• shareIcon

निम्‍न रक्‍तचाप में कैसे करें नवजात शिशु की देखभाल, जानें 5 जरूरी बातें

नवजात की देखभाल By अतुल मोदी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 21, 2019
निम्‍न रक्‍तचाप में कैसे करें नवजात शिशु की देखभाल, जानें 5 जरूरी बातें

जन्म लेने के बाद नवजात में निम्न रक्तचाप होना आम बात है। नवजात में निम्न रक्तचाप के कई कारण हो सकते हैं। हालांकि कारणों का पता लगाना मुश्किल होता है लेकिन आम नवजातों के साथ ऐसा होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं। नवजात

जन्म लेने के बाद नवजात में निम्न रक्तचाप होना आम बात है। नवजात में निम्न रक्तचाप के कई कारण हो सकते हैं। हालांकि कारणों का पता लगाना मुश्किल होता है लेकिन आम नवजातों के साथ ऐसा होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं। नवजात में निम्न रक्तचाप क्यों होता है, यदि नवजात के साथ ऐसी स्थिति आती है तो क्या करें। आइए जानें नवजात में निम्न रक्तचाप से जुड़ी कुछ और बातों के बारे में।

 

नवजात में निम्न रक्तचाप के कारण

  • नवजात में निम्न रक्तचाप के कई कारण हो सकते हैं जैसे- प्रसव के पहले ओर बाद में अत्यधिक रक्त का बहना।
  • किसी तरह के इंफेक्शन के कारण।
  • मां को प्रसव से पहले दी गई दवाईयों के कारण।
  • प्रसव के बाद तरल पदार्थ का बहुत अधिक बहना।
  • अचानक नवजात के माहौल में आया परिवर्तन भी इसका मुख्य कारण है।
  • नवजात का कमजोर होना या फिर नवजात शिशु में अधिक कमजोरी का होना।
  • हालांकि कई बार यह पता लगाना बहुत मुश्किल होता है कि नवजात में निम्न रक्तचाप क्यों हैं। कई बार नवजात में होने वाली श्वसन संबंधी समस्याओं के कारण भी निम्न रक्तचाप की समस्या देखने को मिल जाती है।

नवजात में निम्न रक्तचाप का उपचार

  • ऐसी स्थिति में नवजात को वैक्सीन या इंजेक्शन के जरिए अतिरिक्त तरल पदार्थ दिए जाते हैं।
  • नवजात बच्चों में रक्तचाप बढ़ाने के लिए मशीनों में और ऐसे माहौल में रखा जाता है जिससे नवजात का रक्तचाप सामान्य हो जाए।
  • कई बार नवजात में रक्त की कमी के कारण भी निम्न रक्तचाप की समस्या होने लगती हैं, ऐसे में नवजात को रक्त भी चढ़ाया जाता है जिससे नवजात जल्दी ही सामान्‍य हो जाए।
  • नवजात को निम्न रक्तचाप से बचाने के लिए डॉक्टर्स की देखरेख में ही रखना चाहिए, जिससे नवजात किसी ही होने वाले अन्य संक्रमण और बीमारी से बच सकें।

नवजात की देखभाल कैसे करें 

  • नवजात शिशु के शरीर को हमेशा ढककर रखना चाहिए क्यों कि छोटे बच्चों का शरीर बाहरी तापमान के अनुसार स्वयं को ढाल नहीं पाता है। नवजात जहां हो वहां का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास होना चाहिए।
  • नवजात का रोना हमेशा चिंता की बात नहीं होती। ज्यादातर बच्चे भूख लगने पर या बिस्तर गीला करने पर रोते हैं। बच्चे के रोने पर इन बातों का ध्यान दें। अगर बच्चा लगातार रोता रहता है, तो उसे चिकित्सक को दिखायें।
  • छोटे बच्चों की मालिश करने से उनकी हड्डियां मजबूत बनती हैं और यह मालिश बेहद आवश्यचक है। नवजात की मालिश के लिए बादाम का तेल प्रयोग कर सकती हैं। जन्‍म के 10 दिन के बाद बच्‍चे के शरीर की मालिश कर सकते हैं। 
  • मां के दूध को नवजात के लिए सर्वोत्तम माना जाता है क्योंकि इसमें पाया जाने वाला कोलेस्‍ट्रॉम नामक पदार्थ बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत जरूरी है और यह बच्‍चे को भविष्‍य में बीमारियों से भी बचाता है। इसलिए जन्‍म के बाद बच्‍चे को मां का दूध पिलाना चाहिए।
  • बच्चे को कुछ देर धूप में ले जाने की प्रकिया को फोटोथेरेपी कहते हैं। नवजात को कुछ समय के लिए कपड़े में ढककर धूप भी दिखाएं। इससे बच्‍चे की हड्डियां मजबूत होंगी।
  • बच्‍चे को 6 महीने तक केवल मां का दूध देना चाहिए। 6 महीने के बाद बच्‍चे को ठोस आहार भी दे सकते हैं, लेकिन बच्‍चे को ऐसे आहार बिलकुल न दीजिए जो पचने में दिक्‍कत हो।
  • अगर आपका शिशु बीमार है तो डॉक्‍टर की सलाह जरूर लें। 

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Parenting In Hindi 

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK