• shareIcon

6 घंटे से कम नींद लेने से आप हो सकते हैं डिप्रेशन का शिकार, एक्सपर्ट से जानें कारण और बचाव के टिप्स

अन्य़ बीमारियां By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 23, 2019
6 घंटे से कम नींद लेने से आप हो सकते हैं डिप्रेशन का शिकार, एक्सपर्ट से जानें कारण और बचाव के टिप्स

स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। अगर आप 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो आप डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं। एक्सपर्ट से जानें किस तरह कम नींद यानी अनिद्रा (Insomnia) आपको धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार बना देता है।

आजकल की पीढ़ी को इंटरनेट जेनेरेशन कहा जाता है। युवाओं में इन दिनों इंटरनेट, सोशल मीडिया और मोबाइल-लैपटॉप के इस्तेमाल का क्रेज इतना बढ़ गया है कि इनके कारण युवाओं की नींद खराब हो रही है। देर रात तका जागना, लंबे समय तक एक ही जगह बैठना और शरीर को फिजिकल रूप से कम एक्टिव रखना आदि ऐसी आदतें हैं, जो लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं।

कई लोगों को यह एहसास भी नहीं है कि वो अनिद्रा की चंगुल में फंसे हुए हैं। रिपोर्ट की मानें तो करीब इंग्लैंड में 16 मिलियन युवा, भारत में 33% और अमेरीका में लगभग हर चार में से एक केस अनिंद्रा के मिलते हैं। इस बीमारी को झेलना काफी कठिन है। इनमें 30% लोगों को रिकवर किया गया है जबकि अन्य अभी भी इस बीमारी की चपेट में हैं।

अनिद्रा क्या है और कब इलाज की आवश्यकता पड़ी है?

नेशनल स्लीप फाउंडेशन ( National Sleep Foundation ) के अनुसार, क्रॉनिक इंसोमेनिया को ‘बाधित नींद के रूप में जाना जाता है जो हर हफ्ते कम से कम तीन रातों तक और तीन महीनों तक हो सकती है। क्रोनिक इंसोमेनिया से पीड़ित लोगों के अंदर ये लक्षण दिखाई देते हैं जिनमें - सोते समय गिर जाना, नींद बीच में ही खुल जाना, दिन के समय थकान या चिड़चिड़ाहट महसूस करना और डिप्रेशन जैसे लक्षण आते हैं।

अवसाद (डिप्रेशन) क्या है?

अवसाद एक गंभीर बीमारी है, जो हमें महसूस करने, सोचते और बर्तावकरने पर असर करता है। क्लिनिकल डिप्रेशन तब होता है जब दो सप्ताह से अधिक समय तक कई लक्षण देखे जाते हैं। तकरीबन अधिकतर दिन थकान महसूस करना या ऊर्जा की कमी, अच्छा महसूस ना करना, नींद की कमी या बहुत अधिक नींद, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना आदि शामिल हैं।
अवसाद विभिन्न भावनात्मक और शारीरिक समस्याओं को जन्म दे सकता है जो व्यक्ति के कार्य करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। हालाँकि, यह एक ऐसी स्थिति है जिसका इलाज कई तरह की चिकित्सा और दवाओं से किया जा सकता है।

अनिंद्रा और अवसाद कैसे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं?

क्रॉनिक इंसोमेनिया के कारण कई अन्य बीमारियां हो सकती हैं जिनमें गठिया, अवसाद, नाराज़गी, कैंसर, अस्थमा जैसी बीमारियां शामिल हैं। कुछ दवाएं हैं जो नींद को खराब कर देती हैं। अगर इनमें से किसी भी कारण की वजह से रोगी को इंसोमेनिया हो रहा है तो उसे तुरंत ही मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए। कई बार खराब लाइफ स्टाइल की वजह से भी क्रॉनिक इंसोमेनिया हो सकता है।

क्या अनिद्रा अवसाद को बढ़ावा देता है?

हां, बहुत दिनों से हो रही अनिद्रा की बीमारी अवसाद को जन्म दे सकती है और जल्द से जल्द इसका इलाज करवाना चाहिए। यह वैज्ञानिक कहावत है कि "एक बुरी रात की नींद हमारी भावनाओं को नियमित रुप से अलग करने की हमारी क्षमता को प्रभावित करती है"। हमारे मस्तिष्क में एक आधारशिला होती है जिसे अमिगडाला कहा जाता है, जो हमारे दिमाग में गहरी स्थित एक बादाम के आकार की संरचना है जो हमारी भावना और चिंता के स्तरों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अनिद्रा का इलाज कैसे किया जा सकता है?

गंभीर या पुरानी अनिद्रा से पीड़ित लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। चिकित्सा की प्रक्रिया में एक नींद परीक्षा, एक शारीरिक परीक्षा, एक चिकित्सा इतिहास और एक नींद इतिहास शामिल होगा। इसका एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है कि 7-8 घंटे से कम समय के लिए नींद की वजह से व्यक्ति के कार्य करने पर असर या शारीरिक बीमारियों का कारण बनता है। एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू किसी भी मानसिक तनाव का कारण है जैसे कि ओएसए (ऑब्सट्रक्टेड स्लीप एपनिया) सबसे समान्य नींद की परेशानियों का कारण है।

यदि पुरानी अनिद्रा का इलाज चाहते हैं, तो अभ्यासी नीचे दिए गए इन उपचार विकल्पों को फॉलो करेंगे।

  • आचरण थेरेपी
  • दवा (केवल कुछ मामलों में)
  • आराम करने के लिए व्यायाम
  • नींद आराम थेरेपी

अनिद्रा कोई छोटी सी बीमारी नहीं है अगर यह बढ़ जाती है तो कई परेशानियों को पैदा कर सकती है। यह एक गंभीर स्थिति है जिसे किसी को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि आप अपनी नींद की दिनचर्या में असंतुलन का अनुभव कर रहे हैं, तो हमारे द्वारा बताए गए लक्षणों के लिए अपने आप को जांचें और तत्काल चिकित्सा सेवा प्राप्त करें।

यह लेख डॉ.बिनीता प्रियंबदा (सीनियर कसंलल्टेंट, मेडिकल टीम, डॉकप्राइम.कॉम) द्वारा सुझाए गए टिप्स पर आधारित है।

Read more articles on Other Diseases in Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK