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8 घंटे से अधिक नींद बन सकती है आलस और बीमारियों की वजह, ज्‍यादा या कम सोना दोनों ही है घातक

अन्य़ बीमारियां By शीतल बिष्ट , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 10, 2015
8 घंटे से अधिक नींद बन सकती है आलस और बीमारियों की वजह, ज्‍यादा या कम सोना दोनों ही है घातक

क्‍या आप भी शनिवार या रविवार की सुबह देर से उठना और दिन में भी दो तीन घंटे सोना पसंद करते हैं। शायद आप भी इस तरह भरपूर सोना अच्‍छा मानते होंगे, लेकिन वास्‍तव में यह आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए उतना अच्‍छा भी नहीं है। बहुत

हर रविवार को जब किसी ऑफिस या बच्‍चों के स्‍कूल की छुट्टी होती है, तो आप में से बहुत से लोग देर तक सोत होंगे। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि ज्‍यादा सोला या फिर कम सोना, दोनों ही सेहत के लिए खतरनाक है। कहा जा सकता है कि ज्यादा या कम सोना मतलब, चैन खोना। आप यकीन करें या नहीं, लेकिन ज्यादा देर तक सोने से भी आपका थकान और सुस्‍ती महसूस करते हैं, जैसा कि आपको नींद पूरी न होने पर लगता है। 

इस बात से यह साफ है कि सोने के मामले में संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। कुछ अध्‍ययनों में शोधकर्ताओं का मानना है, हालांकि यह बात अब तक साफ नहीं हुई है कि कम और ज्यादा सोने वाले लोग एक जैसी समस्याओं से क्यों जूझते हैं, लेकिन शोध इस बात को चुनौती दे सकता है कि 7-8 घंटे से ज्यादा की नींद लेने से सेहत अच्छी और शरीर स्वस्थ रहता है।

कम सोने के नुकसान

कम सोने के कई नुकसान हैं, कम सोना सीधे-सीधे आपकी दिनचर्या और कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। इसलिए आमतौर पर आज के समय में पर्याप्त नींद मिलना भी एक लक्जरी बन गया है। देखा जाए, तो वयस्कों को रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। अगर आप लगातार कम नींद ले रहे हैं, तो आगे चलकर यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। जिसमें मोटापा, तनाव और अन्‍य कई समस्‍याएं शामिल हैं। 

अमेरिका के 'नेशनल स्लीप फाउंडेशन' की सलाह है कि वयस्क लोगों को हर रात 7 से 8 घंटे तक सोना चाहिए। एक अन्‍य शोध के अनुसार, रोज अच्‍छी नींद लेने के साथ 20 मिनट तक कसरत करने से अचानक मौत का खतरा 16 से 30 प्रतिशत तक घट जाता है। इसलिए लंबा जीवन जीना है, तो हर रात अच्छी नींद लेना भी उसी ओर एक कदम है।

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ज्यादा सोने के नुकसान

एक्सपर्ट मानते हैं कि एक व्यक्ति को सामान्य तौर पर 8 घण्टे से ज्यादा की नींद नहीं लेनी चाहिए, लेकिन अमूमन लोग 10 घण्टे तक सोते हैं। हालांकि इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं होता। लेकिन नुकसान तब होता है, जब आप इससे ज्यादा सोते हैं। 10 घंटे से भी ज्यादा सोने वालों में आलस आर सुस्ती घर कर जाती है। दिन के किसी भी पहर उन्हें खुद में उत्साह महसूस नहीं होता। 

इसके अलावा, ज्‍यादा सोने से याद्दाश्त भी कमजोर पड़ने लगती है। आलस सर पर सवार रहता है और आपकी कार्यक्षता प्रभावित होती है। इसके साथ ही आपका सामाजिक रूझान भी कम होने लगता है और शरीर हमेशा भारी-भारी सा लगता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए बेहतर है कि नींद र्प्‍याप्‍त मात्रा में लेना ही बेस्‍ट है। 

ज्यादा या कम सोना मतलब चैन खोना

साइंस डेली के मुताबिक अमेरिका के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि वे लोग जो दिन में 8 घंटे से ज्यादा सोते हैं वह 8 घंटे से भी कम घंटे की नींद लेने वालों की तरह रात भर परेशान रहते हैं। 

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कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने नेशनल स्लीप फाउंडेशन के 100 वयस्कों से बातचीत के बाद निष्कर्ष निकाला। सभी वयस्कों से पूछा गया कि वे आमतौर पर दिन में कितने घंटे सोते हैं। क्या उन्हें अपनी नींद या इसके प्रभावों से संबंधित कोई शिकायत है। जवाब में जो आंकडे़ मिले उसके मुताबिक, ज्यादा सोने वालों को दिन भर नींद आती रहना, रात में बार-बार नींद का टूटना और सुबह उठने पर खुद को ताजा महसूस न करने की शिकायत थी। हैरत की बात यह है कि कम सोने वालों ने भी ऐसी ही समस्याएं गिनाई। इस अध्ययन के मुताबिक, ज्यादा सोने के मामले में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा लत पाई गई।

 

र्प्‍याप्‍त नींद के लिए टिप्‍स 

  • यदि आपको नींद नहीं आती या आपको अधिक नींद आती है, तो आप अपने खानपान का विशेष ध्‍यान रखें। हमेशा अपनी भूख से एक रोटी कम खाएं क्‍योंकि अधिक खाना भी नींद न आने के साथ आलस और ज्‍यादा नींद का कारण है। 
  • अच्‍छी नींद पानी है, तो रोजाना व्‍यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्‍सा बनाएं। 
  • चाय या कॉफी के सेवन को कम करें, क्‍योंकि कैफीन का अधिक सेवन भी अनिद्रा या नींद न आने का कारण बनता है। 
  • इसके अलावा, अपना सोने से लेकर उठने तक का समय निश्चित कर दें। छुटटी हो या ऑफिस रोज एक समय पर उठें। 

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