती 24 घंटों में अजीब स्थिति हो सकती है। क्योंकि, कभी-कभी नई माताओं को समझ ही नहीं आता कि बच्चे के लिए क्या सही है और क्या नहीं।

अपने बच्चे के जन्म के बाद पहले ही घंटे में पहली बार स्तनपान कराने की कोशिश करें। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान आपके बच्चे के जागने और स्तन को लेने की संभावना अधिक होती है। यदि आपका शिशु नींद में है, तो उसे हर कुछ घंटों में स्तन पर रखें, भले ही आपको उसे जगाना पड़े। और, याद रखें, नवजात शिशु अधिक सतर्क हो जाते हैं और जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, बेहतर स्तनपान करने लगता हैं।

अपनी कोशिश को जारी रखें। यहां तक कि अगर आपका बच्चा पहली बार में सही तरह से स्‍तनपान नहीं लेता, तो कोई घबराने वाली बात नहीं है। यदि आप चिंतित हैं कि आपका बच्चा पहले दिन खाने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो अपनी नर्स से बात करें। आपका कोलोस्ट्रम आपके शिशु को स्तनपान के पहले कुछ दिनों में चाहिए होता है, और यह हर दिन बढ़ता है जब तक कि आपके स्तन तीसरे दिन के प्रसव के बाद दूध से भर नहीं जाते। 

इसलिए, भले ही ऐसा लगता है कि आपके बच्चे को और अधिक की आवश्यकता है, आपको पूरक सूत्र फीडिंग देने की ज़रूरत नहीं है जब तक कि यह चिकित्सकीय रूप से आवश्यक न हो। अपने नवजात शिशु के साथ सीधे त्वचा से त्वचा के संपर्क में समय बिताने की कोशिश करें क्योंकि यह आपके बच्चे को अधिक स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

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2. हैंडलिंग

शिशु को शुरूआती 24 घंटे, बहुत आराम से हैंडलिंग की ज़रुरत होती है। अपने बच्चे को पकड़ने से पहले अपने हाथों को धो लें या हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करें। नवजात शिशुओं में अभी तक एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली नहीं है, इसलिए उन्हें संक्रमण का खतरा है।

अपने बच्चे के सिर और गर्दन को सहारा दें। अपने बच्चे को ले जाते समय सिर को झुकाएं और शिशु को सीधा ले जाते समय सिर का सहारा लें या जब आप अपने बच्चे को लेटाएं।

अपने नवजात शिशु को कभी भी हिलाएं नहीं, न ही हवा में उझालें। हिलने से मस्तिष्क में रक्तस्राव हो सकता है और मृत्यु भी हो सकती है। सुनिश्चित करें कि आपके शिशु को वाहक या कार की सीट पर सुरक्षित रूप से बांधा गया है। किसी भी गतिविधि को सीमित करें जो उछाल वाली हो सकती है।

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3. नींद

नवजात शिशुओं को भरपूर नींद की जरूरत होती है। वह एक जबरदस्त विकास गति पर है और इसे उर्जा के लिए भरपूर नींद की आवश्यकता होती है। अच्छी नींद शिशु को मामूली बीमारियों और रोग प्रतिरोधक शक्ति प्राप्त करने में मदद करवाता है।

आपका बच्चा 24 घंटे में 18 घंटे तक सो सकता है। फीड के लिए जागने से पहले आपका बच्चा एक बार में लगभग तीन घंटे से अधिक नहीं सोएगा। शिशु आसानी से और जल्दी से आपके स्तन को पचा लेता है इसलिए वह अक्सर टॉप-अप के लिए जागता है। आपका बच्चा आपके करीब होने के लिए उस पर निर्भर करता है ताकि आप उसकी जरूरतों का ध्यान रख सकें। 

साथ ही, कोशिश करें कि हमेशा अपने बच्चे को सोने के लिए उसे पीठ के बल सुलाएं, पेट या बाजू पर नहीं। ओवरहीटिंग से बचें, नींद के लिए फर्श का उपयोग करें और सोते समय तकिए, कंबल, शीट, रजाई आदि को दूर रखें। शिशु के विस्‍तर को आरामदायक बनाएं। 

यदि आपका बच्चा अत्यधिक नींद ले रहा है तो आपको सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि कहीं उसे कोई चिकित्सा समस्या तो नहीं है। पीलिया, संक्रमण, और किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया, आपके बच्चे को सामान्य से अधिक नींद दिला सकती है।

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4. नहलाना

शुरूआत में शिशु को जानना, दूध पिलाना, सोना और मम्मी होने के लिए एडजस्ट करना शायद पहले 24 घंटों में आपका सारा समय ले लेगा। इसलिए कोशिश करें कि जब आप उसे घर लाएं तो अपने बच्चे को नहलाने की चिंता न करें। जब तक कि आप जरूरत न समझें। तब तक आप उसकी नर्म कपड़े से पोछाई कर सकती हैं। आपके नवजात शिशु का गर्भनाल एक या दो सप्ताह में ठीक हो जाना चाहिए। तब तक आप नहलाने के लिए इंतजार कर सकते हैं। आप पहले दिन शिशु की टॉपिंग और टेलिंग कर सकती हैं। 

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5. डायपर

जितनी बार डायपर बदलें हाथ धो लें। डायपर खरीदते समय ये ध्‍यान रखें कि वो आपके शिशु के लिए आरामदायक है या नहीं। डायपर को समय-समय पर बदलते रहें। ज्‍यादा देर तक डायपर लगे रहने से बचें, क्‍योंकि ज्‍यादा देर तक डायपर लगे रहने से कई बार रेशेज हो जाते हैं, जिससे बच्‍चा बहुत परेशान हो सकता है।

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