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Effect Of Hypertension: हाइपरटेंशन का शरीर पर पड़ता है बुरा असर, हृदय के साथ आंखों को भी करता है प्रभावित

अन्य़ बीमारियां By मिताली जैन , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 29, 2019
Effect Of Hypertension: हाइपरटेंशन का शरीर पर पड़ता है बुरा असर, हृदय के साथ आंखों को भी करता है प्रभावित

उच्च रक्तचाप सिर्फ रक्त वाहिकाओं पर ही दबाव नहीं डालता, बल्कि इसका व्यापक असर शरीर पर दिखाई देता है। अगर रक्तचाप को नियंत्रित न किया जाए तो इससे व्यक्ति को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

बदलते समय में लोगों ने जिस तरह की जीवनशैली अपनाई है, उसके कारण व्यक्ति को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं में एक है हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप। इसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है जिसके कारण दिल को सामान्य से अधिक कार्य करना पड़ता है। हालांकि उच्च रक्तचाप का कोई लक्षण नहीं होता लेकिन फिर भी यह शरीर पर अपना प्रभाव छोड़ता है। उच्च रक्तचाप के कारण व्यक्ति को सिर दर्द, चक्कर आना, शिथिलता, सांस में परेशानी, नींद न आना, जरा सी मेहनत करने पर सांस फूलना, नाक से खून निकलना आदि परेशानियां हो सकती हैं। इतना ही नहीं, अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो इससे धमनी और रक्त वाहिका की दीवारों को नुकसान पहुंचा सकता है। यहां तक कि इससे व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। तो चलिए जानते हैं उच्च रक्तचाप का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है-

आर्टरीज पर प्रभाव

उच्च रक्तचाप आपकी धमनियों पर विपरीत प्रभाव डालता है। उच्च रक्तचाप धीरे-धीरे आपकी धमनियों से बहने वाले रक्त के दबाव को बढ़ाता है। जिससे धमनियों की अंदरूनी परत की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। जब आपके आहार से वसा आपके रक्तप्रवाह में प्रवेश करते हैं तो वह डैमेज्ड आर्टरीज में एकत्र होने लगता है। जिसके कारण आर्टरीज वाल्स की कम इलास्टिक होती है और जिससे पूरे शरीर में रक्त प्रवाह भी सीमित हो जाता है। 

इतना ही नहीं, जब प्रेशर आपकी आर्टरीज वाल को पुश करता है और उसे कमजोर करता है, यदि यह टूट जाता है तो यह आपके शरीर में खून बह सकता है और यह काफी गंभीर हो सकता है। इसे  एन्यूरिज्म कहा जाता है। यह किसी भी धमनी में हो सकता है, लेकिन यह एरोटा, जो आपके शरीर के मध्य भाग को चलाता है, में होने की संभावना कहीं अधिक होती है।

हृदय पर प्रभाव

उच्च रक्तचाप के कारण व्यक्ति को सीने में दर्द, अनियमित दिल की धड़कन या दिल का दौरा हो सकता है। उच्च रक्तचाप होने पर व्यक्ति के हद्य को को भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है। अतिरिक्त दबाव के कारण दिल का दौरा पड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, धीरे-धीरे व्यक्ति का हद्य काफी कमजोर हो जाता है और वह शरीर में प्रभावी रूप से रक्त पंप करने में सक्षम होना बंद कर देता है। जिससे हार्ट फेल होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

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तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव

आपको शायद पता न हो लेकिन उच्च रक्तचाप तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करता है। उच्च रक्तचाप के कारण समय के साथ व्यक्ति को डिमेंशिया की समस्या होती है।  मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह कम होने से याददाश्त और सोचने में समस्या होती है। आपको चीजों को याद रखने या समझने में परेशानी हो सकती है, साथ ही इससे चीजों की तरफ आपका फोकस भी कम होता है। इतना ही नहीं, उच्च रक्तचाप के कारण मस्तिष्क की धमनियों को भी नुकसान होता है। जब मस्तिष्क में रक्त का एक बड़ा अवरोध उत्पन्न होता है, तो इसे स्ट्रोक कहा जाता है। यदि जब मस्तिष्क के कुछ हिस्सों को रक्त से प्राप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पातीं तो ब्रेन सेल्स मरना शुरू कर देती हैं।

आंखों पर प्रभाव

हाइपरटेंशन आपकी देखने की क्षमता को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उच्च रक्तचाप के कारण आंखों में रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान हो सकता है। अगर वह फट जाती हैं या उनमें से खून बहता है, तो इससे व्यक्ति को देखने में कठिनाई होती है और आपको धुंधलापन या अंधेपन की समस्या हो सकती है।

हड्डियों पर प्रभाव

उच्च रक्तचाप से हड्डियों की हानि हो सकती है, जिसे ऑस्टियोपोरोसिस के रूप में जाना जाता है। उच्च रक्तचाप आपके यूरिन में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा सकता है और शरीर के अधिक मात्रा में कैल्शियम की हानि होने से बोन डेंसिटी पर प्रभाव पड़ता है। जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उनके टूटने की संभावना अधिक हो जाती है। खासतौर से, रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में यह जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

श्वसन प्रणाली पर प्रभाव

मस्तिष्क और हृदय की तरह ही उच्च रक्तचाप के कारण फेफड़ों में धमनियां क्षतिग्रस्त या अवरुद्ध हो सकती हैं। जब आपके फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाली धमनी अवरुद्ध हो जाती है, तो इसे फुफ्फुसीय अन्तः शल्यता कहा जाता है। यह एक बेहद गंभीर स्थिति है और इस अवस्था में तत्काल चिकित्सीय मदद की जरूरत होती है। अगर इस पर ध्यान न दिया जाए तो इससे फेफड़े में एन्यूरिज्म भी हो सकता है।

नींद पर प्रभाव

नींद संबंधी विकार स्लीप एप्निया और उच्च रक्तचाप आपस में कनेक्टेड हैं। माना जाता है कि उच्च रक्तचाप ही स्लीप एपनिया को ट्रिगर करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, स्लीप एपनिया के परिणामस्वरूप जब व्यक्ति को नींद में परेशानी होती है तो यह आपके रक्तचाप को बढ़ा भी सकता है।

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प्रजनन प्रणाली पर प्रभाव

उच्च रक्तचाप आपकी प्रजनन प्रणाली को भी प्रभावित करता है। दरअसल, आपके यौन अंग उत्तेजना के दौरान अतिरिक्त रक्त प्रवाह का उपयोग करते हैं। जब उच्च रक्तचाप के कारण लिंग या योनि तक जाने वाली रक्त वाहिकाओं में रुकावट होती है, तो इससे कई तरह के यौन रोग हो सकते हैं। इस यौन समस्याओं में मुख्य रूप से उत्तेजना में कमी, योनि का सूखापन व संभोग करने में परेशानी आदि शामिल है।

यूरिनरी सिस्टम पर प्रभाव

किडनी रक्त से अपशिष्ट हटाने व ब्लड प्रेशर व वाल्यूम को रेग्युलेट करने में मदद करती हैं। यह केवल तभी संभव है, जब आपकी रक्त वाहिकाएं स्वस्थ हों। उच्च रक्तचाप आपके गुर्दे तक जाने वाली बड़ी रक्त वाहिकाओं और आपके गुर्दे के अंदर छोटी वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं। जिसके कारण गुर्दे सही तरह से काम नहीं कर पाते और व्यक्ति को किडनी संबंधी समस्याएं यहां तक कि किडनी फेल का भी सामना करना पड़ता है।  उच्च रक्तचाप गुर्दे की विफलता के प्रमुख कारणों में से एक है।

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