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प्रेग्नेंसी के दौरान पेरिनियल मसाज से आसान हो जाती है नॉर्मल डिलीवरी, जानें क्या है ये

महिला स्‍वास्थ्‍य By पल्‍लवी कुमारी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 10, 2019
प्रेग्नेंसी के दौरान पेरिनियल मसाज से आसान हो जाती है नॉर्मल डिलीवरी, जानें क्या है ये

पेरिनियल वह हिस्सा होता है जो वजाइना से एनस तक फैलता है। पेरिनियल मसाज नॉर्मल डिलीवरी को कुछ आसान बना देती है। हम आपको बताते हैं क्या है ये और इस मसाज को कैसे करते हैं।

गर्भावस्था के दौरान नॉर्मल वजाइनल डिलीवरी के लिए अक्सर डाक्टर्स कई सारे सुझाव देते हैं। कई डॉक्टर्स और गायनोकोलॉजिस्ट गर्भवती मां को नॉर्मल वजाइनल डिलीवरी के लिए गर्भावस्था के दौरान ही पेरिनियल मसाज करने की सलाह देते हैं। डॉक्टरों की मानें तो गर्भावस्था के 34वें सप्ताह के बाद वजाइनल डिलीवरी आसान बनने लगता है। इसलिए जरूरी है कि गर्भावस्था के शुरुआत से ही गर्भवती महिलाएं पेरिनियल मसाज करती रहें ताकि डिलीवरी के वक्त तक वजाइना पर्याप्त रूप से फैल सके और नॉर्मल डिलीवरी हो पाए। दरअसल पेरिनियल की मालिश करने से जन्म के लिए इस क्षेत्र को फैलने में मदद मिलती है, इससे प्रसव के दौरान दर्द भी कम होता है।

क्या है पेरिनियल मसाज ?

पेरिनियल वजाइना और एनस के बीच फर्म त्वचा और मांसपेशियों से बना एक छोटा सा क्षेत्र है। यह वजाइना से एनस तक फैलता है। गर्भावस्था के दौरान यह सामान्यतौर से अधिक वजन सहन करता है और प्रसव के वक्त शिशु इसी से बाहर आता है। यह बाद में गर्भाशय से जुड़े परेशानी का कारण बन सकता है। बच्चे के जन्म के दौरान यह हिस्सा फैल जाता है या सर्जरी के दौरान इस काट दिया जाता है और बच्चे को गर्भ से बाहर निकलने के लिए मदद करता है। अगर सर्जिकल कट किया जाता है तो डिलीवरी के बाद उसे सिलना ज़रूरी हो जाता है। इसलिए इस क्षेत्र की मालिश करना फायदेमंद होता है। पेरिनियल मसाज वजाइना और एनस के बीच मांसपेशियों की त्वचा के खिंचाव को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक है। गर्भावस्था के दौरान 34वें सप्ताह से महिलाएं स्वयं या साथी की सहायता से यह मसाज कर सकती हैं। इस मसाज के दौरान उंगलियों पर तेल या लोशन लगा कर घड़ी की गति में धीरे-धीरे पेरिनाल क्षेत्र और वजाइना के अंदर की मालिश की करनी होती है। 

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पेरिनियल की मसाज कैसे करें ?

पेरिनियल को करने के लिए गर्भवती महिला को हो सके तो स्नान या शॉवर के तुरंत बाद का समय चुनना चाहिए। इसके लिए पहले पेरिनियल इलाके को हल्का गर्म पानी से धोकर साफ कर लें। इससे वहां के मसल्स को आराम मिलेगा और धीरे -धीरे वह नरम पड़ने लगेगी। फिर पीठ के बल सीधे लेटकर मसाज शुरू करें। पहले अपने हाथों में नारियल तेल या कोई तेल लगाकर पेरिनियल के आस-पास हल्के हांथों से रगड़ें और मालिश करें। वजाइना और एन्स के बीच के क्षेत्र पर सर्कल कर के हांथ घुमाएं और लगभग एक मिनट के लिए आंतरिक और बाहरी पेरिनियल क्षेत्र की मालिश करें। जैसे जैसे आप अधिक आरामदायक महसूस करना शुरू करें, तो आप गुदा की ओर धीरे-धीरे खिंचाव लाने के लिए अधिक दबाव का उपयोग कर सकते हैं। अपने अंगूठे को अपनी वजाइना के अंदर रखें। जब तक आप एक झुनझुनी महसूस नहीं करते हैं, तब तक उन्हें अपने पेरिनियल की ओर और अपनी वजाइना के किनारों को मजबूती से दबाएं और मालिश करें।गर्भावस्था के बाद के चरणों में पहुंचने में असमर्थ होने पर आपका साथी भी इसमें आपकी मदद कर सकते हैं। एक बार में इस मसाज को कुछ मिनटों के लिए शुरू करने की कोशिश करें, फिर इसे दस मिनट के लिए सप्ताह में तीन से चार बार करें। इस तरह के मसाज से आपका पेरिनियल धीरे-धीरे सोफ्ट और फेलेक्सिबल होने लगेगा, जिससे डिलीवरी के वक्त कम परेशानी होगी।

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पेरिनियल मसाज के लाभ 

यूं तो यह प्रसवकालीन मालिश पूरी तरह से बच्चे के जन्म के दौरान गंभीर परेशानी के खतरे को कम कर सकता है। परिनियल मालिश से नॉर्मल डिलीवरी में आने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। परिनियल मालिश वजाइना को खिंचाव देने में मदद करता है। यह वजाइना की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाता है और ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करके एपिसीओटॉमी की आवश्यकता को कम करता है। विशेष रूप से पहली बार मां बन रही औरतों के लिए यह ज्यादा लाभदायक होता है। यह मसाज प्रसव के दौरान इस क्षेत्र में दर्द होने की संभावना को भी यह कुछ कम कर देता है। 

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