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मैगी में पाया गया लेड : बच्चों को बनाता है ये शारीरिक और मानसिक रूप से अपंग, जानें कैसे?

बच्‍चे का स्‍वास्‍थ्‍य By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 10, 2019
मैगी में पाया गया लेड : बच्चों को बनाता है ये शारीरिक और मानसिक रूप से अपंग, जानें कैसे?

लेड एक ऐसा तत्व है जिसकी मात्रा यदि शरीर में बढ़ जाए तो कई खतरनाक अंजाम हो सकते हैं। असल में देखा जाए तो हमारे शरीर को लेड की जरूरत ही नहीं होती है। न तो हमारा शरीर लेड बनाता है और न ही इसे स्वीकार कर पाता है। यह सिर्फ मिलावटी रूप से बने खाने का स

इंटरनेशनल मार्किट में बिकने वाली मैगी एक ऐसी चीज बन गई है जिसे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई खाना पसंद करता है। एक तो इसे बनाना आसान होता है और दूसरा इसका मसाला कुछ ऐसा होता है कि वह हर किसी की जुबान को सूट करता है। 2 मिनट में बनने वाली मैगी अक्सर वीकेंड में बनने वाले नाश्ते में लोगों की प्राथमिकता बनती है। भले ही मैगी मैदे से बनती हो, इसके बावजूद लोगों इसे खाना नहीं छोड़ते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि हाल ही में एक ऐसी खबर आई है जिसमें बताया गया है कि मैगी खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। इसमें पाया जाने वाला लेड और एमएसजी से शरीर कई खतरनाक रोगों की चपेट में आ सकता है। और तो और मैगी कंपनी के मालिक ने भी सुप्रीम कोर्ट में इस बात को कबूल किया है।

लेड से कैसे प्रभावित होता है शरीर

लेड एक ऐसा तत्व है जिसकी मात्रा यदि शरीर में बढ़ जाए तो कई खतरनाक अंजाम हो सकते हैं। असल में देखा जाए तो हमारे शरीर को लेड की जरूरत ही नहीं होती है। न तो हमारा शरीर लेड बनाता है और न ही इसे स्वीकार कर पाता है। यह सिर्फ मिलावटी रूप से बने खाने का सेवन करने, गंदे पानी और प्रदूषण के माध्यम से हमारे शरीर में घुसता है और जब यह इकट्टा हो जाता है तो कई गंभीर रोगों को जन्म देता है। हालांकि इसके प्रभाव कुछ देर बाद दिखता है। यदि शरीर में इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए तो यह लिवर, मस्तिष्क, किडनी और हड्डियों को नुकसान पहुंचाना शुरू करता है। लिवर खराब करने के बाद यह डाइजेशन सिस्टम को खराब करता है। गर्भवती महिलाओं में गर्भपात, प्रिमिच्योर डिलीवरी, बच्चे का वजन कम होना जैसी समस्याएं इससे जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा बच्चों में मानसिक विकलांगता, आईक्यू कम होना, पढ़ाई में दिक्कत होना, कम ध्यान देना, व्यवहार में परेशानी, न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें, ब्‍लड सर्कुलेशन आदि भी लेड से संबंधित रोग हैं।

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क्यों खतरनाक हैं मोनोसोडियम ग्लूटामेट

मैगी पर हुए शोध में कहा में कहा गया है कि इसमें ऐसे घातक केमिकल होते हैं जिसके सेवन से बच्‍चों का न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। मैगी में पाई जाने वाले मोनोसोडियम ग्‍लूटामेट (एमएसजी) केमिकल से बच्चे कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। जिसमें मुंह, सिर या गर्दन में जलन, स्किन एलर्जी, हाथ-पैर में कमजोरी, सिरदर्द और पेट की तकलीफें हो सकती हैं। सिर्फ यही नहीं मैगी से स्‍वाद को महसूस करने वाली ग्रंथियों की ताकत को कम कर देता है और अपने टेस्‍ट का आदी बनाता है।

क्‍या है मोनोसोडियम ग्‍लूटामेट

एमएसजी यानी मोनोसोडियम एक तरह का धीमा जहर है। सफेद रंग का चमकीला सा दिखने वाला मोनोसोडि़यम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो, एक सोडियम साल्ट है। अगर आप डिब्‍बाबंद और चाइनी‍ज डिशेज के शौकीन हैं तो उसमें यह बहुतायत में मिलता है। यह ऐसा मसाला है जो बहुत ही खतरनाक हो सकता है। यह वास्तव में धीमा जहर है जो खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रन्थियों के कार्य को दबा देता है जिससे हमें खाने के बुरे स्वाद का पता नहीं लगता। सामान्‍यतया इसका प्रयोग खाद्-पदार्थों की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए किया जाता है। इसके अधिक सेवन से सिरदर्द, पसीना आना और चक्कर आने जैसी समस्‍यायें हो सकती हैं। अगर आप इसके आदी हो चुके हैं और खाने में इसको बहुत प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग को भी नुकसान कर सकता है। यह बच्‍चों के विकास को अवरोधित कर सकता है। 

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