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महिलाओं में रजोनिवृति की उम्र

सभी By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 04, 2012
महिलाओं में रजोनिवृति की उम्र

ज़्यादातर महिलाओं में 45 साल के बाद ही ये प्रक्रिया शुरू हो जाती हैं लेकिन बहुत सी महिलाओं को रजोनिवृत्ति देर से होती हैं।

साधारणत: कन्याओं को 14 या 17 की आयु में मासिकधर्म प्रारंभ हो जाता है, जिसका अर्थ है कि कन्या गर्भधारण के योग्य हो गई है। तब से लेकर 45 से 50 वर्ष की आयु तक साधारणतया प्रत्येक 28वें दिन मासिकधर्म होता रहता है। प्रत्येक मास में एक बार डिंबग्रंथि से एक डिंब परिपक्व होकर बाहर निकलता है।

 



रजोनिवृत्ति हर महिला को अलग-अलग तरह से प्रभावित करती हैं। यह जिन्दगी का अहम हिस्सा हैं रजोनिवृत्ति उस स्थिति को कहते हैं जब आपके पीरियड्स होने बन्द हो जाते हैं और ओवरीज़ एग रिलीज़ करना बन्द कर देती हैं। ज़्यादातर महिलाओं में 45 साल के बाद ही ये प्रक्रिया शुरू हो जाती हैं लेकिन बहुत सी महिलाओं को रजोनिवृत्ति देर से होती हैं। कई बार यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है, या कई बार यह एक बार में ही हो जाती हैं।



जिस स्त्री की दिनचर्या नियमित होती है, यानी आहार-विहार, खान-पान तथा चरित्र ठीक रहता है। शरीर निरोग व स्वस्थ रहता हो, उस स्त्री को बगैर किसी परेशानी के अचानक या धीरे-धीरे सामान्य तरीके से रजोनिवृत्ति हो जाती है। धीरे-धीरे का तात्पर्य है, प्रतिमाह के रक्त स्राव में कमी होते जाना और एक दिन पूरी तरह से बंद हो जाना। कुछ महिलाओं में 40 वर्ष तक रजोरोध हो जाता है, इसे 'काल पूर्व रजोरोध' कहा जाता है।

 


जिस स्त्री का मासिक अनियमित हो, प्रसवकाल के समय उचित देखभाल न की गई हो, खान-पान अनियमित या जो चरित्र के प्रति लापरवाह रही हो, उसे रजोनिवृत्ति होते समय कई परेशानियों से गुजरना पड़ता है।


रजोनिवृत्ति के लक्षण

रजोनिवृत्ति होने पर महिला के शरीर में शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के पविर्तन हो जाते हैं। ज्यादातर महिलाओं को ये परिवर्तन इतनी धीमी गति से होते हैं कि कोई असुविधा नहीं होती, किंतु कुछ महिलाओं को विशेष कष्ट होता है। रजोनिवृत्ति को अंग्रेजी में मेनोपॉज़ कहते हैं, जिसका अर्थ 'जीवन में परिवर्तन' है। यह वास्तव में महिला के जीवन का पविर्तनकाल होता है। हर महिला में इसके लक्षण अलग-अलग होते है।

 

  • योनि से अनियमित रक्तस्राव
  • गरमाहट लगना या पसीना आना 
  • योनि की दीवारों का रूखापन
  • बार बार पेशाब आना 
  • मूत्र निष्कासन के समय जलन
  • नींद में व्यवधान
  • वजन बढ़ना
  • मूड में बदलाव आना, झुंझलाहट, थकावाट, स्मरण शक्ति का घटना
  • हड्डियों का कमजोर होना

 


रजोनिवृत्ति होने के समय शरीर में कुछ परिवर्तन होते हैं, जिनसे कुछ महिलाएं परेशान व भयभीत हो जाती हैं, जबकि रजोनिवृत्ति होना एक स्वाभाविक घटना होती है। किसी-किसी महिला को देरी से भी रजोनिवृत्ति होती है। कुछ में देरी से रजोनिवृत्ति होने के पीछे गंभीर कारण भी हो सकते हैं जैसे- गर्भाशय में सूजन, गांठ होना, कैन्सर होना आदि।



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