रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य में क्या है संबंध? डॉ. डोरा से जानें ब्लड प्रशेर क्यों है हमारे लिए महत्वपूर्ण

ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य में क्या है संबंध? जानें डॉक्टर डोरा से कैसे ब्लड प्रेशर हमारे शरीर के लिए होता है महत्वपूर्ण और कैसे करता है काम। 

Vishal Singh
हृदय स्‍वास्‍थ्‍यReviewed by: डॉ संतोष कुमार डोरा, हृदय रोग विशेषज्ञ, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबईPublished at: Sep 29, 2020Written by: Vishal Singh
Updated at: Oct 05, 2020
रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य में क्या है संबंध? डॉ. डोरा से जानें ब्लड प्रशेर क्यों है हमारे लिए महत्वपूर्ण

सामान्य ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप हृदय से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को बनाए रखता है। अगर शरीर में रक्तचाप कम है तो सभी अंगों में रक्त का प्रवाह उप-रूप से बना रहता है। वहीं, अगर ये रक्तचाप शरीर में ज्यादा होता है तो ये शरीर के सभी जरूरी हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है और स्थिति को गंभीर बना सकता है। ब्लड प्रेशर के ज्यादा होने की स्थिति में हृदय, गुर्दे, आंख, तंत्रिका तंत्र जैसे हिस्सों को काफी नुकसान होता है। इसलिए हर किसी के लिए जरूरी होता है कि वो एक सामान्य रक्तचाप को बनाए रखे। लेकिन क्या आप जानते हैं ये हमारे शरीर में क्यों अहम हो जाता है? इस बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संतोष कुमार डोरा (Dr Santosh Kumar Dora, Senior Cardiologist, Asian Heart Institute, Mumbai)।

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बीपी की स्थिति को कैसे पता लगाएं ?

बीपी की स्थिति वाले करीब 95 प्रतिशत लोगों में किसी तरह के कोई लक्षण नहीं हो सकते हैं। हाई बीपी वाले करीब 5 प्रतिशत लोगों में सिरदर्द, थकान, गिड़गिड़ाहट और आंखों की समस्या जैसे आम लक्षण हो सकते हैं। इसिलए समय-समय पर लोगों को बीपी की जांच करानी चाहिए, जिससे की आपको अपने ब्लड प्रेशर के बारे में जानकारी मिल सके। अगर आपको कोई भी बीपी से संबंधित समस्या नहीं भी है तो आपको साल में एक बार जरूर अपने बीपी की जांच करानी चाहिए। 

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ब्लड प्रेशर का सामान्य स्तर क्या है?

रक्तचाप की संख्या औसत सिस्टोलिक 120 मिमी एचजी और डायस्टोलिक 80 मिमी एचजी से कम है। इसलिए बीपी तब ज्यादा माना जाताहै जब सिस्टोलिक 120 से 130 के बीच होता है और डायस्टोलिक 80 मिमी एचजी से कम हो। यह पहला चरण है, अगर किसी का सिस्टोलिक 130 से 140 मिमी एचजी या डायस्टोलिक 80 से 90 मिमी एचजी होता है। दूसरा चरण II उच्च बीपी है अगर आपका सिस्टोलिक 140 से ज्यादा है और डायस्टोलिक 90 मिमी एचजी से ज्यादा है। उच्च रक्तचाप का संकट एक ऐसी स्थिति है जब सिस्टोलिक बीपी 180 मिमी एचजी या डायस्टोलिक बीपी 120 मिमी से ज्यादा हो, ये किसी के लिए भी काफी गंभीर स्थिति को बयां करता है।

हाई बीपी का आम कारण

आमतौर पर लोग सवाल करते हैं कि हाई बीपी का कारण क्या है, इसका आम कारण आपकी बढ़ती उम्र की प्रक्रिया है। कई अध्ययनों से ये जानकारी मिली कि 50 से ज्यादा उम्र के करीब 50 प्रतिशत लोग हाई बीपी की स्थिति से प्रभावित हैं। ऐसा बढ़ती उम्र की प्रक्रिया के साथ रक्त वाहिकाओं के सख्त होने के कारण है। इसके अलावा हाई बीपी की समस्या गुर्दे की समस्या,ब्रेन ट्यूमर, हार्मोनल में असामान्यताएं, स्लीप एपनिया की समस्या और कुछ दवाओं के कारण। इसके अलावा बच्चों में जन्मजात के साथ कुछ स्थितियों में हाई बीपी की समस्या पैदा हो सकती है। 

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हाई बीपी को नियंत्रित करने के टिप्स

हाई बीपी किसी के लिए खतरनाक हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि आप अपने बीपी को हमेशा नियंत्रित करने की कोशिश करें। इसके लिए आप शुरुआती चरणों में कम नमक वाले आहार, कम वसा वाले भोजन, फल और सब्जियों का ज्यादा सेवन करें, नियमित रूप से आपको व्यायाम करना चाहिए जो आपके ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखेगगा। हालांकि, अगर पहले से ही किसी को बीपी की समस्या है तो और 140 सिस्टोलिक और 90 डायस्टोलिक से ज्यादा होता है तो इस स्थिति में मरीज को बीपी को सामान्य करने के लिए कुछ दवाओं की जरूरत हो सकती है। इसके साथ ही जो हर किसी के लिए अहम हो जाता है कि अगर किसी को हाई बीपी की समस्या है और उसका इलाज नहीं किया जाता तो वो आपके शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सो को नुकसान पहुंचाने का काम कर सकता है। 

ब्लड प्रेशर का ज्यादा होना किसी के लिए भी खतरनाक हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि आप अपने ब्लड प्रेशर को हमेशा सामान्य रखने की कोशिश करें। इसके साथ ही आपको अपने खानपान और जीवनशैली पर खास ध्यान रखने की जरूरत है जिससे आप हमेशा स्वस्थ रह सके।

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