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मैनोरेक्सिया का बढना

लेटेस्ट By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 17, 2012
मैनोरेक्सिया का बढना

अक्सर महिलाएं खान-पान के विकार से जूझती हैं, लेकिन पुरूष इस बात को स्वीकार करने में हिचकिचाते हैं।

menorexia ka badhnaवर्तमान रुझान इस बात को दर्शातें है कि पुरूषों में खाद्य विकार महिलाओं की तुलना में अधिक होंगे, पुरूषों में पिछले कई सालों से एनोरेक्सिया ( खान-पान का विकार ) की संख्या बढ़ रही है। इसे मैनोरेक्सिया कहा गया, इसमें खुद को भूखा रखकर शरीर को पतला करने का चलन है। पुरूषों में पतला दिखने के दबाव के कारण एनोरेक्सिया और ब्यूलीमिया जैसे खान-पान के विकार सामान्य हो गए हैं।

इंग्लैंड में 228 अस्पतालों के दाखिले के आंकडों के अनुसार, पिछले दशक की तुलना में पुरूषों और लडकों में खान-पान के विकार की वजह से गंभीर उपचार की जरूरत तीन गुना बढी है। इन आंकड़ों ने दर्शाया कि यह दबाव शरीर को एक पूर्ण आकार देने के लिए अपनाए गए। यह प्रयास आमतौर पर पुरूष हस्तियां और मॉडल की छवि को देखकर अपनाए जाते हैं। किशोरों में सिक्स पैक एब्स की सनक या हंकी बनने का प्रमुख कारण लडंकियों का ध्यान आकर्षि‍त करना होता है।


अक्सर महिलाएं खान-पान के विकार से जूझती हैं, लेकिन पुरूष इस बात को स्वीकार करने में हिचकिचाते हैं। हैरानी की बात यह है कि, 14 से 18 साल उम्र के किशोरों के अस्पतालों में पर्याप्त दाखिले थे। इसके अलावा, दस में से एक लडके को भी सूचित किया गया जिनको ब्यूलीमिया ने नुकसान पहुंचाया था। इस प्रवृत्ति की ब्रिटेन के लोगों में भारी वृद्धि हुई थी, कथिततौर पर 1.6 मिलियन ब्रिटिश पुरूषों में हर पांचवां आदमी खान-पान के विकार से पीडित था।


एनोरेक्सिया एक सिंड्रोम है जो कि कम खाने और ज्यादा व्यायाम की तरह वजन को कम बनाए रखने में जितना संभव है मदद करता है। डॉक्टरों ने कहा कि इस प्रवृत्ति के बढने के प्रमुख कारण अभी तक अज्ञात हैं, लेकिन पुरूष हस्तियां, फैशन के प्रति रूझान और सामाजिक नेटवर्किंग पोर्टल के कारण खान-पान के विकार पुरूषों में बढे हैं। इसके बढने के अन्य कारण, घटनाओं के कारण तनाव जैसे - परीक्षा या रिश्तों के मुद्दे हैं। तनाव, व्यक्तियों के बीच कम आत्म सम्मान और असामाजिक अनुभव करना भी है।  



विशेषज्ञों ने यह रेखांकित किया है कि अगर प्रारंभिक अवस्था में इसकी पहचान हो जाए तो मैनोरेक्सिया जैसी स्थिति का सफलतापूर्वक इलाज है। यदि नहीं, तो पीडित और अधिक दुख सहता है।

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