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चिकनगुनिया वायरस जीवन चक्र

चिकनगुनिया
By अनुराधा गोयल , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 05, 2013
चिकनगुनिया वायरस जीवन चक्र

मादा एडिस मच्छर के काटने से पीडि़त व्यक्ति के रक्त में इस वायरस का संचरण होता है। ये वायरस स्वतंत्र कोशिकाओं के माध्यम से प्लाज्मा झिल्ली को नष्टक करने का काम करता है।

चिकनगुनिया का मच्‍छरहर वायरस के जीवन की अलग-अलग स्टेज होती है। ठीक उसी तरह से चिकनगुनिया वायरस का भी पूरा कालचक्र होता है। अपने इसी चक्र से ये वायरस मनुष्य के शरीर पर दुष्प्रभाव डालता है।

मनुष्य जब भी चिकनगुनिया वायरस का इलाज करवाता है, तो उसे इस वायरस के पूरे चक्र को नष्ट करना होता है। चिकनगुनिया वायरस अलग-अलग स्टेज में आकर मनुष्य के शरीर पर कुप्रभाव छोड़ता है। आइए जानें आखिरकार इस वायरस के जीवन चक्र में क्या–क्या चीजें शामिल है। किन-किन रूपों में चिकनगुनिया वायरस मानव के शरीर में पनपता है।

 

आरंभिक संक्रमण

मादा एडिस मच्छर के काटने से पीडि़त व्यक्ति के रक्त में इस वायरस का संचरण होता है। ये वायरस स्वतंत्र कोशिकाओं के माध्यम से प्लाज्मा झिल्ली को नष्टक करने का काम करता है।

सेलुलर वायरस स्टेज

ये वायरस सेल में से साइटोप्लांज्म (cytoplasm) में प्रवेश कर नाभिक के जरिए आगे बढ़ते हैं। इसके बाद शरीर में जमा आनुवंशिक सामग्री में प्रवेश करते है। जब ये वायरस कण नाभिक के अंदर अपना जीनोम छोड़ देते हैं तो आसपास की अन्य कोशिकाएं भी इससे संक्रमित हो जाती है और यह चक्रीय प्रक्रिया एक बार पूरी होने के बाद बार-बार चलती रहती है।


संक्रामक स्टेज  एक बार जब वायरस व्यक्ति के शरीर में आ जाता है तो ये रक्त के जरिए शरीर को संक्रमित करता रहता है। चिकनगुनिया वायरस रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैलता रहता है।

मच्छर के शरीर में

जब एक मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो चिकनगुनिया वायरस के कण उस मच्छर में मौजूद हो जाते हैं ऐसे में जब वही मच्छर हेल्दी व्यक्ति को काटता है, तो वह व्यक्ति भी चिकनगुनिया का शिकार हो जाता है। यह प्रकिया निरंतर चलती रहती है।

चिह्न और लक्षण

सामान्यत: चिकनगुनिया में बॉडी का तापमान उच्च रहता है। जोड़ों में दर्द, सिर दर्द, मिचली, उल्टियां, ठंड लगना, और चकत्ते आदि चिकनगुनिया के लक्षण हैं साथ ही जीभ बेस्वाद हो जाती है। लेकिन इन बीमारियों के साथ ही चिकनगुनिया किसी भी अन्य बीमारी से घातक बीमारी है।

परीक्षण

चिकनगुनिया वायरस के लक्षणों को जांचने के लिए सीवीसी, ब्लड कल्च़र, आईजीएम और आईजीजी टेस्ट करवाएं जाते है।

 

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Written by
अनुराधा गोयल
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागAug 05, 2013

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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