गर्भावस्‍था में ऐंठन की समस्‍या के उपचार के लिए कीजिए मॉर्निंग वॉक

Updated at: Oct 23, 2013
गर्भावस्‍था में ऐंठन की समस्‍या के उपचार के लिए कीजिए मॉर्निंग वॉक

गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही में क्रैंप की समस्‍या ज्‍यादा होती है, इस ऐंठन को कम करने के लिए इन प्राकृतिक तरीकों को आजमायें।

Nachiketa Sharma
गर्भावस्‍था Written by: Nachiketa SharmaPublished at: Aug 06, 2013

गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं को कई प्रकार की समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है उनमें से एक है क्रैंप्‍स या ऐंठन। गर्भावस्‍था के तीसरे ट्राइमेस्‍टर में क्रैंप्‍स की समस्‍या ज्‍यादा होती है। सबसे ज्‍यादा ऐंठन पैरों और एड़ी में होती है।

एक्‍सरसाइज करती प्रेग्‍नेंट महिला गर्भावस्‍था के आखिरी तिमाही में भ्रूण का विकास ज्‍यादा होने के कारण पैरों पर भार ज्‍यादा बढ़ जाता है जिससे यह समस्‍या होती है। भार बढ़ने के कारण कमर के निचले हिस्‍सों की नसों में दबाव बढ़ जाता है जिसके कारण ज्‍यादा दर्द होता है। इसके अलावा शरीर में कैल्सियम, विटामिन-बी व ई तथा नमक की कमी के कारण भी मांसपेशियों में ऐंठन होती है।

गर्भावस्था के दौरान होने वाली इस ऐंठन का कोई निर्धारित समय नही होता है और न ही इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। लेकिन कुछ तरीकों को आजमाने से इसके दर्द से राहत मिल सकती है। आइए हम आपको कुछ प्राकृतिक तरीके बता रहे हैं जिनाक प्रयोग करके इस ऐंठन को कम किया जा सकता है।


प्रेग्‍नेंसी में ऐंठन को कम करने के लिए प्राकृतिक उपचार

खान-पान पर ध्‍यान दें

खाने में में अनियमितता बरतने के कारण भी क्रैंप होता है। कई मामलों में यह देखा गया है कि ऐंठन खाने में आवश्‍यक विटामिनों एवं खनिजों की कमी के कारण होता है, यदि खाने में कैल्शियम, मैग्नीशियम या फोस्फोरस की कमी है तो ऐंठन ज्‍यादा होती है। ऐसे में नाश्ते में केले, बादाम, हरी पत्तेदार सब्जियों का सलाद आदि का सेवन कीजिए। खाने में नमक की मात्रा बढ़ाइए (लेकिन जिनको उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या है तो नमक ज्‍यादा खाने से बचें), डेयरी उत्‍पाद और दालों को खाने में शामिल कीजिए।

 

मॉर्निंग वॉक है जरूरी

गर्भावस्‍था के दौरान ऐंठन को कम करने के लिए सुबह की सैर बहुत जरूरी है। गर्भावस्‍था की पहली तिमाही से ले‍कर प्रसव के पहले तक सुबह की सैर करना बिलकुल न भूलें। नियमित रूप से 10-15 मिनट टहलने से रक्‍त का प्रवाह नियमित होता है और इससे पैरों में होने वाली ऐंठन कम होती है।

पैरों को एक-दूसरे पर न रखें

गर्भावस्‍था के दौरान पैरों को क्रॉस करके न बैंठे, इससे पैरों में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है या रूक जाता है। सोते वक्‍त या आराम के दौरान अपने पैरों को हिलाते रहिए, इससे खून का संचार ठीक से होगा और ऐंठन में आराम मिलेगा। अपने पैरों को शरीर से थोड़ा ऊपर रखने की कोशिश करें। सोते वक्‍त बायें करवट में सोयें, इसमें खून का संचार अच्‍छे से होता है।

व्‍यायाम भी करें

ऐंठन कम करने के लिए व्‍यायाम बहुत जरूरी है। यदि पैरों में ज्‍यादा ऐंठन हो रही तो हल्‍का व्‍यायाम करके इसे कम किया जा सकता है। यदि आप लेटे हुए या बैठे हुए कुछ हलके फुल्के पैरों के व्यायाम करें तो ऐंठन से राहत मिलेगी। पैरों को दायें-बाएं घुमाएं, इसके बाद उन्हें मोड़ें एवं खींचें। इस क्रिया को कई बार दोहरायें।

आरामदायक जूते पहनें

गर्भावस्‍था के दौरान हाई हील के जूते या स्‍लीपर्स को पहनने से बचें। इनके स्‍थान पर सामान्‍य तलवे वाले जूते और चप्‍पलें पहनने से पैरों को आराम मिलता है। काम के दौरान ही जूतें पहने, जब आप आराम कर रही हों या फिर कुर्सी पर बैठी हों तो चप्‍पल उतार दीजिए। इससे पैरों को आराम मिलेगा।


रात को सोने से पहले पैरों की मासपेशियों के लिए हल्‍का व्‍यायाम कीजिए, इससे रात में होने वाली ऐंठन कम होगी। यदि ऐंठन ज्‍यादा हो रही हो तो चिकित्‍सक से सलाह अवश्‍य लीजिए।

 

 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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