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क्‍या है आंखों का भेंगापन? जानें इसके लक्षण, कारण और उपचार

अन्य़ बीमारियां By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 22, 2018
क्‍या है आंखों का भेंगापन? जानें इसके लक्षण, कारण और उपचार

 माँ-बाप बचपन से ही इस बात का ख्याल अवश्य रखते हैं कि उनके बच्चे जब ज़्यादा छोटे होते हैं, तो वह आँखों पर ज़्यादा दबाव न लें या अपनी सीमा से बाहर देखने की कोशिश न करें क्योंकि इससे बच्चे में भैंगेपन के होने का

लेजी आई सिंड्रोम के मुख्य कारणों में भेंगापन (आंख के तिरछेपन का विकार), दोनों आंखों के चश्मे की पावर में अंतर और दोनों आखों में चश्मे के नंबर के ज्यादा होने को शामिल किया जाता है। इसके अलावा कॉर्निया में निशान पड़ने से भी लेजी अई सिंड्रोम होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। लेजी आई सिंड्रोम का पता बच्चों की आंख की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के माध्यम से लगाया जा सकता है। 

वहीँ कई बार माता-पिता ध्यान रखने और सावधानी बरतने के बावजूद इसे होने से रोक नहीं पाते। इसके पीछे शायद बच्चे की आँखों की मांशपेशियों का पहले से ही कमज़ोर होना हो सकता है। इस तरह की स्थिति में, समय रहते ध्यान दिए जाने पर शायद इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन यदि यह एक बार हो गई तो इसका उपचार लगभग न के बराबर ही माना जाता है। 

भेंगापन के लक्षण

  • अंदर या बाहर की तरफ अपने आप आँखों की पुतलियों का घूमना,
  • भेंगापन में आँखों की पुतलियां एक साथ नहीं घूमती, चीजों को ज़्यादा साफ़ न दिखाई दे पाना यानी धुंधलापन,
  • सिर का एक तरफ झुकना
  • विज़न स्क्रीनिंग टेस्ट जाँच के नतीजे असामान्य आना।  

भेंगापन के कारण

आम तौर पर भेंगापन का सटीक कारण अभी तक पता नहीं लग पाया है, लेकिन इतना ज़रूर है कि यह बच्चों में अधिकतर बचपन में ही पनप जाती है। यह समस्या आँखों की कमज़ोर मांशपेशियों के कारण होती है और इन मांशपेशियों की कमज़ोरी के पीछे बहुत से कारण, जैसे आँख में चोट लगना, या कोई बिमारी हो जाना, या शुरुआत से ही ठीक तरह से देख न पाना, जैसे कारण हो सकते हैं। 

कैसे कराएं उपचार

सबसे पहले तो बच्चे को चश्मा लगाकर दूसरी आंख की रोशनी बैलेंस की जाती है। कई बार ऐसा करने से बच्चा दोनों आंखों का प्रयोग करने लगता है। इसके बाद भी अगर ये बीमारी दूर नहीं होती तो जिस आंख से बच्चा देख रहा है उसकी पैचिंग (पट्टी से ढंकना) किया जाता है। इसमें अभिभावक ही बच्चे का मनोबल बढ़ा पाते हैं क्योंकि कई बार ये पैचिंग हफ्तों से महीनों तक करनी पड़ती है। इस दौरान बच्चे की दवा और आंखों की एक्सरसाइज भी करवाई जाती है। पैचिंग के कारण बच्चा उस आंख से देखने की कोशिश करता है जिसका प्रयोग वह नहीं करता था। पैचिंग के बाद भी अगर बच्चा ठीक नहीं होता तो फिर सर्जरी ही इलाज है।

कैसे करें रोकथाम 

इस समस्या की रोकथाम के लिए, जैसे ही छोटे बच्चे में इसकी पहचान होती है, माता-पिता को बच्चे की उस आँख पर पट्टी बांधनी शुरू कर देनी चाहिए जिसमें भेंगापन नहीं है। इस तरह के पैच मेडिकल स्टोर से या ऑनलाइन ख़रीदे जा सकते हैं।

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