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मधुमेह रोगी के लिए विटामिन डी है ज़रूरी

डायबिटीज़
By Anubha Tripathi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 24, 2012
मधुमेह रोगी के लिए विटामिन डी है ज़रूरी

मधुमेह को कंट्रोल करने के लिए रोगियों को अपने खाने में नियमित रुप से विटामिन डी को शामिल करना चाहिए।

madhumeh rogi ke liye zaroori hai vitamin D

मधुमेह को कंट्रोल करने के लिए रोगियों को अपने खाने में नियमित रुप से विटामिन डी को शामिल करना चाहिए। यह मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करता है। अक्सर रोगी मधुमेह को कंट्रोल करने के लिए कई तरह के नुस्खे अपनाते हैं। लेकिन उसका कोई फायदा नहीं होता है। चिकित्सकों का भी मानना है कि विटामिन डी की कमी के चलते लाखों लोगों के टाइप 2 डायबिटीज की चपेट  में आने का खतरा हो सकता है। विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है धूप। सर्दियों के दिनों में आप आसानी से धूप सेंक सकते हैं। इससे आपकी डायबिटीज कंट्रोल रहेगी।

 

विटामिन डी और मधुमेह

 

विटामिन डी की कमी से लोगों में इंसुलिन प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती   है। जिसका मतलब है कि वे खाद्य पदार्थों से ग्लूकोज को उर्जा में तब्दील करने के लिए इंसुलिन का ठीक तरीके से प्रयोग नहीं कर सकते। टाइप 2 मधुमेह उस समय होता है जब शरीर में पर्याप्त मात्रा मे इंसुलिन नहीं बनता या जब कोशिकाओं में इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। इसके अलावा विटामिन डी की कमी से हाइपरग्लाकइसिमया (लो बल्ड शुगर ) की समस्या भी हो सकती है।

 

मधुमेह में विटामिन डी

 

  • मधुमेह में विटामिन डी लेने से इसके बढ़ने का खतरा कम हो जाता है।
  • खून में विटामिन डी होने से डायबिटीज की चपेट में आने का खतरा 24 फीसदी तक घट जाता है।  
  • विटामिन डी के स्रोत सूर्य के प्रकाश से मधुमेह रोग के ठीक होने की भी संभावना रहती है।
  • विटामिन डी से रोगियों में ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रह ता है।
  • विटामिन डी से मधुमेह के अलावा हृदय रोग, रक्त चाप जैसी बीमारियों से बचने में भी मदद मिलती है।
  • मधुमेह रोगियों में होने वाली कई समस्याओं का ईलाज विटामिन डी के स्रोतों के जरिए किया जा सकता है।
  • मधुमेह रोगियों को सुबह की  धूप में थोड़ी देर बैठना चाहिए।
  • कई रिसर्च में पाया गया है कि जो लोगों ने नियमित रुप से विटामिन डी लेते हैं उनमें मधुमेह का खतरा कम होता है।

 


विटामिन डी की कमी से होने वाले अन्य रोग

 

  • कोलाजन फाइबर्स (Collagen fibers)  की कमजोरी
  • क्षय रोग
  • सर्दी जुकाम बार-बार होना
  • शारीरिक कमजोरी
  • खून की कमी
Written by
Anubha Tripathi
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMay 24, 2012

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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