• shareIcon

सोलर किड्स: अंधेरा होते ही काम करना बंद कर देते हैं हाथ-पैर

मेडिकल मिरेकल By Gayatree Verma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 20, 2016
सोलर किड्स: अंधेरा होते ही काम करना बंद कर देते हैं हाथ-पैर

आपने सुना होगा कि रात में दिखना बंद हो जाता है लेकिन क्या आपने सुना है, रात होते ही इंसान के बेजान हो जाता है और सुबह फिर जी उठता है। सोलर किड्स ऐसे ही हैं, इनके बारे में विस्‍तार से इस लेख में पढ़ें।

कोई मिल गया का जादू याद है... जो सूरज के डूबते ही बेजान हो जाता था और सूरज की रोशनी में कई सारे जादू दिखाता था। इसी तरह के तीन जादू बच्चे पाकिस्तान में रहते हैं जो सूरज के ढलते ही बेजान हो जाते हैं और सूर्योदय होते ही जी उठते हैं। इनके इस तरह की अजीब जीवनचर्या के कारण गांव के लोग इन्हें सोलर किड्स कहते हैं।

 

सोलर किड्स

जो सूरज की रोशनी में ही ऊर्जावान रहते हैं। जैसे सौर ऊर्जा सूर्य की रोशनी से चार्ज होती है और सूर्य के बिना कुछ काम की नहीं होती वैसे ही सोलर किड्स होते हैं। ये सूर्योदय होते ही खेलना-कूदना शुरू कर देते हैं औऱ सूरज ढलते ही बेजान हो जाते हैं।

सोलर किड्स

पाकिस्तान में हैं ये सोलर किड्स

  • ये सोलर किड्स पाकिस्तान के तीन भाई हैं जो दुनिया के चिकित्सकों के लिए अब मिस्ट्री बन गए हैं।
  • ये सोलर किड्स अब तक दुनिया का अपनी तरह का इकलौता केस है जिस पर कई चिकित्सक रिसर्च कर रहे हैं।
  • ये तीनो भाई क्वेटा शहर से 15 किमी दूर मिंया कुंडी में रहते हैं।
  • इन्हें फिलहाल इस्लामाबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया है।
  • इन तीनों भाईयों में शोएब की उम्र एक साल, राशिद की नौ साल और इल्यास की तेरह साल है।

 

कैसे हैं ये तीनो सोलर किड्स

तीनों भाई दिन भर सूरज की उपस्थिती में सामान्य बच्चों की तरह रहते हैं। अपना सारा काम खुद करते हैं। पढ़ते-लिखते, खेलते-कूदते और खाते-पीते हैं।  लेकिन सूर्यास्त होते ही इन तीनों के लिए खड़ा होना भी कठिन हो जाता है।

 

क्या है पहेली

  • चिकित्सकों की टीम पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये सूर्यास्त में किस वजह से पैरालाइज्ड हो जाते हैं।
  • इस्लामाबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के चांसलर डॉ. जावेद अकरम कहते हैं, ''ये बहुत ही रेयरेस्ट मेडिकल कंडीशन है, जो पहले कभी हमारे सामने नहीं आई।''
  • अकरम के अनुसार, इन बच्चों का शरीर सूरज के उगने और डूबने के हिसाब से काम करता है।
  • चिकित्सकों की टीम का मानना है कि ये बच्चे मैसथेनिया सिंड्रोम से पीड़ित हैं।

 

मास्थेनिया सिंड्रोम क्या है?

  • मास्थेनिया सिंड्रोम एक जन्मजात बीमारी है।
  • अब तक दुनिया में केवल 600 केस ही देखने को मिले हैं।
  • जन्मजात मास्थेनिया सिंड्रोम (सीएमएस) एक वंशानुगत न्यूरोमास्कुलर डिसऑर्डर है जो न्यूरोमास्कुलर जंकशन में कई प्रकार के विकार के कारण होता है।
  • इसके लक्षण या प्रभाव लैम्बर्ट-ईटन सिंड्रोम और मायस्थेनिया ग्रेविस के समान होते हैं।
  • लेकिन ये उपरोक्त दोनों बीमारियों की तरह ऑटोइम्युन डिज़ीज नहीं है।

 

कैटेगरी और लक्षण

इस सिंड्रोम को तीन कैटेगरी में डिवाइड किया गया है।

  1. प्रेसीनेप्टिक (presynaptic) - इस कैटेगरी के सिंड्रोम में सांस लेना बंद हो जाता है, आंखेस मुंह और गले की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और सांस लेना बंद हो जाता है। इस लक्षण में आंखों में दोनों तरह की दृष्टि दोष की समस्या होती है और खाने को चबाने व निगलने में कठिनाई होती है।
  2. पोस्‍टसीनेप्टिक (postsynaptic) - इस सिंड्रोम के लक्षण शिशुओं में होते हैं। इसमें शिशओं की कुछ जरूरी मांसपेशियों में कमजोरी पैदा हो जाती है, खाने और सांस की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इस सिंड्रोम से पीड़ित शिशु काफी देर से बैठना, चलना और क्रॉल करना सीखते हैं।  
  3. सिनेप्टिक (synaptic) - इसके लक्षणों में बचपन में खाने में और सांस लेने में समस्या होती है। ये सिंड्रोम बच्चों में मोबीलिटी को कम कर देता है। रीढ़ की हड्‍डी को कमजोर कर देता है।

 

क्‍या है इसका उपचार

  • इस सिंड्रोम का ट्रीटमेंट इसकी कैटेगरी पर निर्भर करता है।
  • मास्थेनिया सिंड्रोम के लक्षण मायस्थेनिया ग्रेविस के समान होते हैं लेकिन मायस्थेनिया ग्रेविस का इलाज मास्थेनिया सिंड्रोम में कारगर नहीं होते।
  • मास्थेनिया सिंड्रोम जेनेटिक है और इसके इलाज पर फिलहाल कई तरह की दवाईयां देकर रिसर्च चल रही है।

 

Read more articles on Medical Miracles in Hindi.

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK