Subscribe to Onlymyhealth Newsletter
  • I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.

लिव इन रिलेशन और शादी

सभी By अनुराधा गोयल , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 14, 2012
लिव इन रिलेशन और शादी

आज का युवावर्ग लिव-इन रिलेशन का समर्थक है। युवावर्ग शादी-शुदा जिंदगी जीने से बेहतर लिव इन रिलेशन को मानता है। लेकिन लिव इन रिलेशन और शादी में बहुत फर्क है। आइए जानें लिव इन रिलेशन और शादी के फर्क के बारे में।

Quick Bites
  • शादी को लिव-इन के मुकाबले अधिक सामाजिक स्‍वीकार्यता
  • युवाओं में बढ़ता देखा जा सकता है लिव-इन के प्रति रुझान
  • लिव-इन रिलेशनशिप में हमेशा बनी रहती है असुरक्षा की भावना
  • शादी आज भी लिव-इन के मुकाबले अधिक पसंद किया जाता है

live-in-relationship and marriage

भारतीयों की सोच बदल रही है। रिश्‍तों को लेकर भी और उसे निभाने के परंपरागत तरीकों को लेकर भी। कल तक जो वर्जनाएं थीं, आज वह स्‍वतंत्रता है। आजाद खयाली है और साथ ही अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने का हक भी। शादी भी ऐसी ही एक परंपरा है, जिसे लेकर छोटे-बड़े शहरों में रहने वाले युवाओं की सोच बदल रही है। अब साथ रहने के लिए समाजिक स्‍वीकृति और सहमति की अनिवार्यता को लगातार चुनौती मिल रही है। अब युवा साथ रहने का फैसला करते हैं, तो अपनी मर्जी से। और इस रिश्‍ते को वे हर बंधन से आजाद मानते हैं।

 

कई युवा मानते हैं कि किसी के साथ रहना उनका निजी फैसला है। और इसके लिए उन्‍हें समाज को दिखावा करने की जरूरत नहीं है। उनकी नजर में लिव-इन में रहना और शादी करके रहने में कोई मूलभूत अंतर नहीं। एक में अंतर्मन से एक दूजे के साथ रहने का फैसला किया जाता है तो दूसरे में दुनिया के सामने 'दिखावा' किया जाता है।

 

परन्‍तु भारतीय परिवेश में अभी भी लिव-इन को लेकर कई पूर्वाग्रह हैं। ये पूर्वाग्रह कानूनी और सामाजिक दोनों जगह देखे जाते हैं। लिव-इन में रहने वालों की नजर में भले ही इन दोनों में कोई अंतर न हो, लेकिन वास्‍तविकता इससे जरा अलग है।

 

 

लिव इन रिलेशन और शादी में अंतर

 

[इसे भी पढ़ें - क्या भारत में संबंधों के मायने बदल रहे हैं]

 

 


लिव इन रिलेशन

कई युवा लिव-इन को शास्‍त्रों में वर्णित गंधर्व विवाह का आधुनिक रूप कहते हैं। गंधर्व विवाह वह विवाह होता था, जिसमें स्‍त्री-पुरुष प्रकृति को साक्षी मानकर स्‍वयं को पति-पत्नी के रूप में स्‍वीकार कर लेते थे। इस विवाह में सामाजिक सहमति की आवश्‍यकता नहीं होती थी। लिव-इन में भी स्त्री और पुरुष का बिना विवाह किए सिर्फ आपसी सहमति से एक साथ रहते हैं।

महानगरों में लिव-इन रिलेशनशिप की शुरुआत शिक्षित और आर्थिक तौर पर स्वतंत्र कई युवा इस तरह के संबंधों को परंपराग‍त रिश्‍तों के मुकाबले  तरजीह देते हैं। इस रिश्ते को दूसरे पक्ष की सहमति के बिना कभी भी समाप्त किया जा सकता है। किसी विवाहित पुरुष और अविवाहित महिला या विवाहित महिला एवं गैर शादी शुदा पुरुष के बीच भी लिव-इन रिलेशनशिप सुनने में आया है ।


शादी

शादी न सिर्फ दो व्यक्तियों का बल्कि दो परिवारों का भी मिलन है। शादी में लड़का-लड़की को सामाजिक तौर एक सूत्र में बंधने की मान्यता प्राप्त होती है। विवाह में स्त्री व पुरुष दोनों का सम्मान व प्रतिष्ठा निहित है। शादी को कानूनी और सामाजिक सुरक्षा भी मिलती है। वैश्‍वीकरण के इस दौर में भले ही रिश्‍तों को नयी सोच की बयार बह रही हो, लेकिन बावजूद इसके शादी आज भी लिव-इन‍ रिलेशन से ज्‍यादा स्‍वीकार्य और चलन में है। भारतीय आज भी सामाजिक दायरे में रहना और उसकी मान्‍यताओं को स्‍वीकार करने में अधिक व‍िश्वास रखते हैं।

 

[इसे भी पढ़ें - शादी से पहले के संबंध]

 

लिव इन रिलेशन और शादी के कारण


लिव इन रिलेशन

लिव-इन रिलेशन में रहने के कई कारण है। कुछ जोड़े शादी से पहले आर्थिक सुरक्षा के लिए लिव-इन रिलेशन में रहते हैं। आमतौर पर शादी में भरोसा न करने वाले ही लिव-इन रिलेशन में रहते हैं। इन लोगों के लिए शादी करके रहना और लिव इन में रहना एक ही सिक्के के दो पहलू है। कुछ लोग अपनी इच्छा से जीना चाहते है, लेकिन एक साथी की उन्हें हमेशा जरूरत होती है, ऐसे लोग भी लिव इन रिलेशन के समर्थक होते है।

 

शादी

विवाह एक साथ कई जिंदगियों को जोड़ता है। इसमें दो परिवारों का मिलन होता है, यह एक प्रतिष्ठित संस्था है। यह सबसे स्थायी संबंध है।

 

लिव इन रिलेशन और शादी में आने वाली समस्याएं


लिव इन रिलेशन

लिव इन रिलेशन में लड़कियां व लड़के दोनों ही असुरक्षा की भावना से ग्रस्त रहते हैं। दोनों को हर समय यह लगता है कि पता नहीं दूसरा साथी कब बीच राह में छोड़ दे। ये रिश्ता अन्य लोगों से काटता है। ऐसे संबंधों में हमेशा तनाव की स्थिति बनी रहती है। लिव-इन रिलेशनशिप एक साथ रहने का ऐसा कॉन्ट्रैक्ट है जो कि दोनों पक्षों द्वारा रोज रिन्यू किया जाता है। ऐसे संबंध आज भी समाज में पूरी तरह से स्वीकार्य नहीं है, जिससे कई सामाजिक समस्याएं तक खड़ी हो जाती हैं। ऐसे में प्रीमेरिटल संबंध अधिक बनते है।

 

[इसे भी पढ़ें - शादी के पहले साल में होने वाली समस्याएं]

 

शादी

शादी जैसे संबंध में किसी प्रकार की खटास होने पर तलाक तक की नौबत आ सकती हैहै। पति-पत्नी में अनबन से बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ जाता है। दोबारा विवाह भारतीय समाज में अभी भी आसान नहीं है। ज्यादातर भारतीय विवाह महज इसलिए टिके रहते हैं कि लोग बच्चों की खातिर अकेले रहने से डरते हैं।

 

लिव इन रिलेशन और शादी के लाभ


लिव इन रिलेशन

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों में बेवफाई, धोखा और व्याभिचार की शिकायत नहीं रहती। जो लोग लंबे समय तक इस रिश्तें से उब गए हैं वे शादी के रिश्ते में बंध सकते हैं। दोनों पक्षों की कुछ नैतिक जिम्मेदारियां निर्धारित है लेकिन दवाब किसी चीज का नहीं। यह संबंध अधिक बोझिल नहीं होता। यह संबंध समाज और कानून द्वारा नियंत्रित-संरक्षित है। इस संबंध में कोई बंधन नहीं, दोनों साथी अपने निजी जीवन में आजाद रहते है।


शादी

विवाह में स्त्री व पुरुष दोनों का सम्मान व प्रतिष्ठा निहित है। स्त्री और पुरूष दोनों की सुरक्षा इसी में है। इसमें बच्चों का भविष्य सुरक्षित है। एक बार विवाह विफल होने पर लोग, आज दोबारा शादी भी कर रहे हैं। इसमें परिवार भी साथ-साथ रहता है और बच्चों की परवरिश में अधिक मदद मिलती है।

 

इस तरह से लिव इन रिलेशन और शादी दोनों के नकारात्मक और सकारात्मक पहलू है। दोनों तरह के संबंधों में ही तनाव, असुरक्षा की भावना, दवाब रहता है और दोनों तरह के संबंधों में आजादी,खुशी और आर्थिक सुरक्षा रहती  है।

 


Read More Article on Shaadi-Aur-Sex in hindi.

Written by
अनुराधा गोयल
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागSep 14, 2012

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Trending Topics
More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK