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भारत में 50 फीसदी से ज्यादा शहरी महिलाएं खून की कमी (एनीमिया) का शिकार, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Updated at: Oct 23, 2019
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Written by: Sheetal BishtPublished at: Oct 23, 2019
भारत में 50 फीसदी से ज्यादा शहरी महिलाएं खून की कमी (एनीमिया) का शिकार, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

भारत एनिमिया (खून की कमी) के मामले में दूसरे स्‍थान पर है। प्रोजेक्ट स्त्रीधन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में रहने वालीं अधकितर शहरी महिलाओं में खून की कमी पाई गई है। 

विश्व के अन्य देशों के मुकाबले भारत एनिमिया (खून की कमी) के मामले में दूसरे स्‍थान पर है। प्रोजेक्ट स्त्रीधन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में रहने वालीं अधकितर शहरी महिलाओं में खून की कमी पाई गई है। रिपोर्ट से एक और चौंका देने वाली बात सामने आई है कि ग्रामीण महिलाओं की तुलना में 50 फीसदी से अधिक शहरी महिलाएं एनीमिया का शिकार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शहरों और कस्बों की महिलाओं में ग्रामीण महिलाओं की तुलना में सूचना और स्वास्थ्य सुविधाओं की अधिक पहुंच होने के बाद भी उनमें एनीमिया का खतरा अधिक पाया गया है।  शहरी महिलाओं को एनीमिया के प्रति जागरूक करने के लिए ही प्रोजेक्ट स्त्रीधन शुरू किया गया है।

प्रोजेक्ट स्त्रीधन को लोगों से रूबरू कराने वाली स्वाति भट्टाचार्य के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के जरिए यह बताने की कोशिश की जा रही है कि जिस तरह सोने की शुद्धता और एक कीमती धातू का अपना महत्व होता है ठीक उसी तरह एक महिला के शरीर में आयरन भी एक कीमती धातु जैसा ही है। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट श्रीधन को धनतेरस के त्‍योहार के साथ लॉन्च करने की रणनीति महिलाओं को केवल सोने में ही नहीं, बल्कि आयरन में भी निवेश करने के लिए प्ररेति करने की है।

महिलाओं में एनीमिया के मुख्य कारण 

  • आयरन की कमी। 
  • संतुलित आहार और पोषण की कमी। 

प्रोजेक्ट स्त्रीधन के बारे में बताते हुए टाटा ट्रस्ट्स के  निदेशक और न्‍यूट्रीशन एक्‍सपर्ट डॉ. राजन शंकर ने बताया, “मेरे लंबे वर्षों के अनुभव में न्‍यूट्र्रीशन से जुड़ी एक बात विशेष ध्यान देने योग्य सामने आई है। दरअसल अधिकांश पोषण संबंधी मुद्दों पर सरकारी प्रयास ग्रामीण इलाकों की और केंद्रित होते हैं। जबकि शहरी क्षेत्रों में पोषण संबंधी समस्‍याओं के बारे में जागरूकता और सूचना की कमी या खराब संचार शहरी महिलाओं में खून की कमी के पीछे एक बड़ी वजह है।

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वहीं स्वाति भट्टाचार्य ने कहा, “आयरन की कमी को लेकर काफी जागरूकता की जरूरत है। क्‍योंकि अभी भी हर 2 में से 1 महिला आयरन की कमी से जूझ रही है।'' उन्होंने बताया कि इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या कहते हैं, लेकिन आप इसे कैसे और कहां कहते हैं, इससे बड़ा प्रभाव पड़ता है।

धनतेरस के मौके पर महिलाओं को धातु की ओर प्रेरित करने के बारे में बात करते हुए स्वाति ने कहा कि जब महिलाएं सोने में निवेश करने के बारे में सोचती हैं, तो स्त्रीधन अभियान उन्हें दूसरी धातु में निवेश करने के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है। कुछ ऐसा जो उनके शरीर के लिए फायदेमंद है और असली स्त्रीधन है आयरन।  

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प्रोजेक्ट स्त्रीधन की खास बात यह है कि इस अभियान के बाद देश भर के 50 से अधिक प्रमुख ज्वैलर्स इसके समर्थन में आगे आए हैं।

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