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    त्वचा की संक्रामक बीमारी है हर्पीज जॉस्टर, ये हैं कारण, लक्षण और इलाज

    संक्रामक बीमारियां By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 03, 2018
    त्वचा की संक्रामक बीमारी है हर्पीज जॉस्टर, ये हैं कारण, लक्षण और इलाज

    इस बीमारी की शुरुआत त्वचा पर मामूली दानों से होती है मगर धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्से में कई ढेर सारे दाने निकल आते हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है। इन दानों में दर्द भी होता है और जलन भी होती है।

    हमारी त्वचा बहुत संवेदनशील होती है। शरीर में होने वाली कई अंदरूनी समस्याओं के लक्षण त्वचा पर दिखाई देते हैं। हार्पीज जॉस्टर त्वचा की एक गंभीर बीमारी है, जिसे शिंगल्स के नाम से भी जाना जाता है। इस बीमारी की शुरुआत त्वचा पर मामूली दानों से होती है मगर धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्से में कई ढेर सारे दाने निकल आते हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है। इन दानों में दर्द भी होता है और जलन भी होती है साथ ही कुछ लोगों में उस अंग में सूजन की समस्या भी देखी जाती है। आमतौर पर इस रोग का खतरा 40 वर्ष की उम्र के बाद होता है मगर कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण ये किसी भी उम्र में हो सकता है। आइए आपको बताते हैं कि क्या है हर्पीज जॉस्टर या शिंगल्स बीमारी और क्या हैं इसके लक्षण और इलाज।

    क्या है हर्पीज जॉस्टर बीमारी

    हर्पीज जॉस्टर या शिंगल्स आमतौर पर कमजोर इम्यूनिटी सिस्टम वाले लोगों में तनाव, चोट और कई बार दवाओं के साइड-इफेक्‍ट के कारण होता है। यही बीमारी हमारे नर्व रुट्स में छिपे वैरिसेला-जॉस्टर नामक वायरस के सक्रिय हो जाने के कारण होती है। वैरिसेला-जॉस्टर एक प्रकार का हर्पीज वायरस है, जिससे चिकनपॉक्स होता है। अक्सर ऐसा होता है कि चिकनपॉक्स के बाद शरीर में ये वायरस नर्व रुट्स में छिपे रह जाते हैं। कुछ लोगों में यह दोबारा सक्रिय हो जाते हैं और शिंगल्स रोग पैदा करते हैं। शिंगल्स का सबसे सामान्य लक्षण शरीर के एक ओर के हिस्से में दर्द और छाले होना है।

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    हर्पीज जॉस्टर बीमारी के लक्षण

    शिंगल्स बीमारी होने पर आमतौर पर शरीर के एक हिस्से में छोटे-छोटे छालेनुमा दाने हो जाते हैं, जिनमें दर्द भी होता है। चिकित्सकीय परीक्षणों से शिंगल्स होने की पुष्टि हो सकती है और डॉक्टर प्रायः शरीर के बांए या दांए किसी एक ओर रैशेज देखकर शिंगल्स की पहचान करते हैं। अगर जांच में रोग की स्पष्ट पहचान नहीं हो पाती तो फफोलों की कोशिकाओं की जांच से हर्पीज का पता लगाया जा सकता है। अगर इसका निदान हो जाए तो डॉक्टर छालों की कोशिकाओं के जांच का इंतजार नहीं करते और एंटीवायरल दवाओं से इलाज शुरू कर देते हैं।

    हर्पीज जॉस्टर से कैसे संभव है बचाव

    शिंगल्स या हर्पीज जॉस्टर से बचाव के लिए सबसे पहला विकल्प है शिंगल्स वैक्सीन। अगर आप 60 वर्ष से अधिक हैं, तो शिंगल्स वैक्सीन आपको शिंगल्स से बचा सकता है। अगर आपको पहले कभी शिंगल्स हो चुके हैं, तो इस वैक्सीन की वजह से आपको फिर से कभी शिंगल्स नहीं होंगे। अगर आपको शिंगल्स हो गया है, तो आमतौर पर इलाज के दौरान या बाद डॉक्टर ये वैक्सीन लगा देते हैं।
    शिंगल्स वैक्सीन जोटेवैक्स चिकनपॉक्स के वायरस को कमजोर करता है। ये वैक्सीन आपके इम्यून सिस्टम को वैरिसेला-जोस्टर वायरस से लड़ने के लिए तैयार करता है। शिंगल्स वैक्सीन शिंगल्स होने के खतरे को 50 प्रतिशत तक कम कर देता है। खोज बताती हैं कि शिंगल्स वैक्सीन शिंगल्स के दौरान होने वाले नर्व पेन पोस्ट हर्पेटिक न्यूरेल्जिया के समय को कम करने में भी मदद करता है। ये बहुत दर्दभरा होता है, और आमतौर पर 30 दिन तक रहता है।

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    हर्पीज जॉस्टर या शिंगल्स का वैक्सीन

    हर्पीज जॉस्टर या शिंगल्स आमतौर पर उन्हें होता है जिनकी उम्र 50 या इससे अधिक हो, जिनका इम्यून सिस्टम ठीक से काम न करता हो या ऐसे लोग जो ऑटोइम्यून रोगों की दवाएं लेते हों। शिंगल्स वैक्सीन 50 या उससे अधिक उम्र वालों को लगाई जाती है। उन लोगों को भी शिंगल्स वैक्सीन लगवाना चाहिए जिन्हें शिंगल्स हो चुका है।

    वैक्सीन लगने के बाद बरतें ये सावधानी

    • गर्भावस्था के दौरान शिंगल्स वैक्सीन नहीं लगवाना चाहिए।
    • शिंगल्स वैक्सीन लगवाने के बाद कम से कम तीन महीने तक गर्भधारण नहीं करना चाहिए।
    • अगर आपको पहले से किसी तरह की एलर्जी से डॉक्टर को इस बारे में बता दें।
    • टीबी के रोगियों को ये वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए।
    • फ्लू वैक्सीन की ही तरह, शिंगल्स वैक्सीन बाजु में ऊपर की ओर दी जाती है।
    • इसके साइड इफैक्ट्स में, लाली, हल्का दर्द, सूजन या इंजेक्शन की जगह पर खुजली होना हो सकते हैं।
    • किसी-किसी को सिर दर्द भी हो सकता है। लेकिन ऐसा बहुत कम मामलों में होता है।

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