क्या हाइपरथायराइडिज्म से वजन बढ़ता है

Updated at: Nov 08, 2012
क्या हाइपरथायराइडिज्म से वजन बढ़ता है
Anubha Tripathi
हाइपरथायरायडिज्‍़मWritten by: Anubha TripathiPublished at: Nov 02, 2012

kya hypothyroidism se vajan badhta hai

हाइपरथायराइडिज्म को ओवरएक्टिव थायराइड के नाम से भी जाना जाता है। हाइपरथायराइडिज्म के शिकार लोगों के वजन पर भी असर पड़ता है। आम धारणा यही है कि थायराइड में लोगों का वजन बढ़ने लगाता है। लेकिन, हाइपरथायराइडिज्‍म में लोगों का वजन कम होने लगता है। सामान्य से अधिक भोजन करने के बाद भी रोगी के वजन में गिरावट देखी जाती है। हाइपरथायराइडिज्म की समस्या तब शुरू होती है जब रोगी का प्रतिरोधकता क्षमता थायराइड ग्रंथि पर हमला करती है। जिसके बाद थायराइड ग्रंथि मेटाबॉलिक हार्मोन्स बनाने लगती है। हाइपरथायराइडिज्म रोगी के मेटाबॉलिज्म को बढ़ता जिसकी वजह से वजन घटना शुरु हो जाता है।

हाइपरथायराइडिज्म व वजन घटना

 

हाइपरथायराइडिज्म में रोगी का वजन थायराइड के बढ़ने व घटने पर निर्भर करता है। रोगी को समय-समय पर अपने वजन की जांच कराते रहना चाहिए और ध्यान देना चाहिए कि वजन में पहले से कितनी गिरावट हो रही है। रोगी के खान पान का असर भी उसके वजन पर होता है। हाइपरथायरिडज्म में रोगी कितनी कैलोरी ले रहा है उसके हिसाब से वजन में परिवर्तन होता रहता है। थायराइड बढ़ने पर रोगी का वजन घटने के साथ ही बीएमआई में भी गिरावट होती है।

 

[इसे भी पढ़ें: हाइपरथायराइडिज्म क्या है]

 

जानिए हाइपरथायराइडिज्म के लक्षण क्या हैं-

  • चिड़चिड़ापन व बैचेनी
  • मांसपेशियों में कमजोरी व कपकपी महसूस होना
  • मासिक-धर्म अक्सर न होना या बहुत कम होना
  • वजन घटना
  • नींद ठीक से न आना
  • थायराइड का बढ़ जाना
  • आंख की समस्या या आंख में जलन
  • गर्मी के प्रति संवेदनशीलता


 

यदि थायराइड की बीमारी की पहचान जल्द हो जाती है तो इसका पूर्ण इलाज संभव हो सकता है। थायराइड की समस्या जीवन भर रहती है। ध्यानपूर्वक इसके प्रबंधन से थायराइड से पीड़ित व्यक्ति अपना जीवन स्वस्थ और सामान्य रूप से जी सकते हैं।

[इसे भी पढ़ें: हाइपरथायराइडिज्म में व्यायाम]

 

जानें हाइपरथायराइडिज्म के किन कारणों से होता है-

 

  • हाइपरथाइराइडिज्म की मुख्य वजह है ग्रेव रोग इसमें थायराइड ग्रंथि अति सक्रिय हो जाती है और अधिक हार्मोन बनाने लगता है।
  • नोड्यूल्स थायराइड ग्रंथि भी अति सक्रिय हो जाता है।
  • थाइरोडिटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें दर्द हो भी सकता है या नहीं भी हो सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि थायराइड में ही रखे गए हार्मोन निर्मुक्त हो जाए जिससे कुछ सप्ताह या महीनों के लिए हाइपरथारोडिज़्म की बीमारी हो जाए। दर्दरहित थाईरोडिटिस अक्सर प्रसव के बाद महिला में पाया जाता है।
  • अत्यधिक आयोडिन कई औषधियों में पाया जाता है जिससे किसी-किसी में थायराइड ग्रंथि या तो बहुत अधिक या फिर बहुत कम हार्मोन बनाने लगता है।

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