शरीर में पोटैशियम की कमी के संकेत हैं ये 2 लक्षण, इन चीजों के सेवन से करें भरपाई

शरीर में पोटैशियम की कमी के संकेत हैं ये 2 लक्षण, इन चीजों के सेवन से करें भरपाई

पोटेशियम की कमी से मानसिक स्वास्थ्य भी बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। आज हम पोटेशियम की कमी से दिमाग पर होने वाले प्रभाव के बारे में बात कर रहे हैं। पोटेशियम की कमी हो जाने पर मानसिक तौर पर निम्न नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

पोटैशियम कैल्शियम, पोटैशियम क्लोराइड, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और सल्फर सहित हमारे शरीर के लिए सबसे आवश्यक मिनरल्‍स में से एक होता है। आमतौर पर वयस्‍कों को रोजाना 47000 मिलीग्राम पोटैशियम की जरूरत होती है, और यह रोजमर्रा के खानपान से मिल जाने वाला पोषक तत्‍व है। यह कोशिकाओं, ऊतकों और मांसपेशियों के लिए बेहद अहम होता है। पोटैशियम ह्रदय, दिमाग और मांसपेशियों की कार्यप्रणाली में मदद करता है। शरीर में पोटैशियम की कमी से हाइपोकैलीमिया होने का खतरा हो जाता है। साथ ही इसकी कमी से मानसिक स्वास्थ्य भी बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। आज हम पोटैशियम की कमी से दिमाग पर होने वाले प्रभाव के बारे में बात कर रहे हैं। पोटैशियम की कमी हो जाने पर मानसिक तौर पर निम्न नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

लगातार थकान बने रहना

शरीर में पोटैशियम की कमी का एक बड़ा लक्षण थकान भी होता है। यदि थकान बहुत ज्यादा काम की वजह से हो तो और बात है, लेकिन अगर बिना काम किए भी ये लगातार बनी रहती है तो इसका मुख्य कारण पोटैशियम की कमी हो सकता है। दरअसल शरीर में मौजूद हर कोशिका को काम करने के लिए पोटैशियम और खनिज लवणों की एक निश्चित मात्रा की जरूरत होती है, लेकिन इसकी पूर्ति न हो पाने पर शरीर में थकान और कमजोरी रहने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब तक दिमाग में पोटैशियम की सही मात्रा नहीं पहुंचती है तब तक वह ठीक से काम नहीं कर पाता है। 

तनाव या डिप्रेशन का होना

पोटैशियम एक ऐसा खनिज है जो शरीर की गतिविधियों से जुड़े संकेतों को दिमाग तक पहुंचाता है। शरीर में पोटैशियम की कमी हो जाने की स्थिति में ये संकेत दिमाग तक नहीं पहुंच पाते हैं और तनाव या अवसाद की समस्या होने लगती है। तनाव का सीधा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। 1992 में हुए एक अध्ययन में पाया भी गया कि डिप्रेशन के मरीजों में पोटैशियम का स्तर सामान्य से कम था।

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मूड स्विंग होना

पोटैशियम की कमी हाई ब्‍लड प्रेशर और हाइपरटेंशन के जोखिम को बढ़ सकती है। दरअसल पोटेशियम हृदय को स्‍वस्‍थ रखने में सहायक होता है। ये शरीर में सोडियम की मात्रा को कम बनाए रखने के साथ-साथ ब्‍लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। और जब इसकी मात्रा शरीर में गिरने लगती है तो ये दिमाग के काम करने की क्षमता को भी प्रभावित करता है और मूड स्विंग अर्थात विचारों में अजीब परिवर्तन होने लगता है।

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पोटैशियम की कमी दूर करने के उपाय

अगर पोटैशियम की कमी को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो आगे चलकर यह समस्या गंभीर हो सकती है, और इसके कारण दस्त, निर्जलीकरण (dehydration), उल्टी या लगातार रहनो वाला अवसाद या तनाव हो सकता है। इसकी कमी को पूरा करने के लिए कई बार डॉक्टर दवाएं दे सकता है, हालांकि प्राकृतिक खाद्य पदार्थ से भी इसकी कमी को पूरा किया जा सकता है, जैसे- टमाटर, आलू, केला, बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, दही, मछली, मशरूम आदि। अतः पोटैशियम की कमी से होने वाले लक्षण जब नजर आने लगें तो तुरन्त डॉक्टर से सलाह लें और इसकी कमी को पूर्ण करने की कोशिश करें।

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