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अच्छी पढ़ाई के साथ बच्चों के लिए जरूरी है अच्छे संस्कार, निखरता है बच्चों का व्यक्तित्व

परवरिश के तरीके By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 08, 2019
अच्छी पढ़ाई के साथ बच्चों के लिए जरूरी है अच्छे संस्कार, निखरता है बच्चों का व्यक्तित्व

आजकल हर क्षेत्र में लोगों को होड़ और प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। चाहे बच्चे हो, जवान हो या बूढ़े हों, हर किसी का जीवन चुनौतियों से भरा होता है। अब वह समय है जब छोटे छोटे बच्चों पर भी अपने साथ के सब बच्चों से आगे बढ़ने और नंबर वन आने का

आजकल हर क्षेत्र में लोगों को होड़ और प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। चाहे बच्चे हो, जवान हो या बूढ़े हों, हर किसी का जीवन चुनौतियों से भरा होता है। अब वह समय है जब छोटे छोटे बच्चों पर भी अपने साथ के सब बच्चों से आगे बढ़ने और नंबर वन आने का प्रेशर रहता है। ऐसे में कैसे भी कर के बच्चे पढ़ाई तो कर लेते हैं लेकिन उनका आर्थिक विकास नहीं हो पाता है। इसलिए बढ़े बुजुर्ग कहते हैं कि बच्चों को कुछ दें या न दें उन्हें संस्कारित अवश्य करें। उन्हें संस्कार अवश्य दें। इसके पहले माता पिता को खुद संस्कारवान होना चाहिए। समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और बुराइयों से उन्हें परिचित करा उनसे दूर रहने की नसीहत देनी चाहिए। इसके साथ ही साथ बच्चों,छात्र,छात्राओं में समय पालन,अनुशासन का पाठ भी पढ़ाना चाहिए। 

केवल विद्यालयों में बच्चों के बीच शिक्षा,अनुशासन व समयबद्धता से ही संस्कार नहीं आते बल्कि समाज से भ्रष्टाचार, बुराई का खात्मा करना और समाज मे सृजनात्मक कार्य को बढ़ावा देना भी एक संस्कार ही है। आज जिस तरह इंटरनेट सेवा और मोबाइल ने हमारे समाज को पूरी तरह से जकड़ लिया है, उस परिस्थिति में बच्चों को नैतिक शिक्षा अनिवार्य हो गयी है। पेरेंट्स को बच्चों के विकास के लिए सिर्फ स्कूलों पर ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि उससे अलग होकर काम करना चाहिए। आज हम आपको बच्चों के बेहतर विकास के लिए कुछ जरूरी टिप्स बता रहे हैं।

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बच्चों का अनुशासित होना जरूरी है। इससे उनका व्यक्तित्व निखरता है और विकास कार्य मे उनकी भागीदारी सराहनीय होती है। इसके लिए अभिभावक और शिक्षकों को जागृत होने पड़ेगा।
बच्चों में संस्कार देने के लिए सर्वप्रथम हमे सकारात्मक सोच को जन्म देना पड़ेगा। इससे बच्चों के परिणाम भी बेहतर होते हैं और बच्चा संस्कार भी अच्छी तरह से सिख पाता है।
स्कूलों में मोरल शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए। प्रत्येक बच्चों को इसकी शिक्षा अनिवार्य है। इससे समाज मे फैली विषमता भी दूर होता है।
छात्र छात्राओं को पढ़ाई के मामले में आजादी मिलनी चाहिए। रुचि के अनुसार बच्चों को विषयों का चयन करने की आजादी मिलनी चाहिए। इससे बच्चों का चतुर्दिक विकास होता है।

समाज मे ऊंच,नीच ,लड़का ,लड़की का भेद भाव नहीं रहना चाहिए। इससे समाज में विषमता फैलती है और समाज का विकास अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे में सामाजिक स्तर पर इसे चुनौती लेनी होगी और इस विषमता को दूर करने ही समरस समाज की कल्पना बन सकता है। जहां संस्कार ही संस्कार दिखाई देने लगेगा।

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