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नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2019: डेंगू और चिकनगुनिया भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चिंता

Updated at: Oct 31, 2019
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Written by: पल्‍लवी कुमारीPublished at: Oct 31, 2019
 नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2019: डेंगू और चिकनगुनिया भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चिंता

नेशनल हेल्थ प्रोफाइल द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट की मानें तो भारत स्वास्थय से जुड़े कुछ मामलों में बेहतर हो रहा है, तो सालो- साल डेंगू, चिकनगुनिया और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों के नए मामले सामने आ रहे हैं। भारत में अब भी सार्वजिक स्वास्थय को ध्यान में

नेशनल हेल्थ प्रोफाइल (National Health Profile 2019) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट की मानें, तो भारत में लोगों की जीवन प्रत्याशा साल 1970-1975 में 49.7 से बढ़क वर्ष 2012-16 के लिए यह 68.7 हो गई है। इसी अवधि में महिलाओं के लिए जीवन प्रत्याशा 70.2 वर्ष और पुरुषों के लिए 67.4 वर्ष है। यानी अगर पिछले सर्वे की तुलना में देखा जाए, तो महिलाएं पुरूषों से ज्यादा आयु तक जी रही हैं। वहीं बात अगर बीमारियों की जाए तो 6.51 करोड़ लोग नॉन -कॉमनिकेबल डिजीज से पीड़ित हैं, तो 4.45 प्रतिशत लोगों को डायबिटीज है। तो वहीं 6.19 प्रतिशत लोग हाइपरटेंशन से, 0.30 प्रतिशत लोग दिल की बीमारी से और 0.26 प्रतिशत लोग कैंसर से पीड़ित पाए गए हैं।

Inside_National health repor t2019

सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली के एनसीटी द्वारा प्रति वर्ग किलोमीटर 11,320 लोगों के उच्चतम जनसंख्या घनत्व (Highest Population Density)की रिपोर्ट की गई, जबकि अरुणाचल प्रदेश में सबसे कम जनसंख्या घनत्व 17 है। इस सर्वेक्षण में युवा और आर्थिक रूप से सक्रिय आबादी से जुड़ी कई बातों का पता चला है। सर्वेक्षण में 2016 की कुल अनुमानित जनसंख्या में 27 प्रतिशत लोग 14 वर्ष से कम आयु के हैं और बहुसंख्यक जनसंख्या यानी कि 64.7 प्रतिशत लोग 15-59 वर्ष आयु वर्ग में है। इससे यह भी मालूम पड़ता है कि आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या 8.5 प्रतिशत है, जो 60 से लेकर 85 वर्ष की आयु वर्ग में हैं। इसके अलावा कम संसाधनों की पहुंच वाले गरीबों की स्थिति ज्यादा खराब है

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डेंगू और चिकनगुनिया एक बड़ी चिंता का विषय-

एडीज मच्छरों द्वारा फैलने वाली बीमारी डेंगू और चिकनगुनिया भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ी चिंता का कारण है। हर साल मच्छरों से फैलने वाली इन बीमारियों से हजारों व्यक्ति प्रभावित होते हैं, जिसके कारण बहुत से लोगों की मृत्यु हो जाती है। बता दें कि भारत में 1950 के दशक से डेंगू का प्रकोप जारी है लेकिन पिछले दो दशकों में बीमारी की गंभीरता और बढ़ गई है। हालांकि, देश में चिकनगुनिया के कथित मामलों में 2017 की तुलना में 2018 में 67,769 से 57,813 की मामूली कमी देखी गई है।

Inside_2019 health data india

1991 से 2017 तक भारत में जन्म दर, मृत्यु दर और प्राकृतिक विकास दर में लगातार कमी आई है। 2017 तक भारत में प्रति 1,000 जनसंख्या पर 20% और प्रति 1,000 जनसंख्या पर मृत्यु दर 6.3% दर्ज की गई है जबकि प्राकृतिक विकास दर भारत में प्रति 1,000 जनसंख्या पर 13.9% है। ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म दर शहरी की तुलना में अधिक है। इसी तरह, शहरी की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु दर और प्राकृतिक विकास दर भी अधिक थी।हालाँकि, जनसंख्या में वृद्धि जारी है, क्योंकि जन्म दर में गिरावट मृत्यु दर में गिरावट जितनी तेजी से नहीं है।

वहीं शिशु मृत्यु दर की बात करें तो इसमें काफी गिरावट आई है। देश के लिए कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) 2.3 है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 2.5 हो गई है और ताजा आकड़ों के अनुसार 2016 में यह शहरी क्षेत्रों में यह 1.8 प्रतिशत है। सर्वेक्षण में देश के स्वास्थ्य स्थिति की बात करें, तो 2018 में, छत्तीसगढ़ में मलेरिया के कारण अधिकतम मौतें हुई हैं। साल 2012 और 2013 में संक्रामक बीमारियों में कमी आई थी लेकिन  2014 और 2015 में फिर इसमें थोड़ी वृद्धि हुो गई। 

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आत्महत्या के मामलों में वृद्धि-

2012 और 2013 की तुलना में वर्ष 2014 में स्वाइन फ्लू के मामलों और मौतों की संख्या में काफी कमी आई है। हालांकि, वर्ष 2015 में मामलों और मौतों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। साल 2016 में संख्या में कमी आई लेकिन फिर 2017 और 2018 में से बढ़ गई। भारत में विकलांगों की कुल संख्या 2.68 करोड़ है। वर्ष 2015 में आकस्मिक दुर्घटनाओं के कारण 4.13 लाख लोगों की जान चली गई है और 1.33 लाख लोगों की आत्महत्या के कारण मृत्यु हुई है। रिपोर्ट में युवा वयस्कों में आत्महत्या की दर में काफी वृद्धि हो रही है और आत्महत्या के मामलों की अधिकतम संख्या (44,593) 30-45 वर्ष की आयु के बीच बताई गई है। इन आत्महत्याओं में बड़ा कारण डिप्रेशन और तनाव जैसी मानसिक बीमारियां भी हैं, जो एक बड़ी चिंता की वजह है।

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