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नशे को कहें ना, सेहत को कहें हां

लेटेस्ट By Anubha Tripathi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 26, 2012
नशे को कहें ना, सेहत को कहें हां

युवाओं को नशे की दुनिया से दूर रखने में उनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान होता है।

nashe ko kahe na sehat ko kahe han

नशे की दुनिया पहली नजर में काफी आकर्षक लगती है। वह अपनी ओर खींचती है। लेकिन, एक बार इस दुनिया में जाने वालों को कब इसकी लत पड़ जाती है उन्हें खुद भी इसका पता नहीं होता है। यह एक ऐसा जहरीला नशा है जो धीरे-धीरे जिंदगी खत्म कर देता है। और फिर इसका शिकार किसी लायक नहीं रह जाता । इन मादक पदार्थों का सेहत पर बेहद बुरा असर होता है। इसके सेवन से युवा शारीरिक रुप से कमजोर व अन्य कई संक्रामक रोगों के शिकार हो जाते हैं।

 

मादक पदार्थों का प्रभाव

  • शरीर का  कमजोर होना
  • संक्रामक रोग जैसे एचआईवी/ एड्स
  • पैसों की बर्बादी
  • पढाई पर असर

 

 

अगर आपके परिवार में कोई मादक पदार्थों का सेवन कर रहा है तो आप आसानी से इस बात का पता लगा सकते हैं। नशा करने से व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव दिखना शुरु हो जाता है। आईए जानें क्या है इसके लक्षण

  • स्वभाव में अचानक बदलाव
  • ज्यादा या कम सोना
  • शरीर में दर्द, मितली आना व अस्थिर कदम चाल  
  • रोजगार व पढ़ाई में मन न लगना
  • झूठ बोलना, पैसे  चुराना
  • पाउडर, गोलियां,  पुड़िया, सिगरेट व  सीरिंज रखना

 

 

युवाओं की जिम्मेदारी

 

कई बार ऐसा होता है कि युवा अपने दोस्तों के दबाव में आकर किसी बात के लिए मना नहीं कर पाते और वे गलत काम में भी उनका साथ देने लगते हैं। लेकिन ध्यान  रहे यह आपकी जिंदगी है, गलत व सही की पहचान करना सीखें। और गलत चीजों को सख्ती से विरोध करने में कोई बुराई नहीं। मादक पदार्थों का सेवन से आपको किसी तरह की खुशी नहीं मिलेगी यह स्वथयं तय करें। अगर आपको मादक पदार्थों के अवैध इस्ते माल के बारे में पता है तो इसकी सूचना पुलिस को जरूर दें।

 

अभिभावकों की जिम्मेदारी

 

युवाओं को नशे की दुनिया से दूर रखने में उनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान होता है। अगर कोई युवा नशे की दुनिया से बार आना चाहता है तो उसके लिए इलाज के साथ-साथ परिवार का सहयोग भी जरूरी है। जब आपका बच्चा किशोरावस्था व युवावस्था में पहुंच जाए तो उसे बड़ा समझ कर उसे हाल पर नहीं छोड़ें। उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। उसके दोस्तों स्कूल व कॉलेज के बारे में उससे  बात करें। बच्चों को बेवजह डांटे नहीं इससे वे जिद्दी हो जाएंगे और आपकी बात नहीं मानेंगे। अपने बच्चे की चिंता का कारण जानने की कोशिश करें और उनके साथ मिलकर उसका हल निकालें। अगर बच्चा मादक पदार्थों का सेवन कर रहा है तो उसे उपचार व परमार्श के माध्यम से इस दुनिया से बाहर निकालें।

Written by
Anubha Tripathi
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागJun 26, 2012

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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