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स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है अधूरी नींद

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By जया शुक्‍ला , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 18, 2011
स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है अधूरी नींद

यदि आप पूरी नींद नहीं लेते हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि नींद न आने का कारण जो भी हो, लेकिन नींद पूरी न होने पर उसका असर सीधे आपके व्यवहार पर पड़ता है। आप लगातार चिड़चिड़े होने लगते हैं और छोटी-छोटी बात पर आपको गुस्सा आने लगता है।

Quick Bites
  • स्वस्थ रहने के लिये नींद पूरी करना बेहद जरूरी होता है।
  • देर से सोने वाले लोगों में गुड कोलेस्ट्रॉल कम होता है। 
  • नींद पूरी न होने पर चिड़चिड़ाहट होती है व गुस्सा आता है।
  • जो लोग देर से सोते हैं उनकी याददाश्त कमजोर हो सकती है।

सच तो यह है कि आज लोग औसतन एक से डेढ़ घंटा कम सो रहे हैं। अमेरिका में किए गए शोध के मुताबिक नींद की वजह से न जाने कितनी बार काम बिगड़ जाते हैं। एक ड्राइवर अगर लंबे समय से लगातार बगैर सोए गाड़ी चला रहा है तो दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ऐसा न हो तो भी कम नींद आदमी की कार्यक्षमता पर खासा विपरीत असर डालती है।

अधूरी नींद

 

 यदि आप पूरी नींद नहीं लेते हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि नींद न आने का कारण जो भी हो, लेकिन नींद पूरी न होने पर उसका असर सीधे आपके व्यवहार पर पड़ता है। आप लगातार चिड़चिड़े होने लगते हैं और छोटी-छोटी बात पर आपको गुस्सा आने लगता है। यही नहीं इसके कारण मोटापा, याददाश्त कमज़ोर होना तथा कई और समस्याएं भी जन्म लेने लगती हैं। तो चलिये जानें कि क्या है कि नींद पूरी न होने के क्या नुकसान हैं।

अगर आपको स्वस्थ रहना है, तो नींद पूरी करना बेहद जरूरी होता है। नींद हमारी सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है, क्योंकि नींद हमारे मन-मस्तिष्क पर प्रभाव डालती है। नींद पूरी न होने पर चिड़चिड़ाहट होती है और जल्दी गुस्सा भी आता है। अक्सर लोग इस बात को हल्के में लेते हैं लेकिन शोध बताते हैं कि नींद पूरी न होने का शरीर व दिमाग पर काफी प्रभाव पड़ता है।


नींद न आने के नुकसान


रक्तचाप बढ़ता है

अध्ययनों से पता चला है कि नींद की कमी होने से रक्तचाप बढ़ सकता है। पूरी नींद लेने का मतलब यह हरगिज नहीं है कि आप विलासी हो जाएं, नींद तो स्वस्थ जीवनशैली की एक जरूरत होती है। हकीकत में नींद न आना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि बीमारियों को न्योते की तरह होता है।


अधिक लेते हैं खर्राटे

यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन के दौरान पाया कि वे लोग जो देर से सोते हैं उनमें गुड कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) अपेक्षाकृत कम होता है, जिस कारण सोते समय उन्हें सांस लेने में समस्या होती है और वे ज्यादा खर्राटे भी लेने लगते हैं।


कमजोर होती है याददाश्त

कई शोधों में यह साबित हो चुका है जो लोग देर से सोते हैं और सुबह को जल्दी उठ जाते हैं उनकी याददाश्त कमजोर हो जाती है। नींद के दौरान मस्तिष्क खुद को रीसेट करता है और यदि नींद पूरी न हो तो इसका प्रभाव दिमाग की कार्यक्षमता पर भी पड़ने लगता है।


बढ़ सकता है मोटापा

एक शोध की मदद सेपता चला कि जो लोग सुबह जल्दी उठते हैं वे समय से नाश्ता करते हैं जिसकी वजह से उनका वजन संतुलित रहता है। वहीं वो लोग जो सुबह आठ बजे के बाद उठते हैं वे प्रतिदिन डाइट में औसतन 677 कैलोरी बढ़ा देते हैं। जिस कारण अनका मोटापा बढ़ने लगता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता प्रोफेसर रशैल फोस्टर ने अपने अध्ययन के आधार पर बताया है कि कम नींद लेने वाले व देर से सोने वाले लोगों में लेप्टिन नामक हार्मोन का स्तर कम होता है तथा उनका शरीर कार्बोहाइड्रेट व शुगर की खपत 35 से 40 प्रतिशत तक अधिक करता है।

चिंताजनक है कि आज लोग औसतन एक से डेढ़ घंटा कम सो रहे हैं। अमेरिका में किए गए शोध के मुताबिक नींद पूरी न होने के वजह से न जाने कितनी बार काम बिगड़ जाते हैं। एक ड्राइवर अगर लंबे समय से लगातार बगैर सोए गाड़ी चला रहा है तो दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ऐसा न हो तो भी कम नींद आदमी की कार्यक्षमता पर खासा विपरीत असर डालती है।



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Written by
जया शुक्‍ला
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागFeb 18, 2011

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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