तनाव और थायराइड के बीच क्या है संबंध? जानें आपके स्वास्थ्य पर कैसे पड़ता है बुरा असर

Updated at: Jul 23, 2020
तनाव और थायराइड के बीच क्या है संबंध? जानें आपके स्वास्थ्य पर कैसे पड़ता है बुरा असर

अगर आप भी हमेशा तनाव से ग्रस्त रहते हैं तोअगर आप भी हमेशा तनाव से ग्रस्त रहते हैं तो जान लें तनाव और थायराइड के बीच क्या है संबंध और कैसे आपके स्वास्थ

Vishal Singh
विविधWritten by: Vishal SinghPublished at: Jul 23, 2020

आजकल ज्यादातर लोग तनाव (Stress) का शिकार हो रहे हैं जो आपकी जीवनशैली को काफी हानि पहुंचाता है। बहुत कम तनाव हर किसी को होता है ये आपको मानसिक और शारीरिक रूप से नुकसान नहीं पहुंचाता लेकिन जब ये हद से ज्यादा होने लगे तो ये आपको दोनों तरीकों से नुकसान पहुंचाता है। ज्यादा तनाव होने पर ये आपको शारीरिक रूप से बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (American Psychological Association) के अनुसार, पिछले महीनों में लगभग 75 प्रतिशत वयस्कों ने मध्यम से उच्च स्तर के तनाव का अनुभव किया है और सभी को शारीरिक रूप से भी प्रभावित होना पड़ा। ऐसे ही कई शारीरिक समस्याएं है जो तनाव के कारण पैदा होती है, लेकिन हम अक्सर सोचते हैं कि ये किसी और कारण से होता है। इसी कड़ी में हम आपको थायराइड और तनाव के बीच का संबंध को समझने की कोशिश कर रहे हैं। 

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तनाव और थायराइड के बीच संबंध

तनाव (Stress) के साथ-साथ थायराइड रोग का भी ज्यादातर लोग शिकार हो रहे हैं। थायराइड (Thyroid) ग्रंथि आपकी गर्दन के आधार पर स्थित है, यह हार्मोन 'थायराइड' का उत्पादन करता है जो शरीर के ऊर्जा उपयोग को नियंत्रित करता है। आपको बता दें कि थायराइड भी प्रोटीन संश्लेषण में मदद करता है। आमतौर पर, तनाव बढ़ने की स्थिति में कोर्टिसोल का उत्पादन करने के लिए अधिवृक्क ग्रंथियों को ट्रिगर करती हैं। कोर्टिसोल हमारे शारीरिक कार्यों को बढ़ाने का काम करता है और शरीर के चयापचय को कम रखता है, जो सामूहिक रूप से तनाव से निपटने में मदद करता है।

कोर्टिसोल पिट्यूटरी ग्रंथि के कामकाज को दबा देता है, जो थायराइड-उत्तेजक हार्मोन (टीएसएच) जारी करने के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। टीएसएच में ईब के साथ, थायराइड ग्रंथि निष्क्रिय हो जाती है। जिसे हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) के रूप में जाना जाता है। हाइपोथायरायडिज्म की विशेषता ट्राइयोडोथायरोनिन और थायरोक्सिन के स्तर में भारी कमी है। 

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हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों 

  • शरीर के तापमान को विनियमित करने में असमर्थता। 
  • मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना।
  • थकान।
  • भार बढ़ना।
  • त्वचा में रुखापन
  • कब्ज

तनाव अपने आप में थायराइड के काम में बाधा नहीं डाल सकता है, यह स्थिति को और भी ज्यादा बढ़ा सकता है। अगर आप ग्रेविस रोग और हाशिमोटो के थायरॉयडिटिस जैसी ऑटोइम्यून रोग स्थितियों से पीड़ित हैं।

तनाव और हाइपोथायरायडिज्म से निपटने के तरीके

तनाव के कारण थायराइड के स्तर में कमी के बारे में जानते हैं, तो आप तनाव और हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) से निपटने के लिए इन टिप्स की मदद ले सकते हैं:

  • पर्याप्त नींद लें।
  • योगा या मेडिटेशन जैसी गतिविधियों को रोजाना करें। 
  • एक संतुलित आहार खाएं।
  • अपनी डाइट में आयोडीन की मात्रा बढ़ाएं।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • किसी भी चीज के बारे में ज्यादा सोचने से बचें।
  • अपनी शौक को तलाशें।

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किसी भी बीमारी से पहले अपना बचाव करना हमेशा इलाज से बेहतर विकल्प होता है। अगर आप तनाव और थायराइड के बीच संबंध जानते हैं, तो आप अपनी थायराइड ग्रंथि को स्वास्थ रखे के लिए तनाव से दूरी बनाना शुरू करें। हालांकि हम सब जानते हैं कि तनाव से पूरी तरह से छुटकारा पाना असंभव है, लेकिन आप बचाव के तरीकों का इस्तेमाल कर इनसे बच सकते हैं। 

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