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दांत की सफाई और रोगों से जुड़ी ये 5 अफवाहें बढ़ा रही हैं कई रोगों का खतरा, जानें इनकी सच्चाई

विविध By पल्‍लवी कुमारी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 15, 2019
दांत की सफाई और रोगों से जुड़ी ये 5 अफवाहें बढ़ा रही हैं कई रोगों का खतरा, जानें इनकी सच्चाई

सेंस्टिविटी और दांतों के इलाज को लेकर लोगों में अक्सर कुछ मिथक पल रहे होते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप पहले उन मिथकों के बारे में पूरी तरह से जांच कर लें और तब ही उन पर भरोसा करें। आइए हम आपको बताते हैं दांतों की सफाई और इलाज से जुड़े कुछ प्रचलित

दांतों की सेहत का ध्यान रखना शरीर में होने वाले अन्य बीमारियों को भी रोक सकता है। इसलिए भी कहा जाता है कि दांत में हो रहे छोटे से दर्द को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में हमें समय-समय पर दांतों की सेहत का ख्याल रखने के लिए डेंटल चेकअप के लिए जरूर जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों के अंदर दांतों से जुड़े कुछ मिथक भी हैं, जिसके कारण उन्हें लगता है कि दांत निकलवाना से उन्हें कुछ अन्य परेशानियां होंगी। पर ऐसा कुछ नहीं है। दांतों को अच्छे ले साफ करना और दर्द होने पर डाक्टर को दिखाना यह सब एक नॉर्मल प्रोसेस का हिस्सा है। इसके न आपके ब्रेन को कोई नुकसान पहुंचेगा न आपकी आंखों को कोई नुकसान होगा। ऐसे ही मिथकों से हर दिन डेंटिस्ट भी परेशान होते हैं, जबकि इनका विज्ञान में कोई आधार नहीं है। आइए हम आपको बताते हैं दांतों से जुड़े 5 सामान्य मिथकों के बारे में, जिसपर आपको भरोसा नहीं करना चाहिए।

मिथक 1: चिकित्सकीय सफाई सेंस्टिविटी का कारण बन सकती है

तथ्य: दांतों की सफाई या स्केलिंग एक प्रक्रिया है, जो दांतों की सतह पर जमे हुए बैक्टीरिया को साफ और दांतों के अधिक सख्त होने की स्थिति में इलाज करवाने के लिए आवश्यक होती है। इसके अलावा इस प्रक्रिया से दांतों के मसूड़ों को फिर से भरने में मदद मिलती है। स्केलिंग उन दांतों के क्षेत्रों को उजागर करती है, जो पहले टारटर से ढके हुए थे, इस प्रकार दांत की जड़ों को हल्का सा निकाल कर करते हैं। इससे दांतों में झंझनाहट या सेंस्टिविटी हो सकती है, जो एक या दो दिन में ठीक हो जाती है। पर लोगों के अंदर इसे लेकर एक मिथक यह है कि स्केलिंग करवाने से उनके दांत हमेशा के लिए सेंस्टिव हो जाते हैं। इसी डर से बहुत लोग स्केलिंग करवाने ले डकते हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। यह बस एक सफाई की प्रक्रिया है और कुछ नहीं। इससे आपके दांत साफ और उनकी जड़ें दर्द मुक्त हो जाती हैं।

मिथक 2: आंखों पर असर होता है

तथ्य: बहुत से लोगों में यह मिथक घर कर गई है कि ऊपरी जबड़े से दांत निकालने से उनकी आंखें खराब हो सकती हैं। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। ऊपरी जबड़े से दांत निकालने से आंखों पर कोई असर नहीं पड़ता है। आंखों से जुड़ी नसों में ऑप्टिक, ऑक्यूलोमोटर, पेट की नसें और ट्राइक्लियर नसें होती हैं, जबकि ऊपरी जबड़े से संबंधित नसें पीछे से होती हैं, जिन्हें वायुकोशीय, तालुमूल, नासापुटैलिन और इंफ्रोरबिटल कहा जाता है। इस तरह ऊपरी जबड़े की नसें आंख की नसों से पूरी तरह से अलग होती हैं। पर लोगों को लगता है कि दांतों की नसें आंखों से जुड़ी होती हैं और दांत निकलवाने से हमारी आंखें भी खराब हो जाती हैं।

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मिथक 3: विस्डम टिथ को हटाने से मस्तिष्क प्रभावित होता है

तथ्य: विस्डम टिथ दोनों जबड़े के दोनों तरफ तीसरे और अंतिम दाढ़ होते हैं। वे 18 से 26 वर्ष की आयु के बीच फूटते हैं। चूंकि वे आमतौर पर अन्य दांतों की तुलना में बहुत बाद में दिखाई देते हैं, एक ऐसी उम्र में जहां लोग शायद समझदार होते हैं, इसलिए उन्हें विस्डम टिथ भी कहा जाता है। इसे लेकर मिथक है कि इसे  हटाने से मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है, जबकि ऐसा कुछ नहीं होता।

मिथक 4:  दांतों को सख्त ब्रश से साफ करें

तथ्य: जोरदार ब्रश करने से आपके दांत साफ नहीं होंगे, लेकिन इससे घर्षण हो सकता है। गलत ब्रश करने से दांतों की सतह खराब होती है। यह गंभीर सेंस्टिविटी को जन्म दे सकता है। जब आपके दांतों को ब्रश करने की बात आती है, तो आप जिस तरह से दांत साफ करते हैं, वह अधिक मायने रखती है। अगर आप उसे सख्त ब्रश से बहुत तेजी से साफ करेंगे, तो इससे आपको दांत खराब होंगे। इसलिए हमें हमेशा ही सोफ्ट ब्रश का चुनाव करना चाहिए और ब्रश करते वक्त बहुत आराम से दांतो को साफ करना चाहिए।

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मिथक 5: मसूड़ों से खून आने पर ब्रश न करना

तथ्य: ब्लिडिंग गम्स यानी कि मसूडों से खून निकलने की परेशानी। यह अक्सर मसूड़ों में सूजन आ जाने के कारण होती है। दरअसल दांत के आसपास के मसूड़ों में प्लाक जमा होने के कारण ब्लीडिंग होती है और डेंटिस्ट जिंजिवाइटिस में डेंटल स्केलिंग के बाद उचित ब्रश करने की सलाह देते हैं। पर लोगों को यह लगता है कि अगर आपके मसूड़ों में सूजन में है, तो आपको ब्रश नहीं करना चाहिए, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। 

Written by Pallavi Kumari

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