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पूरी नींद नहीं ली तो दिमाग हो सकता है कमजोर और छोटा

लेटेस्ट By Rahul Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 08, 2014
पूरी नींद नहीं ली तो दिमाग हो सकता है कमजोर और छोटा

ड्यूक-एनयूएस ग्रैजुएट मेडिकल स्कूल सिंगापूर में चीन के 66 वयस्कों पर किये गए रिसर्च से पता चला कि नींद न आने की शिकायत वाले लोगों को दिमाग का क्षय होने की समस्या हो सकती है।

आपने अक्सर सुना होगा कि नींद पूरी नहीं होने की वजह से मोटापा, डायबीटीज़, दिल की बीमारी, मूड स्विंग्स, नशे की लत आदि समस्याएं होने की आशंका रहती है। लेकिन हाल ही में हुए एक शोध में इस संबंध में चौंकाने वाले या कहिए डराने वाले तथ्य सामने आए हैं।

Lack of Sleep in Hindi

ड्यूक-एनयूएस ग्रैजुएट मेडिकल स्कूल सिंगापूर में चीन के लोगों पर हुए एक हालिया शोध में पता चला कि नींद की कमी से दिमाग सिकुड़ सकता है और छोटा हो सकता है।

 

 

ड्यूक-एनयूएस ग्रैजुएट मेडिकल स्कूल सिंगापूर में चीन के 66 वयस्कों पर यह शोध किया गया। इस शोध के दौरान हर दो साल पर इन लोगों को सोने से संबंधित प्रश्नावली, एमआरआई स्कैन और मनोविज्ञान आकलन की प्रक्रिया से गुजारा गया। आंकलन से निकलकर आए नतीजे चौंकाने वाले थे। वे लोग जिन्हें नींद नहीं आने की शिकायत थी, उन पर उम्र संबंधी बीमारी जैसे दिमाग का क्षय होता हुआ देखा गया।

 

 

शोध के प्रमुख रिसर्चर डॉ. जून लो के अनुसार 'कम नींद लेने वाले अधिक उम्र के वयस्कों के दिमाग तेजी से सिकुड़ते हैं और छोटे होते जाते हैं। हमारी रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि कम नींद लेना दिमागी बुढ़ापे की ओर ले जाती है।'

 

 

दरअसल हमारे शरीर के साथ-साथ दिमाग भी बूढ़ा होता चला जाता है। लेकिन मानसिक क्षय रोग से ग्रसित लोगों में यह प्रक्रिया ज्यादा तेजी से होता है। इस शोध से जो आंकडे मिले हैं वे भी कम नींद के कारण तेज गति से दिमागी क्षय होने की बात को सच साबित  करते हैं। ऐसी ही एक और स्टडी कुछ महिनों पहले भी आई थी, जिसमें मिलिटरी वेटरन्स के नींद की समस्या को उनके मनोवैज्ञानिक स्थिति के साथ जोड़ कर देखा गया था।

 

 

न्यूरोसायंटिस्ट माइकल ची के मुताबिक बढ़ती उम्र से प्रभावित जनसंख्या वाले देशों के लिए यह एक बहुत बड़ी सामाजिक-आर्थिक समस्या है। ची के अनुसार एशिया भी इस समस्या से बडे स्तर पर गुजर रहा है और यदि समय रहते ध्यान न दिया गया तो इन जगहों पर कार्डियो-मेटाबेलिक समस्या जैसे डायबीटीज़ आदि का जोखिम दिनों-दिन बढ़ सकता है।


Source: Theatlantic.com & Psychologytoday

 


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