महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे

Updated at: Jan 21, 2014
महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे

महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को समझने को इससे निपटने के लिए जरूरी है कि आप महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को जानें।

Anubha Tripathi
मानसिक स्‍वास्‍थ्‍यWritten by: Anubha TripathiPublished at: Jan 21, 2014

अगर आप महिला है और तनाव, चिंता या अन्य मानसिक समस्या से गुजर रहीं है तो आप अकेली नहीं है। ज्यादातर महिलाएं अपनी निजी और कामकाजी जीवन को लेकर बहुत परेशान रहती हैं। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या ज्यादा होती है।

महिलाओं में होने वाली कई ऐसी मानसिक समस्या है जो पुरुषों को नहीं होती है। इसकी मुख्य वजह है महिलाओं पर घर और बाहर की जिम्मेदारी होना जिसकी वजह से वे बहुत ज्यादा तनाव में आ जाती हैं। इसके अलावा बहुत सारे मनोवैज्ञानिक और जैविक कारण होते हैं जिसकी वजह से महिलाएं मानसिक रुप से परेशान रहती हैं। हर महिला को फिट रहने के लिए शारीरिक और मानसिक रुप से फिट रहना बहुत जरूरी होता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि महिलाएं समझ ही नहीं पाती कि आखिर वे क्यों मानसिक रुप से परेशान है जिसकी वजह वे उनके स्वभाव और व्यक्तित्व में काफी बदलाव देखा जाता है। आइए जानें महिलाओं में आखिर मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे क्या हैं-

तनाव

बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाएं बड़े पैमाने पर तनाव की शिकार हो रही हैं इनमें कामकाजी महिलाओं की तादाद कहीं ज्यादा है। एक अध्ययन के मुताबिक, घरेलू महिलाओं की तुलना में कामकाजी महिलाएं तनाव का दोगुना शिकार होती हैं। यह अध्ययन एक मनोचिकित्सक ने किया है। डॉ. उदैनिया के मुताबिक, तनाव की मूल वजह असुरक्षा की भावना है। घरेलू महिलाओं को जहां केवल घर के वातावरण से तनाव होता है, वहीं कामकाजी महिलाओं में तनाव घरेलू एवं बाहरी दोनों कारणों से होता है। यही वजह है कि वह अधिक तनाव में रहती हैं।

चिंता

महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा कहीं अधिक चिंताग्रस्त रहती हैं। घर व बाहर की जिम्मेदारी संभालने के बीच महिलाओं के सामने कभी-कभी ऐसी स्थिति आ जात है जब थकान के कारण बहुत ज्यादा चिंताग्रस्त हो जाती है। चिंता ग्रस्त होना कोई बड़ी समस्या नहीं है लेकिन कई बार इसके कारण महिलाएं नाकारात्मक ऊर्जा से भर जाती है और अपने पर नियंत्रण नहीं रखपाती हैं।

डिमेंशिया

ज्यादातर महिलाएं डिमेंशिया का शिकार होती हैं। महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ ही इसका खतरा बढने लगता है। डिमेंशिया में दिमाग के कुछ खास सेल्स नष्ट होने लगती हैं। इन सेल्स के नष्ट होने से दिमाग के भीतर के अन्य सेल्स आपस में संचार नहीं कर पाते, जिससे सोचने की शक्ति कम होती है, व्यवहार और अनुभूतियों में दिक्कत आती है। इस बीमारी में रोगी रोज के काम नहीं कर पाता। खाना खाने का तरीका उसे याद नहीं रहता, कपड़े नहीं पहन पाता, नहा नहीं पाता आदि।

इटिंग डिस्‍ऑर्डर

यह समस्या महिलाओं में होती है। कम उम्र की महिलाएं इस समस्या से ज्यादा प्रभावित होती हैं। यह एक तरह की बीमारी होती है जिसकी वजह महिलाओं को अपने नियमित डायट में कई तरह की परेशानी होती है। इसमें महिलाएं या तो बहुत थोड़ा सा खाना खाती हैं या ओवरईटिंग करती हैं। तनाव व चिंता के कारण महिलाओं में यह समस्या देखने को मिलती है।

बॉडर्रलाइन पर्सनालिटी डिस्‍ऑर्डर

यह एक प्रकार की दिमागी बीमारी होती है जिसमें दिमाग काम करना बंद कर देता है। अचानक गुस्सा आना, चिड़चिड़ा होना इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं। इस मानसिक समस्या की वजह से मूड,स्वभाव और रिश्तों में बदलाव होते हैं। इस बीमारी से ग्रस्त लोग असमंजस की स्थिति में रहते हैं।

 

 

महिलाओं को मानसिक रुप से स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि वे इन मानसिक मुद्दों के बारे में जानें। इन समस्याओं को दूर करने के लिए इन मुद्दों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।

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