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आईवीएफ के जरिए पैदा हुए थे आकाश और ईशा अंबानी, जानें क्‍या है ये तकनीक

विविध By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 11, 2019
आईवीएफ के जरिए पैदा हुए थे आकाश और ईशा अंबानी, जानें क्‍या है ये तकनीक

आकाश और उनकी बहन ईषा अंबानी दोनों जुड़वा हैं। इस बात का खुलासा, कुछ दिनों पहले ईषा ने खुद एक इंटरव्‍यू में कही थी। इंटरव्‍यू में, ईशा ने अंबानी घराने के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताई है। ईशा ने साझा किय

देश के जाने-माने उद्योगपति मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के बेटे आकाश अंबानी की श्‍लोका के साथ शादी के बंधन में बंध चुके हैं। उनकी शादी देश और दुनिया में चर्चा का दो दिनों से चर्चा में है। शादी के आयोजनों से लेकर, आने वाले मेहमानों तक पर सबकी नजर टिकी रही। लोगों में ऐसी शाही शादी देखने के आयोजन को देखने का क्रेज काफी था।

हालांकि यहां हम आपको आकाश अंबानी की शादी की बात नहीं बल्कि उनके जन्‍म की बात करेंगे। जी हां, आकाश और उनकी बहन ईशा अंबानी दोनों जुड़वा हैं। इस बात का खुलासा, कुछ दिनों पहले ईशा ने खुद एक इंटरव्‍यू में कही थी। इंटरव्‍यू में, ईशा ने अंबानी घराने के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताई है। ईशा ने साझा किया कि शादी के सात साल बाद उनके माता-पिता ने उन्हें आईवीएफ के माध्यम से प्राप्‍त किया है। 

 

क्‍या है आईवीएफ 

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन, एक असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नॉलॉजी (ART) है, जिसने फर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे लाखों जोड़ों को अपने बच्चे पैदा करने की इच्छा पूरी करने में मदद की है। लेकिन, वास्तव में इस प्रजनन उपचार के बारे में लोग कम ही जानते हैं। इस प्रजनन तकनीक के बारे में मिथ और तथ्‍यों को जानना आपके लिए बहुत जरूरी है।

आईवीएफ से जुड़े कुछ तथ्‍य 

  • आईवीएफ के मामले में, शुक्राणु और अंडे अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में शरीर के बाहर एक इनक्यूबेटर में निषेचित किए जाते हैं। फिर निषेचित अंडा, जिसे भ्रूण के रूप में जाना जाता है, को वापस महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है। 
  • आईवीएफ में पांच चरण शामिल हैं- स्‍टीमुलेशन, अंडे की पुनर्प्राप्ति, गर्भाधान, भ्रूण पालन और स्थानांतरण।
  • आईवीएफ को सहायक प्रजनन के अन्य तरीकों की तुलना में सहायक प्रजनन तकनीक का सबसे प्रभावी रूप माना जाता है। हालांकि, प्रक्रिया का उपयोग करके एक स्वस्थ बच्चा होने की आपकी संभावना कई कारकों पर निर्भर करती है- जैसे कि आपकी उम्र और बांझपन का कारण। तो, यह 100 प्रतिशत सफलता दर की गारंटी नहीं देता है। 
  • यदि आप या आपके साथी में निम्न में से कोई भी स्थिति है तो आईवीएफ एक विकल्प हो सकता है जैसे- आनुवांशिक विकार, ओव्यूलेशन विकार, समय से पहले डिम्बग्रंथि विफलता, एंडोमेट्रियोसिस, गर्भाशय फाइब्रॉएड, फैलोपियन ट्यूब क्षति या रुकावट, अस्पष्टीकृत बांझपन, बिगड़ा हुआ शुक्राणु उत्पादन या कार्य, आदि। आईवीएफ 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में कम प्रजनन क्षमता में गर्भाधान की संभावना को बढ़ा सकता है।
  • आईवीएफ के बाद कुछ साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिल सकते हैं- मामूली सूजन, ऐंठन, कब्ज, स्तनों में नरमी, प्रक्रिया के तुरंत बाद तरल पदार्थ की थोड़ी मात्रा का श्राव, आदि।
  • आईवीएफ से जुड़े संभावित जोखिम और जटिलताओं में कई गर्भावस्था (यदि आपके गर्भाशय में एक से अधिक भ्रूण प्रत्यारोपित किए गए हैं), गर्भपात, अस्थानिक गर्भावस्था, डिम्बग्रंथि हाइपरस्टीमुलेशन सिंड्रोम, रक्तस्राव, संक्रमण, या मूत्राशय को नुकसान आदि समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • डॉक्टरों के अनुसार, आईवीएफ के माध्यम से जन्म लेने वाले बच्चे अन्य बच्चों की तरह सामान्य होते हैं। वास्तव में, आईवीएफ बच्चे और स्वाभाविक रूप से पैदा हुए अन्य बच्चों के बीच अंतर करना असंभव है, जब तक कि किसी को बताया न जाए। 

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