International Yoga Day 2020: शरीर को मजबूत और लचीला बनाता है भूनमनासन (Earth Pose), जानें इसके अन्‍य फायदे

Updated at: Jun 13, 2020
International Yoga Day 2020: शरीर को मजबूत और लचीला बनाता है भूनमनासन (Earth Pose), जानें इसके अन्‍य फायदे

यहां हम आपको भूनमनासन यानि Earth Pose के फायदे, आसन को करने का तरीका और सावधानियां बता रहे हैं। 

Sheetal Bisht
योगाWritten by: Sheetal BishtPublished at: Jun 13, 2020

क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी को धरती माता क्यों कहा जाता है? हम यहां पैदा हुए हैं, यहीं रहते हैं और यहीं मर कर मिट्टी में समा जाते हैं। पृथ्वी एक माँ की तरह हमारी देखभाल करती है, जहाँ यह हमें जीने के लिए भोजन और आश्रय देती है। हमें अपनी माँ की तरह पृथ्वी का सम्मान करना चाहिए। यह अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, हम सभी को भूनमनासन के साथ पृथ्वी का सम्मान करना चाहिए। भूनमनासन को Earth Pose के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि आप व्यायाम करते समय पृथ्वी को श्रद्धांजलि या नमन करते हैं। यह आसन एक बहुत बड़ा महत्व रखता है क्योंकि यह हमारी मातृभूमि के साथ जुड़ने में मदद करता है, जो हमारे जीवन के लिए जिम्मेदार है। साथ ही, यह मुद्रा भावनात्मक संबंधों को बढ़ाते हुए शरीर को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए किया जाने वाला व्यायाम है। आइए हम आपको भूनमनासन योग के बारे में और अधिक जानकारी देते हैं।

 All About Bhunamanasana

भूनमनासन क्‍या है?

भू (पृथ्वी) + नमन (अभिवादन) + आसन (मुद्रा) = भूनमनासन या Earth Pose

भूनमनासन एक पारंपरिक हठ योग मुद्रा है। इसे स्पाइनल ट्विस्ट प्रोस्टीट्यूशन पोज भी कहा जाता है, जिसमें आप अपने पैरों के साथ एक पोजीशन में बैठते हैं, जिसमें कि पैरों को जमीन पर सीधा फैलाने के साथ आपका ऊपरी शरीर जमीन को छूने और धरती को नमस्कार करने की ओर झुकता है। आप इस आसन के कठिनाई स्तर का मूल्यांकन कर सकते हैं लेकिन अभ्यास एक आदमी को परिपूर्ण बनाता है। इस अभ्यास को रोजाना करने पर, आप न केवल इस आसन को सही करेंगे, बल्कि एक मजबूत, और लचीले शरीर का निर्माण करेंगे। अभ्यास के प्रत्येक दिन के साथ, आप प्रकृति के एक कदम करीब आते हैं।

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भूनमनासन करने के स्वास्थ्य लाभ

भूनमनासन एक कठिन अभ्यास है, लेकिन जैसा कि आप इसका अभ्यास करते हैं, आप भूनमनासन से कई फायदे पाते है, जो कोई अन्य आसन आपको नहीं दे सकता है। यहाँ आपको भूनमनासन के लिए प्रेरित करने के कुछ स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिए गए हैं:

 Bhunamanasana Benefits

  • रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत करता है और लचीलापन बढ़ाता है। 
  • थोरैसिक स्पाइन यानी आपकी ऊपरी पीठ को मजबूत करता है और इसका लचीलापन बढ़ाता है। 
  • इस आसन को करने से आपकी रीढ़ को मोड़ने से, रिब केज यानि पसलियों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होंगी। 
  • कूल्हे के चारों ओर जोड़ों के दर्द व मसल्‍स में सुधार करता है। 
  • क्वाड्रिसप यानि जांघ की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जो पैरों के आसपास स्थित होती हैं। 
  • आपकी गर्दन और कंधों को लचीला बनाता है। 
  • महत्वपूर्ण आंतरिक अंगों के कार्यों को बढ़ावा है। 
  • पाचन में सुधार करता है। 
  • लिवर के कार्यों को बढ़ावा देता है और फैटी लिवर की स्थिति का इलाज करने में मददगार है। 
  • पेट की मांसपेशियों को टोन करता है और शरीर की चर्बी कम करता है। 
  • थर्ड आई चक्र या अजना चक्र को खोलता है। 
  • थायरॉइड ग्रंथि के कार्यों को नियंत्रित करता है। 

भूनमनासन कैसे करें? 

यहाँ भूनमनासन को किस तरह से करना है, इसके आसान स्‍टेप्‍स दिए गए हैं:

  • आराम से जमीन पर योगा मैट या चटाई बिछाकर बैठें। ध्‍यान दें, कि जमीन समतल हो। 
  • जमीन पर अपने पैरों को पक्षी के पंखो की तरह फैलाकर बैठें। आपके दोनों पैर आपके कूल्‍हों और कमर की सीधाई में होने चाहिए। 
  • अपनी रीढ़ या पीठ को सीधा रखें।
  • धीरे-धीरे सांस लें और अपनी हाथों को उठाते हुए अपने दोनों पैर की उंगलियों को पकड़ें। 
  • अब जमीन की ओर आगे झुकना शुरू करें।
  • शुरूआत में आप उतना ही करें, जितना आपका शरीर आपको करने की अनुमति देता है। शरीर पर ज्‍यादा जोर न दें, वरना आपको दर्द हो सकता है। 
  • अपने माथे या ठुड्डी से फर्श को छूने की कोशिश करें।
  • यदि आप नहीं कर सकते, तो चिंता न करें। कोई भी इस आसन को पहली या दूसरी बार में पूरा नहीं कर सकता। आपके लचीलेपन में धीरे-धीरे सुधार होगा और नियमित रूप से करने पर आप थोड़-थोड़ा करके इस आसन को पूरा कर पाएंगे। 
  • अब पहले वाली स्थिति में वापस आएं। एक मिनट के लिए आराम करें।
  • इस आसन को रोजाना एक-दो बार दोहराएं।
How To Do Earth Pose

कब आपको भूनमनासन करने से बचना चाहिए?

हालांकि, भूनमनासन के बहुत सारे स्‍वास्‍थ्‍य लाभ है लेकिन कुछ स्थितियों में आपको इस आसन को करने से बचना चाहिए:

  • गर्भवती महिला
  • ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या 
  • हर्निया के मरीज
  • पेट के अल्‍सर की शिकायत वाले लोगों को
  • स्पोंडिलाइटिस के मरीज
  • माइग्रेन
  • पीठ या रीड़ में बहुत अधिक दर्द या समस्‍या 

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