मिजिल्स रूबेला हर साल हजारों बच्चों की लेता है जान, जानें इसके लक्षण, कारण व इलाज

Updated at: Aug 15, 2018
मिजिल्स रूबेला हर साल हजारों बच्चों की लेता है जान, जानें इसके लक्षण, कारण व इलाज

खसरा, जिसे अंग्रेजी में मिजिल्स रूबेला कहते हैं, बच्चों को होने वाली मुख्य बीमारियों में से एक है। 

Rashmi Upadhyay
अन्य़ बीमारियांWritten by: Rashmi UpadhyayPublished at: Aug 15, 2018

खसरा, जिसे अंग्रेजी में मिजिल्स रूबेला कहते हैं, बच्चों को होने वाली मुख्य बीमारियों में से एक है। यह मुख्य रूप से नाक, सांस की नली और फेफड़ों का एक संक्रमण रोग है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैलने वाला रोग है। वसंत ऋतु में इस रोग के फैलने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। बीमार व्यक्ति के छींकने से इस बीमारी के फैलने का डर होता है। इस कारण घर में किसी एक को खसरा होने से अन्य सदस्य को भी खसरा होने के चांसेस होते हैं। यह बीमारी खासकर बच्चों को होती है लेकिन ये बड़ों में भी फैलती है। इससे बचने के लिए बच्चों को बचपन में ही खसरे का टीका लगवा देना चाहिए। खसरे के लक्षणों में लाल रंग के चकत्‍ते, आंखों से पानी आना, कफ, सर्दी-खांसी शामिल है। इसमें खूब तेज बुखार होता है।

पांच वर्ष आयु तक के बच्चों की मौत का एक बड़ा कारण खसरा होता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भारत में वर्ष 2015 में 49,200 बच्चों की मौत खसरा से हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान से बाल मृत्यु दर में भारी कमी आएगी। रूबेला बीमारी से वायरल इन्फेक्शन होने के अलावा इसका सबसे अधिक प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है। इस बीमारी से गर्भपात, मृत या अपंग बच्चे के जन्म का खतरा रहता है। इसलिए इसका निपटारा टीके से भी किया जाता है।

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मिजिल्स रूबेला होने के कारण

मिजिल्स रूबेला यानि कि खसरा आम तौर पर औसत दर्जे की बीमारी का कारण बनता है। छोटे बच्चों में, जटिलताओं में मध्य कान का संक्रमण (ओटिटिस मीडिया), निमोनिया, क्रूप और दस्त शामिल हैं। वयस्कों में, बीमारी की और भी गंभीर होने की संभावना हो जाती है। पुराने रोगियों के लिए खसरे से संबंधित न्यूमोनिया के लिए अस्पताल के इलाज की आवश्यकता असामान्य नहीं है।

मिजिल्स रूबेला के परिणाम

खसरे के सबसे गंभीर परिणाम दुर्लभ हैं। हर 1,000 मामलों में से 1 से कम में, खसरा दौरों, कोमा और मौत के तत्काल जोखिम, और मानसिक मंदता या मिर्गी के लंबी अवधि के जोखिम के साथ, इन्सेफेलाइटिस (मस्तिष्क का संक्रमण) का कारण बनता है। सबऐक्यूट स्क्लैरोज़िंग पैनिन्सेफेलाइटिस एक असाधारण दुर्लभ लंबे खसरा इन्सेफेलाइटिस का रूप है जो मस्तिष्क क्षति का कारण बनता है। असामान्य स्थितियों में, खसरा सीधे पाचन अंगों (जिगर सहित), हृदय की माँसपेशी या गुर्दे पर भी हमला कर सकता है। एक गर्भवती औरत जो खसरे से संक्रमित है को समयपूर्व प्रसव, गर्भपात, या एक जन्म के समय कम भार वाले शिशु के प्रसव का बढ़ा हुआ खतरा होता है।

मिजिल्स रूबेला के लिए घरेलू नुस्खे

  • खसरा से उपचार के लिए रोगी को सबसे पहले ताजे फलों का जूस देना चाहिए। हर थोड़ी-थोड़ी देर में जूस पीने से खसरे के लक्षण में कमी देखी जा सकती है। खसरे के दौरान बच्चों को भूख नहीं लगती है। ऐसे में खाने की जगह उन्हें जूस पीलाते रहना चाहिए। इससे उनका शरीर में पानी की कमी भी नहीं होगी। 
  • खसरे से ग्रस्त लोगों को खुले और हवादार कमरे में रखना चाहिए। कमरे में जलने वाली लाइट उनकी आंखों पर काफी विपरीत असर डालती हैं। इसलिए उन्हें किसी ऐसे कमरे में रखें जहां प्राकृतिक रुप से रोशनी आए जिससे लाइट जलाने की जरूरत ही ना पड़ें।
  • खसरा के लिए नीम की पत्‍तियों से बेहतर इलाज कोई नहीं होगा। यह एंटीसेप्‍टिक और एंटीवायरल होता है। पानी में इसकी पत्‍तियों को डालकर गर्म करें और उस पानी से निलहाएं। मरीज के बिस्तर में भी नीम की पत्तियां बिछा दें। इससे खसरे की खुजली से आराम मिलता है और रैशेज ठीक हो जाते हैं।
  • खसरे की बीमारी में मुलेठी रामबाण उपचार है। मुलेठी के जड़ों का पावडर शहद के साथ मिलाकर बीमार व्यक्ति को समय-समय पर आधा-आधा चम्मच करके खिलाएं। मरीज को फायदा होगा।
  • खसरे से बीमार व्यक्ति को इमली के बीज के पावडर में हल्दी बराबर मात्रा में मिलाकर खिलाएं। रोजाना मरीज को 350 ग्राम से 425 ग्राम ये मिश्रण खिलाने से रोगी की बीमारी में तुरंत फर्क देखने को मिलेगा।
  • घर में पड़ी लहसुन खसरा के लिए काफी कारगार दवा मानी जाती है। लहसुन को शहद के साथ पीस कर रोजाना मरीज को खिलायें। कुछ ही दिनों में असर दिखना शुरू होगा।

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